हद हो गई – व्यंग

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Old satire  & English news- Rats drank it’: Cops as 1,000 litres of seized liquor disappears from police station चूहों का स्ट्राइक – व्यंग

मालखाने के शराब पीने के कलंक से आहत ,

चूहों में राहत की लहर दौड़ गई है.

लम्बी स्ट्राइक के बाद सच्चाई सामने आता देख ,

शराब की लापता बोतलेंपुलिस वालों के पास पा

चूहों ने ली चैन की साँस और नारा लगते देखे गए –

चूहे शराब नहीं पीते !!!!!

Latest news in English – Huge liquor stock seized from SHO’s residence in dry Bihar, entire police station staff replaced

एक टुकड़ा जिंदगी का 

News -At least70 kids died.

At least70 kids have died over the course of 5 days at the Baba Raghav Das Medical College hospital in Gorakhpur, Uttar Pradesh. Authorities have launched an inquiry into the causes of the oxygen disruption but denied reports that it had caused the deaths at the state-run hospital.

​कभी पढ़ा सैकडों लीटर खून बर्बाद हो गया ,

अब बिना हवा -आक्सीजन बच्चे …..

ना जिम्मेदारी है , न जीवन का मोल.

पर बेजान घरों  और कब्रों 

पर नाम लिख दावेदारी दिखाने में 

हम कमी नहीं करते।

एक टुकड़ा जिंदगी का ,

ये बच्चे

कितने अनमोल है ,

उनसे पूछो, जिनके मासूम 

बिना साँस लिये चले गये……


चेहरे पर स्टैम्प क्यों ?? Stamped faces

News

Bhopal – Faces of the children were reportedly stamped by the jail authorities in a bid to distinguish them from the children of the women inmates.

भोपाल सेंट्रल जेल में बंद अपने पिता से मुलाकात करने गए दो बच्चों के चेहरे पर मुहर लगाए  गये।

 

क्या हम मशीन बन गये है ?

और काग़ज़ समझ रखा है ,

इन मासूम नाजुक चेहरों को ?

जो हथेली पर लगने वाले स्टैम्प

 इनके गालों पर लगा दिया ?

त्योहार के दिन जेल में अपनों

से मिलने जाने की यह क्रूर सजा क्यों ?

शायद लोगों में मानवता …..बची ही नहीँ

 या यह शक्ति – ओहदे  का मद है ?

या मजाक करने का पीड़ादायक तरीका ??

क्या उनके बच्चों के साथ

 ऐसा किया जाना पसंद  आयेगा उन्हे ?

 

 

आँसू और अफीम – कविता 

Opium addiction in Rajasthan, India :  A social Issue —- Poppy flowers are  very beautiful and delicate.  Opium is produced from it.  India  is the only country ,   produces opium gum legally  and one of very few countries that legally allows  growing poppy  to get opium for medicinal purpose.

But the negative aspect is – drug trafficking  and opium  addiction, As no. of  opium   users  are increasing day by day, specially in Rajasthan.

 

पेड़ की छाया में बैठे पुरुषों की 

अफीम की पिनक में डूबी मजलिस ने,

गुङगुङाते हुक्के का धुआँ उडाते हुए दूर ….. देखा………..

रंग बिरंगे ,  शीशे जड़े लहँगें-चोली  में मीलों से

 तपती  रेत पर, ठंडे  पानी के

घड़े  एक पर एक  रख 

गाती गुनगुनाती औरतों को.

अौर  कहा – 

 इन लुगाईयों के मजे तो  देखो ,

गीत गा रहीं है , ना दिखता है

 हम कब से भूखे बैठे है ……

पर क्या उन्हे दिखता है लुगाईयों के 

 गर्म रेत से पड़े पैरों के छालें 

और चूल्हे की लकड़ी से उठे धुयें से आये आँसू  ???

  फ़िर भी …..

वे पॉपी के फूलों सी नाजुक  अौरतें

 गाती गुनगुनाती रहती है …..

R w

 

राजस्थान, भारत में अफीम की लत: एक सामाजिक मुद्दा है —-पॉपी के फूल बङे नाजुक अौर सुंदर होते हैं। इसे अफिम तैयार किया जाता है।   भारत एकमात्र देश है जो कानूनी तौर पर अफीम गम का उत्पादन करता है । यह उन गिनती के  देशों में से एक है, जो कानूनी रूप से औषधीय उद्देश्य के लिए  अफीम प्राप्त करने के  लिये पॉपी की  खेती की अनुमति देता है।

लेकिन नकारात्मक पहलू है – अफीम की तस्करी और  दिन पर दिन   नशेङियोँ कि संख्या में वृद्धि।

 

 

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भव्य साङी- कविता saree – poem #indianTraditionalWear


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#sareefestival #Shailysahayreadingitatsareefestival

 Sari  is  considered to be of  spiritual benefits in compression to Stitched fabrics . Saree is a traditional Indian wear. It is an unstitched length of cloth measuring 42 – 49″ wide and 5.5 to 9 yards in length.

९ गज का वस्त्र ,साङी पारंपारिक अौर सात्त्विक परिधान माना जाता है । गांठ से  बांधनेवाले, बिनसिले वस्त्र के ४-५ मीटर लंबे टुकडे, जो कमर पर लपेटे कर कटि में गांठ द्वारा बांधे जाते हैं, सिले हुए वस्त्रों की तुलना में आध्यात्मिक लाभ वाले माने जाते हैं।

sari

क्या होता है कहीं ऐसा परिधान ?
खुबसूरत भव्य साङी, मात्र एक लम्बा चीर
नारी के सौंदर्य को बढाता भी है
अौर छुपाता भी है।
ममता भरे आचंल की छावँ,
घुँघट अौर पल्लु की नव गजी ,
भारतीय नारी की पारंपरिक साडी।

इसे बनाने, बुनने अौर पहनने के अनगिनत तरिके।
कभी ना कभी हर वामा हर नारी,
दिल से, पहनती है साङी।
कहनेवाले कहते हैं –
विदेशी वस्र हैं, महिला अपमान का कारण,
पर चीर हरण तब भी होता था,
अब भी होता है।
समस्या वस्र नहीं, मानसिकता में है।

आध्यात्मिक कहलाने वाले धोती-साङी , थी परंपरा पहचान,
पुरुष भूल रहें हैं
पर, कैसे पहने साङी इसमें आज भी उलझी नारी।

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जिंदगी के रंग -कविता 9


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Female weeper / weeping woman / professional mourners  –  In some part of    Rajasthan, India,  women (of a specific  caste ) are hired as professional mourners . They   are know as  “rudaali” /female weeper/ weeping woman  . Their job is to publicly express grief for family members who are not permitted to display emotion due to social status.

कुछ लोग हँस  कर ,

और कुछ हँसा कर

कमाते हैं.

कुछ लोग रो कर (रुदाली )

और कुछ लोगों को रुला कर.

रुलाने वाले क्या जवाब देंगे ?

   जब

ऊपर वाला उनसे पूछेगा –

उन्होंने क्या कमाया  ?

राजस्थान में कुछ  स्थानों पर  ऐसी प्रथा हैं. जिसमें सम्पन्न परिवारों में रो कर मातम मानने  के लिये रुदाली ( जाति  विशेष की महिलायें ) बुलायी जाती हैं.

rudaali

 

 

 

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पोक्सो ई- बाक्स लान्च ( बच्चों के लिए कानून में एक नया कदम- समाचार आधारित) POCSO Act – Providing Child-Friendly Judicial Process

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बच्चों के साथ हो रहे यौन अपराधों को नियंत्रित करने के लिए “प्रोटेक्सन ऑफ चिल्ड्रेन फ़्रोम सेक्सुयल ओफ़ेंसेस” कानून बनाया गया। यह लगभग तीन वर्ष पहले बच्चों के सुरक्षा के लिए बनाया गया कानून है।

बच्चों के इस कानून में एक नया कदम लिया गया ही।   इसके लिये ई- बाक्स लान्च  किया गया है। जिससे ज्यादा सरलता से सीधे शिकायत दर्ज किया जा सकता है। इससे गोपनियता बी बनी रहती है।

पोक्सो- बच्चों के लिए कानून ( महत्वपूर्ण जानकारी ) समाचार आधारित

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हमारे देश में बच्चों के लिए कड़े कानून की जरूरत कई बार महसूस की गई। पहले भारत में बाल मुकदमों की प्रक्रिया जटिल और थकाने वाला था। अतः भारत की संसद अधिनियम में 22 मई 2012 को बाल यौन शोषण के खिलाफ बच्चों का संरक्षण कानून पारित किया।

आज विश्व में बच्चों की सब से बड़ी आबादी भारत में है । हमारे देश में लगभग 42 प्रतिशत आबादी अठारह वर्ष से कम उम्र के बच्चों की है। अतः बच्चों का स्वास्थ्य और सुरक्षा महत्वपूर्ण है। ये बच्चे भविष्य की अनमोल निधि है।
यह अधिनियम अठारह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बनाया गया है। यह बच्चों के स्वस्थ, शारीरिक, भावनात्मक , बौद्धिक और सामाजिक विकास सुनिश्चित करने को महत्व देता है। बच्चे के साथ मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न या दुर्व्यवहार दंडनीय है। इस अधिनियम के तहत कठोर दंड का प्रावधान है ।

बच्चों के साथ हो रहे यौन अपराधों को नियंत्रित करने के लिए “प्रोटेक्सन ऑफ चिल्ड्रेन फ़्रोम सेक्सुयल ओफ़ेंसेस” कानून बनाया गया। यह दो वर्ष पहले बच्चों के सुरक्षा के लिए बनाया गया कानून है। पर यह कानून बहुत कम लोगों को मालूम है। अतः इसका पूरा फ़ायदा लोगों को नहीं मिल रहा है। इसलिए लोगों के साथ-साथ बच्चों और सभी माता-पिता को भी इसकी समझ और जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही बच्चों में सही-गलत व्यवहार की समझ और निर्भीकता भी विकसित किया जाना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि सभी माता-पिता बच्चों की सभी बातों को सुने और समझे।
लोगों में जागरूकता लाने के लिए मीडिया, लेखकों, पत्रकारों को सहयोग महत्वपूर्ण है। अतः कलम की ताकत का भरपूर उपयोग करना चाहिए।

 

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आज की द्रौपदी (कहानी )

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वह हमारे घर के पीछे रहती थी। वहाँ पर कुछ कच्ची झोपङियाँ थीं। वह वहीं रहती थी। कुछ घरों में काम करती थी। दूध भी बेचती थी। लंबी ,पतली, श्यामल रंग, तीखे नयन नक्श अौर थोङी उम्र दराज़। उसका सौंदर्यपुर्ण, सलोना अौर नमकीन चेहरा था। उसकी बस्ती में जरुर उसे सब रुपवती मानते होंगे।

जब भी मैं उधर से गुजरती । वह मीठी सी मुसकान बिखेरती मिल जाती। उसकी मुसकान में कुछ खास बात थी। मोनालिसा की तरह कुछ रहस्यमयी , उदास, दर्द भरी हलकी सी हँसी हमेशा उसके होठों पर रहती। एक बार उसे खिलखिला कर हँसते देखा तब लगा मोनालिसा की मुसकान मेरे लेखक मन की कल्पना है।

एक दिन उसकी झोपङी के सामने से गुजर रही थी। वह बाहर हीं खङी थी। मुझे देखते हँस पङी अौर मजाक से बोल पङी – मेरे घर आ रही हो क्या? मैं उसका मन रखने के लिये उसके झोपङी के द्वार पर खङे-खङे उससे बातें करने लगी। उसका घर बेहद साफ-सुथरा, आईने की तरह चमक रहा था। मिट्टी की झोपङी इतनी साफ अौर व्यवस्थित देख मैं हैरान थी।

एक दिन, सुबह के समय वह अचानक अपने पति के साथ हमारे घर पहुँच गई। दोनों के चेहरे पर चिन्ता की लकीरें थीं। पति के अधपके बाल बिखरे थे। उसके कपङे मैले-कुचैले थे। शायद उम्र में उससे कुछ ज्यादा हीं बङा था। पर वह बिलकुल साफ-सुथरी थी। तेल लगे काले बाल सलिके से बंधे थे। बहुत रोकने पर भी दोनों सामने ज़मीन पर बैठ गये।

पता चला, उनका बैंक पासबुक पति से कहीं खो गया था। वह बङी परेशान सी मुझ से पूछ बैठी -“ अब क्या होगा? पैसे मिलेंगे या नहीं ?” दोनों भयभीत थे। उन्हें लग रहा था, अब बैंक से पैसे नहीं मिलेगें। वह पति से नाराज़ थी। उसकी अोर इंगित कर बोलने लगी – “देखो ना, बूढे ने ना जाने “बेंक का किताब” कहाँ गिरा दिया है।” जब उसे समझ आया । पैसे अौर पासबुक दोनों बैंक जा कर बात करने से मिल जायेंगें, तब उसके चेहरे पर वही पुरानी , चिरपरिचित मोनालिसा सी मुसकान खेलने लगी।

उस दिन मैं उसके घर के सामने से गुजर रही थी। पर उसका कहीं पता नहीं था। मेरे मन में ख्याल आया, शायद काम पर गई होगी। तभी वह सामने एक पेंङ के नीचे दिखी। उसने नज़रें ऊपर की। उसकी हमेशा हँसती आखोँ में आसूँ भरे थे। मैं ने हङबङा कर पूछा – “ क्या हुआ? रो क्यों रही हो?”

***

उसका बाल विवाह हुआ था। कम वयस में दो बच्चे भी हो गये। वह पति अौर परिवार के साथ सुखी थी। उसके रुप, गुण अौर व्यवहार की हर जगह चर्चा अौर प्रशंसा होती थी। एक दिन उसका पति उसे जल्दी-जल्दी तैयार करा कर अपने साथ कचहरी ले गया। वहां एक अधेङ व्यक्ति को दिखा कर कहा – अब तुम इसके साथ रहोगी। मैं ने तुम्हें बेच दिया है।“ वह जब रो -रो कर ऐसा ना करने की याचना करने लगी। तब पति ने बताया, यह काम कचहरी में लिखित हुआ है। अब कुछ नहीं हो सकता है।

उसकी कहानी सुन कर , मुझे जैसे बिजली का झटका लगा। मैं अविश्वाश से चकित नेत्रों से उसे देखते हुए बोलने लगी – “ यह तो नाजायज़ है। तुम गाय-बकरी नहीं हो। तुम उसकी जायदाद नहीं । जो दाव पर लगा दे या तुम्हारा सौदा कर दे। उसने तुम से झूठ कहा है। यह सब आज़ के समय के लिये कलकं है।”

       उसने बङी ठंङी आवाज़ में कहा – “ तब मैं कम उम्र की थी। यह सब मालूम नहीं था। जब वह मुझे पैसे के लिये बेच सकता है। तब उसकी बातों का क्या मोल है। अब सब समझती हूँ। यह सब पुरानी बात हो गई।”  मैं अभी भी सदमें से बाहर नहीं आई थी। गुस्से से मेरा रक्त उबल रहा था। आक्रोश से मैं ने उससे पूछ लिया – “ फिर क्यों रो रही हो ऐसे नीच व्यक्ति के लिये।”

उसने सर्द आवाज़ में जवाब दिया – “ आज सुबह लंबी बीमारी के बाद उसकी मृत्यु हो गई। उसके परिवार के लोगों ने खबर किया है । पर तुम्हीं बताअो, क्या मैं विधवा हूँ? मेरा बूढा तो अभी जिंदा है। मैं उसके लिये नहीं रो रहीं हूँ। उसकी मौत की बात से मेरे बूढे ने कहा, अगर मैं चाहूँ, तो विधवा नियम पालन कर सकती हूँ। मैं रो रही हूँ , कि मैं किसके लिये पत्नी धर्म निभाऊँ? मैंने तो दोनों के साथ ईमानदारी से अपना धर्म निभाया है।
उसकी बङी-बङी आँखो में आँसू के साथ प्रश़्न चिंह थे। पर चेहरे पर वही पुरानी मोनालिसा की रहस्यमयी , उदास, दर्द भरी हलकी सी हँसी , जो हमेशा उसके होठों पर रहती थी।

 

 

छायाचित्र  इंद्रजाल से।

Just like Abhimanyu (poem)

baby

 just like abhimanyu

I – unborn baby,

listen to all worldly voices,

People were saying –

Save girl child, educate them..…

I don’t know wether I am a girl or boy.

but certainly,

I am completely safe here.

 One day  

I heard a voice saying – It’s a girl.

somebody whispered,  Remove her …….

 

 

Abhimanyu is an important character of the Mahabharat epic. While in his mother’s womb he had heard his father explain the way to break the most difficult chakravyuha.

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