कोरोना से संघर्षरत हिंदुस्तान
Don’t shoot them with your camera !
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Eternal Shine !!

यह खबर पढ़ कर सभी पक्षियों को बड़ी हैरानी हुई. इंसानों ने रवायत, नियमों को अपने आप पर लागू होते देख बोल पड़े खग – बड़े विचित्र हैं ये ! बिना हमारी कामना जाने हमें क़ैद में रख कर मन बहलाना तो इनका पुराना शग़ल था. पर ये नहीं मालूम था अपने यहाँ के रीत और कुरीति हम पर भी थोप रहें हैं. नर-नारी, नर-मादा के मूल्यों में भी श्रेष्ठता, उच्चता-निम्नता का खेल? इनसे ज़्यादा समझदार तो हम हैं. खुले आसमान में खुला और बंधनविहीन जीवन जीतें हैं.

जीवन प्रवाह में बहते-बहते आ गये यहाँ तक।
माना, बहते जाना जरुरी है।
परिवर्तन जीवन का नियम है।
पर जब धार के विपरीत,
कुछ गमगीन, तीखा मोङ आ जाये,
किनारों अौर चट्टानोँ से टकाराने लगें,
जलप्रवाह, बहते आँसुअों से मटमैला हो चले,
तब?
तब भी,
जीवन प्रवाह का अनुसरण करो।
यही है जिंदगी।
प्रवाह के साथ बहते चलो।
अनुगच्छतु प्रवाह ।।
अहले सुबह नींद खुली मीठी, गूँजती आवाज़ों से.
देखा बाहर परिंदों की सभा है.
शोर मचाते-बतियाते किसी गम्भीर मुद्दे पर, सभी चिंतित थे
– इन इंसानों को हुआ क्या है?
बड़े शांत हैं? नज़र भी नहीं आते?
कहीं यह तूफ़ान के पहले की शांति तो नहीं?
हाल में पिंजरे से आज़ाद हुए हरियल मिट्ठु तोते ने कहा –
ये सब अपने बनाए कंकरीट के पिंजरों में क़ैद है.
शायद हमारी बद्दुआओं का असर है.
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