घाट घाट जाती है किश्ती

मुसाफ़िरों को नदी पार कराती किश्ती।
घाट घाट जाती है किश्ती।
पानी-हवा की दोस्ती से नदिया के
साथ तैरती जाती है किश्ती।
वही दोस्त नाराज़ हो तो
आँधी तूफ़ान बन डूबातें है किश्ती।
छोटी सी है इसकी हस्ती।
कम नहीं होती पानी पर नाच इसकी मस्ती।
बिना डरे सारी दुनिया घूम दिन ढले
अपने ठौर वापस आती है किश्ती।

सितारे – आकाशगंगा Milky Way

उजले ख़्वाब देख, इश्क़ किया सितारों ने।

चाँद की चाँदनी में दिखे नज़ारों में।

सजी सितारों की बारात आकाश गंगा की बहारों में।

देखा सितारों को एक होते, सितारों में।

उम्र भर की तलाश पूरी हुई शायद।

डूब गए एक दूसरे की आँखों में ज़ायद।

ख़ूबसूरत है कायनात की क़वायद।

न्यूज़- दो आकाश गंगा का विलय।

Two Far-Off Galaxies Are Merging In

Amazing New Pic From Hubble

Telescope Merging galaxies captured

by Hubble.

https://www.theatlantic.com/science/archive/2022/08/galaxy-mergers-colliding-cosmic-matter-milky-way-andromeda/671164/

पसंद

पसंद

हम चाहें ना चाहें,

सब हमें चाहें।

हम कबूलें या ना क़बूलें लोगों को,

पर हमें सब क़बूल करें।

यह ज़िद्द क्यों, सब पसंद करें तुम्हें?
क्या कायनात मे सभी पसंद हैं तुम्हें?

किंत्सुगी – स्वर्णमृतिका

टूटे कई बार, जुटे कई बार।

अपने को जोड़ लिया हर बार,

लगा पिघलते तपते स्वर्ण तार।

अब फ़र्क़ नहीं पड़ता हो जायें तार-तार,

ग़र बार-बार, कई बार।

गले, तपे स्वर्ण से जुड़ते जाएँगे हर बार।

किंत्सुगी बन जाएँगे बिन माने हार।

सीख लिया है निराशा के टुकड़ों

को जोड़कर आशा की सुनहरी लकीरें खींचना।

जापान की किंत्सुगी कला – किंत्सुगी टूटे हुए बर्तनों को जोड़ने की जापानी कला है। टूट टुकड़ों और दरारों को पिघले सोने और सुनहरे रंग से जोड़ और खूबसूरती से सजा दिया जाता है।

Kintsugi (“golden joinery”), also known as Kintsukuroi (“golden repair”), is the Japanese art of repairing broken pottery by mending the areas of breakage with lacquer dusted or mixed with powdered gold, silver, or platinum, a method similar to the maki-e technique.

मोक्षदा एकादशी / गीता जयंती ३.१२.२२ Gita Mahotsav 3.12.2022

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।

(जीवन में आने वाली विपरीत परिस्थितियों में हौसला दिलानेवाला श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक)

भगवान श्रीकृष्ण ने संसार को गीता के ज्ञान रूप में अपनी विशेष कृपा प्रदान की है। मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को गीता जयंती मनाई जाती है.

Gita Mahotsav is an event centred around the  Bhagavad Gita, celebrated on the Shukla  Ekadashi, the 11th day of Margashirsha the  waxing moon of the  (Agrahayan) month of the Hindu calendar. It is believed the Bhagavad Gita was revealed to Arjunaby Krishna in the battlefield of Kurukshetra.

सागर और ब्रह्मांड का फ़लसफ़ा

चाँद ने सूरज को आवाज़ दे कर कहा –

ज़िंदगी की राहों में कुछ पाना,

कुछ खोना लगा रहता है।

कम ज़्यादा होना लगा रहता है।

भला या बुरा किया किसी के साथ,

उसका जवाब मिलता रहता है।

आवाज़ की गूंजें लौट कर है आती रहतीं हैं।

सागर और ब्रह्मांड का यह है फ़लसफ़ा।

रूह की राहें

चराग़-ए-रहगुज़र रौशन करता है।
मुसाफिर की अँधेरी राहों को।
जब दिल में चराग़ जल उठते हैं,

रौशन करते हैं रूह की राहें को।

अर्थ –
चराग़-ए-रहगुज़र – lamp on the way

बिन आईना जीते हैं ज़िंदगी

कुछ लोग बिन आईना जीते हैं ज़िंदगी।

वे भूल जातें है, ख़ुद एक आईना है ज़िंदगी।

और जब अचानक उन्हें हीं उनका चेहरा

दिखाती है आईना-ई-ज़िंदगी।

तब नहीं पाते अपने आप को पहचान,

या अपना भूला चेहरा ना चाहतें हैं पहचानना?

धूमिल, दाग़दार, मलिन अक्स।

आईना नहीं बोलता झूठ, जानते हैं सभी शख़्स

जी भर, जी ले ज़िंदगी

सारे सच लोग झूठ बताते चले गये।

सारी ज़िंदगी छले जाते रहे।

कई धोखे भरे रिश्ते निभाते चले गये।

शायद हुआ ऊपर वाले के सब्र का अंत।

हाथ पकड़ ले चला राह-ए-बसंत।

एक नई दुनिया, नई दिशा में।

बोला, पहचान बना जी अपने में।

तलाश अपने आप को, अपने आप में।

ग़र चाहिए ख़ुशियाँ और सुकून का साया।

जाग, छोड़ जग की मोह-माया।

मैं हूँ हमेशा साथ तेरे, कर बंदगी।

ख़ुशगवारी से जी भर, जी ले ज़िंदगी।

क्यों हर रास्ता

क्यों हर रास्ते चलते जातें हैं,

ज़िन्दगी की बहाव की तरह?

क्यों रास्तों के पेच-ओ-ख़म,

राहों की सख़्तियाँ ख़त्म होतीं नहीं है,

ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव की तरह?

मालूम नहीं हर रहगुज़र मंज़िल का पता दे कि ना दे,

पर राहों पर चलते जाना हीं सफ़र-ए-ज़िंदगी है।

हम सब हैं मुसाफ़िर, मंज़िल की तलाश में।