
ज़िंदगी के मेले में कई मिलते हैं
कुछ दूर साथ चलते हैं।
अपनी अपनी मंज़िल की ओर
बढ़ जाते हैं,
जैसे हो दरिया का बहता पानी।
बहती नादिया रुक जाये तो
खो देती है ताज़गी और रवानी।
बढ़ते जाना हीं है ज़िंदगानी।
मंज़िल पाना है जीवन की कहानी।

ज़िंदगी के मेले में कई मिलते हैं
कुछ दूर साथ चलते हैं।
अपनी अपनी मंज़िल की ओर
बढ़ जाते हैं,
जैसे हो दरिया का बहता पानी।
बहती नादिया रुक जाये तो
खो देती है ताज़गी और रवानी।
बढ़ते जाना हीं है ज़िंदगानी।
मंज़िल पाना है जीवन की कहानी।

आफ़ताब से आँख मिलाने की कोशिश ना कर
रौशनी से शिकवा-शिकायत न कर।
अंधेरे को उजाला करने को
इक किरण-ए-आफ़ताब काफ़ी है।
चम्पई अंधेरा और सुरमई उजाला
रौशन करने को गज़ाला-ए-किरण…
…धूप का इक टुकड़ा हीं काफ़ी है।
अर्थ : गज़ाला -सूर्य, सूरज,
picture courtesy – Anurag Dutta


ऐसा होता तो वैसा होता।
वैसा होता तो अच्छा होता।
अगर मन की बातें होतीं
कैसे मालूम कैसा होता?
कौन जाने क्या होता?
शायद यही सबसे अच्छा है?
अपने मन की बातें जाने दो।
बातें जैसी है वैसे स्वीकार कर लो,
ग़र ख़ुशियाँ और सुकून चाहिए।
Do not worry that your life is turning
upside down. How do you know the
side you are used to is better than
the one to come?
~ Rumi

उम्मीदों की शाख़ पर
आफ़ताब को गले लगाने की ज़िद्द ना कर।
महताब को पाने की ज़िद्द ना कर।
ज़िंदगी हमेशा हसीन कहानी सी हो
यह साजिद ना कर।
ज़िन्दगी कभी मिले राहों में,
उससे बातें कर।
बतायेगी, उम्मीदों की शाख़ पर, नई राह पर,
नये आरजूओं का सफ़र है ज़िंदगी।

मकाँ है क़ब्र
जिसे लोग ख़ुद बनाते हैं,
मैं अपने घर में हूँ
या मैं किसी मज़ार में हूँ।
~~मुनीर नियाज़ी

महफ़िलें, भीड़, मेले में भी हो अकेले जब।
तन्हाई की आदत हो जाती है तब।
तन्हा सफ़र की आदत जाती नहीं तब,
तन्हाई की लगे जब तलब।
एकांत की खुमारी छाने लगे।
बिना नशा भी नशा आने लगे।
मतलब तन्हाई बन गई है शौक़ अजब
रब के आशीर्वाद की बन गई है सबब।

पाना है अगर मंज़िल,
राज़ रखो अपनी मंज़िल।
बढ़ाते रहो पूरे विश्वास से कदम।
ग़र ना हो राज़-ए-मक़सद रखने का दम
दिल साज़िश करने लगता है हरदम।
कम कर हौसला,
देते है एहसास ऐसा भर
जैसे पा लिया हो मंज़िल।
बिना पाये मंज़िल।
Interesting Psychological Fact – Don’t tell
everyone your goals, because it chemically
satisfies the brain and that’s similar to
completing it.
Meaning मक़सद / मंज़िल – goal.

कमियाँ किसमें नहीं?
पर सबसे बड़ी कमी है वही,
ज़ेहन के अँधेरे को मानना सही।
कभी ख़ुद का आईना बन तो सही।
नेकनीयती से गौर कर कभी
अपनी सकारात्मक और नकारात्मक,
अच्छी और बुरी बातों की बही।
नज़रों के सामने से हटेगा कम-निगही।
अपनी होड़, अपनी स्पर्द्धा अपने आपसे कर,
ईमानदारी और प्यार से खुद का ऑडिट कर।
अच्छा-बुरा जो भी पाया उन लम्हों में
उसका हर दिन रियाज़ कर।
अर्थ- कम-निगही- short sighted
Positive Psychology- Self-acceptance is the
first step to self-mastery. Mastery of the
self comes from accepting all our flaws.
Talk To Yourself with empathy.

इंसान का वजूद हो या
जलते दिए का।
सब माटी से पैदा हुए,
माटी में मिल जाएँगें।
जिसकी सोंधी खुशबू,
रची-बसी होती है ज़िंदगी में।
“मिट्टी के मोल” समझने में माटी को,
ऐसा ना हो अस्तित्व ना रहे जीवन का धरा पर।
5 December – World Soil Day
It is observed on 5 December to raise
awareness about the importance of soil,
healthy ecosystems and human well-being.
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