ना डरो,
जब चारो ओर गहन अँधेरा दिखे।
जब लगे, हो रहा सब ख़त्म।
तभी अंकुर निकलता है,
ऊपर बढ़ने के लिए।
रौशनी से होती है मुलाक़ात।
नीचे जड़े सहारा देने लगती हैं।
मिट्टी में दबे बीज सी है ज़िंदगी भी।

ना डरो,
जब चारो ओर गहन अँधेरा दिखे।
जब लगे, हो रहा सब ख़त्म।
तभी अंकुर निकलता है,
ऊपर बढ़ने के लिए।
रौशनी से होती है मुलाक़ात।
नीचे जड़े सहारा देने लगती हैं।
मिट्टी में दबे बीज सी है ज़िंदगी भी।

दिल बड़ा नाज़ुक होता है।
रिश्ते दिल के भरोसे पर टिके होते है।
उसके टूटने की आवाज़ नहीं होती।
पर भरोसा टूट जाये ,
तो ज़िंदगी के हर पल में,
हर लफ़्ज़ में इस की गूंज शामिल होती है
औ भरोसा करने की आदत छूट जाती है।
ना करो झूठे वादे, ना किसी का ऐतबार तोडो,
ना तोड़ो नाज़ुक भरोसा।
ये चोट रूह पर निशाँ छोड़ जाता है।
Psychological Fact – Pistanthrophobia is an
enormous fear of trusting people because of
awful past experiences / bad relationship.

हम सब जग में लोगों से रिश्ते बनाते हैं।
कभी अपने साथ प्रेम और इश्क़ भरा
रिश्ता बना कर देखो।
लोगों को अपने जीवन के
दायरे और सीमा बता कर देखो।
ग़र मन का सुकून चाहिए,
दूसरों के बदले खुद के लिए
जीवन जी कर देखो।
कई उलझनें ख़ुद-ब-ख़ुद सुलझने लगेंगी।


तन थके तो आराम चाहिए।
मन थके तो सुकून चाहिए।
“जो होगा अच्छा होगा”
मन के सुकून और शांति के लिए,
यह विश्वास क़ायम रखना है ज़रूरी।
कोशिश से बना सकते है यह यक़ीन।
गीता में छुपा है यह जीवन सार –
जो हुआ अच्छा हुआ।
जो हो रहा है वह अच्छा है।
जो होगा वह भी अच्छा होगा।

हमें मालूम है तुम्हें,
एक अरसा हो गया है ख़ुद से मिले।
दुआ देतें हैं, तुम्हें तुम जैसा कोई मिले।
उस आईने में,
अक्स से नज़रें मिला सको तो देखना
तुम्हें अपना व्यवहार
अपना किरदार नज़र आएगा। 
#TopicByYourQuote
मुलाक़ात न होने पाई थी
वक्त-ए- रुख़्सत ।
पर बंद आँखों से देखा था,
एक गहरी सी साँस और
तिरी गीली आँखों का झुक जाना,
क़तरे अश्क़ो का छलक जाना,
सूखे लबों का थरथराना।
तेरे हाथों का यूँ उठ जाना याद है
जैसे डूबने वाला हो कोई।
पर कहा नहीं तूने अलविदा
ये भी याद है।

हर रिश्ते के दर्मियान होती है एक डोर।
रेशम सी नाज़ुक विश्वास और भरोसे से बंधी।
राज़, रहस्य, बेवफ़ाई और झूठ आयें बीच में,
तो टूट कर बिखर जाती है।
ग़र बनाने हो या निभाने हों रिश्ते,
एक दूसरे को सब बताओ, सच बताओ।
ग़र सच सहने का ताब ना हो तो मुरझाने दो इन्हें।
रूह की आईनों में देखो, तुम्हें रिश्तों में क्या चाहिए।
वही दो दूसरों को।
वरना ज़िंदगी क़ैद बन जाएगी।
Happy Psychology! Positive Psychology! – Honesty Can Make or Break a Relationship. When you know you can totally trust your mate, it strengthens your love.


ग़र किसी ने दूरियाँ बना ली,
गिला करने से पहले,
झाँक कर देखो गिरेबान में अपने।
कितनी बार रिश्तों के
फटे गिरेबाँ रफ़ूगर करे रफ़ू?
थक कर समझ गया,
बेहतर है अपनी
राह-ए-मंज़िल पर बढ़ जाना।

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