कुछ लोगों को दूसरों को
इस्तेमाल करने की आदत होती है।
अगर ना करने दिया
तो नाराज़ हो जातें हैं।
पर समझा करो यार –
हर कोई यूज़ एंड थ्रो नहीं होता।

कुछ लोगों को दूसरों को
इस्तेमाल करने की आदत होती है।
अगर ना करने दिया
तो नाराज़ हो जातें हैं।
पर समझा करो यार –
हर कोई यूज़ एंड थ्रो नहीं होता।

विदा करने की हो न हो चाहत।
पर रुख़्सत करना पड़ता है।
चाहे गुज़रे किन्ही हालातों से।
चाहे कैफ़ियत कई हो दिल में।
पर आनेवाले को जाने देना पड़ता है।
दुनिया की है यह रीत।

अपने सुकून और शांति के लिए
अगर कुछ लोगों से दूर होना पड़े।
तब इसका मतलब है वे आपके
स्वस्थ के लिए बेमेल- विरुद्धाहार हैं।
विरुद्ध आहार- बेमेल या अस्वस्थकर भोजन आयुर्वेद के अनुसार।

खुल कर साँसें लो। आज़ाद छोड़ दो अपने आप को।
तुम, तुम रहो। किसी के बनाए साँचें में बेमन से ना ढलो।
जैसे हो वैसे हीं स्वीकार करो अपने आप को।
इश्क़ करना सीखो अपने आप से।
जीतने की कोशिश करो,
पर मुस्कुराओ अगर हार भी जाते हो।
क्योंकि हम सब अपनी अपूर्णता,
कमियों और खामियों के साथ परिपूर्ण हैं।
वही अनूठापन है, वही हमारी पहचान है।
Psychological Fact – Self-love means having a high regard for your own well-being and happiness. Self-love means taking care of your own needs and not sacrificing your well-being to please others.

ना डरो,
जब चारो ओर गहन अँधेरा दिखे।
जब लगे, हो रहा सब ख़त्म।
तभी अंकुर निकलता है,
ऊपर बढ़ने के लिए।
रौशनी से होती है मुलाक़ात।
नीचे जड़े सहारा देने लगती हैं।
मिट्टी में दबे बीज सी है ज़िंदगी भी।

दिल बड़ा नाज़ुक होता है।
रिश्ते दिल के भरोसे पर टिके होते है।
उसके टूटने की आवाज़ नहीं होती।
पर भरोसा टूट जाये ,
तो ज़िंदगी के हर पल में,
हर लफ़्ज़ में इस की गूंज शामिल होती है
औ भरोसा करने की आदत छूट जाती है।
ना करो झूठे वादे, ना किसी का ऐतबार तोडो,
ना तोड़ो नाज़ुक भरोसा।
ये चोट रूह पर निशाँ छोड़ जाता है।
Psychological Fact – Pistanthrophobia is an
enormous fear of trusting people because of
awful past experiences / bad relationship.

हम सब जग में लोगों से रिश्ते बनाते हैं।
कभी अपने साथ प्रेम और इश्क़ भरा
रिश्ता बना कर देखो।
लोगों को अपने जीवन के
दायरे और सीमा बता कर देखो।
ग़र मन का सुकून चाहिए,
दूसरों के बदले खुद के लिए
जीवन जी कर देखो।
कई उलझनें ख़ुद-ब-ख़ुद सुलझने लगेंगी।


तन थके तो आराम चाहिए।
मन थके तो सुकून चाहिए।
“जो होगा अच्छा होगा”
मन के सुकून और शांति के लिए,
यह विश्वास क़ायम रखना है ज़रूरी।
कोशिश से बना सकते है यह यक़ीन।
गीता में छुपा है यह जीवन सार –
जो हुआ अच्छा हुआ।
जो हो रहा है वह अच्छा है।
जो होगा वह भी अच्छा होगा।

हमें मालूम है तुम्हें,
एक अरसा हो गया है ख़ुद से मिले।
दुआ देतें हैं, तुम्हें तुम जैसा कोई मिले।
उस आईने में,
अक्स से नज़रें मिला सको तो देखना
तुम्हें अपना व्यवहार
अपना किरदार नज़र आएगा। 
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