आँखों से मुहब्बत होती है बयान !

आँखें दिलकश ख़्वाबों और इश्क़ की है राहें।

जब निगाहों-निगाहों में बातें होतीं है।

बिन ज़ुबान दिल की बातें बयान होती है।

लाख रखो पहरे, इश्क़ सरेआम होतीं है।

लाख छुपाओ नशीली आँखें से,

मुहब्बत खुलेआम बयान होती है।

Interesting Psychology fact about LOVE-

Researches says dilated pupils are a sign

of attraction. The “love hormones”

oxytocin and dopamine have an effect

on pupil size. Our brain gets a boost of

these chemicals when we’re sexually

or romantically attracted to someone.

This surge in hormones appears to

make our pupils dilate and large.

विजेता

ज़िंदगी की राहों पर अकेले हो?

तन्हाइयों का मलाल ना करो।

तय है, लक्ष्य है क़रीब।

सर्वोच्च स्थान, उच्चतम शिखर,

भीड़ नहीं,

सिर्फ़ सर्वश्रेष्ठ विजेता है पहुँचता।

The Winner Stands Alone.

Solitude makes us strong ,

if we have the power to

handle it positively.

गुफ़्तगू अपने आप से

दुनिया से नाराज़ होना छोड़ दिया अरसे पहले।

अब अपने आप से भी नाराज़ नहीं होते।

बात ऐसी नहीं कि ज़िंदगी हसीन हो गई है।

बात बस इतनी है कि

मुहब्बत करने लगे हैं अपने-आप से।

ख़ुशी की बात हो, कि ग़मों की,

सब से पहले, गुफ़्तगू अपने आप से करते हैं।

हौसला अफजाई अपने आप की करते हैं।

Positive Psychology –

Our most important relationship

is with our inner voice- Our internal

monologue shapes mental wellbeing,

says psychologists.

तारों भरी रात

तारों की कहकशाँ से सजी रात है,

आकाश में छिटके चाँद-तारे, शरद पूर्णिमा की रात।

धरा पर राधा -कान्हा करते महारास,

वृंदावन की अद्भुत धूम में महारासलीला की रात।

आध्यात्म और प्रेमोत्सव की निराली रात।

सोलह कलाओं से पूर्ण चंद्रमा की,

बिखरी चाँदनी में गोपियाँ नाचती रही,

बरसात रहा अमृत सारी-सारी रात।

रक़्स…नृत्य में डूबी तारों भरी रात है।

(अश्विन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा / शरद पूर्णिमा, रविवार, 09 अक्टूबर 2022 )

रूह-ए-दुर्गा-2

मेरी माटी-मूरत पूजा तुम ने।
……सजाया-सँवारा,
दिया अपरिमित प्यार औ सम्मान
…..दस दिन।
कुछ अंश उसका रखा ना बचा कर?
मेरे जीते-जगाते, हाड़-मास …….

स्वरूप के लिए?

Inspired by an English quote!

बता वक्त ख़ता ढूँढे या सज़ा

प्यासे मृग सी कशाकश में,

मृगतृष्णा के पीछे भागते

बीतती है दिन-रात।

कट जाती है ज़िंदगी फ़क़त

मरीचिका सी उलझन में।

बता वक्त ख़ता ढूँढे या सज़ा?

इश्क़-ए-जुगलबंदी

दो दिलों…रूहों की जुगलबंदी है इश्क़।

इश्क़ के हैं कुछ अदब-कायदे।

अज़ाब-ए-हिज्र-ओ-विसाल…

मिलन और वियोग में जीना

है सिखाती इश्क़ की जुगलबंदी।

टूट जाए यह जुगलबंदी,

फिर भी टूट कर जीना है सीखती।

एक दूसरे के लय-ताल पर

जीना है इश्क़-ए-जुगलबंदी।

Topic by YourQuote.

शर्त-ए-ज़िंदगी

जैसे चाहो, जी लो ज़िंदगी।

वापस लौटने की नहीं है गुंजाइश,
बस इतनी है शर्त-ए-ज़िंदगी।

रावण है, इसलिये राम याद आतें हैं ! ( शुभ विजयदशमी)

सदियाँ और युग बीते,

रावण कभी नहीं मरा।

था अति विद्वान।

पर जीत नहीं सका अहंकार अपना।

विजया और रावण दहन सीख है,

जीत सको तो जीत लो अहंकार अपना।

ना रखो कई चेहरे,

दुनिया में कई चेहरे वाले कई रावण है,

इसलिये राम याद आतें हैं।

Happy World Teacher’s Day: 5th October 2022

The world celebrates this day to mark the importance of teachers. It is commemorated each year on the anniversary of the ILO/UNESCO Recommendation adoption regarding the Status of Teachers in 1966. Theme for 2022 was “Teachers at the heart of education recovery.”

गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय।

बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय।।

गुरू और गोबिंद (भगवान) एक साथ खड़े हों तो किसे

प्रणाम करना चाहिए – गुरू को अथवा गोबिन्द को?

ऐसी स्थिति में गुरू के श्रीचरणों में शीश झुकाना उत्तम

है जिनके कृपा रूपी प्रसाद से गोविन्द का दर्शन

करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।