जीवन संग्राम में सबसे बड़ा समर है,
जीतना अपने आप से।
अपने आप को स्वीकार करना,
साथ अपनी कमियों के।
अपने आप को प्यार करना।
अपने एहसासों पर इख़्तियार रखना,
अपने एहसासों के इख़्तियार में नहीं रहना।

जीवन संग्राम में सबसे बड़ा समर है,
जीतना अपने आप से।
अपने आप को स्वीकार करना,
साथ अपनी कमियों के।
अपने आप को प्यार करना।
अपने एहसासों पर इख़्तियार रखना,
अपने एहसासों के इख़्तियार में नहीं रहना।

कुछ कहना था, कुछ सुनना था।
पर बात अधूरी रह गई।
क़िस्सा-ए-इश्क़ छेड़ा,
पर कहानी अधूरी रह गई।
क्या शिकवा आल्फ़ाज़ो और
लफ़्ज़ों की ग़र वे अनसुनी रह गई।
जब नज़्म-ए-ज़िंदगी अधूरी रह गई।

अपूर्णता में भी पूर्णता हैं,
कमियों में भी सौंदर्य।
जुनून में होता है नशा।
धुन में होती है खुमारी।
सर्वोतम या उत्कृष्ट होने से
बेहतर है सच्चा होना।

जहान में आए तन्हा,
जाना है यहाँ से तन्हा।
तन्हाई अकेलापन नहीं, है एकांत।
ग़र मिलना है ख़ुदा से, ख़ुद से।
तन्हाईयाँ हीं मुलाक़ात हैं करातीं।
अक्सर जीवन का सफ़र होता है क़ाफ़िले में,
फिर भी होती हैं दिल में तनहाइयाँ।
मिलो सबों से,
पर करो अपने साथ सफ़र।
ना जाने क्यों ख़ूबसूरत तन्हाईयाँ हैं बदनाम।

लगता था, क्या सुनाए दास्तान?
उम्र गुज़र जाएगी, पर पूरी नहीं होगी।
हर लफ़्ज़ पर आँसू थे छलकते,
गला था रुँधता।
दर्द में डूबी कहानी अधूरी रह जाती।
ज़िंदगी औ समय ने बना दी आदत,
आँसू पी कहानी सुनाने की।
समुंदर के साथ भी यही हुआ था क्या?

अपने हीं आँसुओं को पी-पी कर खारा हो गया क्या?
जो मिला उसमें जीना सीखा लिया।
जो ना मिला उसमें गुज़ारा करना सीख लिया।
चाहना, पसंद करना छोड़ना सीख लिया।
घूमते रही इर्दगिर्द तुम्हारे,
घड़ी की सुइयों की तरह।
क्या अपने आप को था जीत लिया?
या खो दिया अस्तित्व अपना?
यही होती है बज़्म-ए-हस्ती औरत की।

इंतज़ार है, वो दिन कब आएगा,
जब यह दिन ना पड़े मनाना।
जलते चराग़ सा ए’तिबार है,
मुद्दत से देखते ख़्वाब का आसार है।
जब बराबर की ज़िंदगी हो,
बराबर का मान हो।
इंतज़ार है उस दिन का……
11th October 2022: International
Day of the Girl Child. The theme
for the 2022 International Day of
the Girl Child was “Digital
generation: Our generation.”

सच को जो झूठ बताए,
शोर मचा झूठ को सच बनाए।
सुन कर अनसुना करे,
ऐसे रिश्ते क्यों निभाएँ?
जाना नहीं उन राहों पर,
जहाँ मिले अपमान बारंबार।
जो बदले मौसम सा हर बार,
क्यों करना उस पर ऐतबार?

प्लास्टिक हीं प्लास्टिक है चारों ओर।
चाहे जितना मचा लो शोर।
आज धरा की ख़ुदाई में मिलते हैं प्राचीन अवशेष।
कुछ सौ साल बाद क्या रहेगा शेष?
ख़ुदाई में मिलेंगे क्या प्लास्टिक के मानव अवशेष?

The strongest people are not those
who show strength in front of the
world but those who fight and win
battles that others do not know
anything about.”
— Jonathan Harnisch
The overall objective of World Mental
Health Day is to raise awareness of
mental health issues around the world
and to mobilize efforts in support of
mental health.

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