वह सफेद लिबास में, सफेद गुलदस्ते सी थी,
घर वालों को चाहिये थी लाली वाली दुलहन।
यह शादी, मैरेज अौर निकाह के बीच का फासला
प्रेम, इश्क, लव व इबादत
सब कुछ तोङ गई।
वह सफेद लिबास में, सफेद गुलदस्ते सी थी,
घर वालों को चाहिये थी लाली वाली दुलहन।
यह शादी, मैरेज अौर निकाह के बीच का फासला
प्रेम, इश्क, लव व इबादत
सब कुछ तोङ गई।
कहते है अपनों से हुए जंग हार जाना चाहिये,
पर बार-बार हारते हुए,
सामने वालो को भूल का एहसास ना दिलाने
अौर बस ढोते रहने से,
रिश्तों मे जो जंग लग जाती है
उसका क्या?
किसी का दर्दे हाल जानना है ,
तब
पास जाअो, करीब से देखो।
दूर से तो सब कुछ
सुहाना हीं सुहाना दिखता है।
IndiSpire – Ideas for Edition 185
Do you have that one person who was once your best companion but now a complete stranger? What changed?
जिंदगी के सफर में जब भी रिश्तों की
कश्ती ङूबती है
कभी माँझी, कभी मौसम अौर
कभी नदी के भँवर ………. बदनाम होते हैं।
पर जब नाव का छुपा सुराख़ ही उसे
ङूबाने लगे ,
तब वफा – वेवफा, टूटना – छूटना,
अपना -पराया क्या मतलब रखतें हैं?
धोखा… अविश्वास का सुराख़…..
किसी को मार ङालने
के लिये अकेले हीं काफी है।
यह
रिश्तों को जीने नहीं देता………
पलट कर देखा, लगा काश…..
बीता समय लौट आये।
जिंदगी ने हँस कर कहा –
यह लिखना -मिटाना
फिर कुछ नया लिखना……..
यह तुम्हारी फितरत होगी,
हमारी नही।
हम तुम्हारी तरह लेखक या कवि नहीं हैं।
दूसरा मौका हम नहीं देते!!!!!
जिंदगी के सफर में
सारे इम्तहान हमारे हीं हिस्से क्यों?
नतीज़े आये ना आये ,
अगला पर्चा शुरु हो जाता है
हम गलते-पीघलते नहीं ,
इसलिये
पत्थर या पाषण कहते हो,
पर खास बात हैं कि
हम पल-पल बदलते नहीं।
अौर तो अौर, हम से
लगी ठोकरें क्या
तुम्हें कम सबक सिखाती हैं??
The
moons
stays
bright,
when it
doesn’t
avoid
the night.
~ Rumi
आईना भी इस नासमझी पर
खुद से माफी नहीं मागँने देता।
कि खुद को दर्द क्यों पहुँचाना?
जमाना बैठा है इस काम के लिये।
मिट्टी में दबे बीज को हीं
मालूम होता है,
शाखों पर खिले फूलों की
क्या कीमत चुकाई है उसने……….
You must be logged in to post a comment.