रंगों का खेल

 

वह सफेद लिबास में, सफेद गुलदस्ते सी थी,

घर वालों को चाहिये थी लाली वाली दुलहन। 

यह शादी, मैरेज अौर निकाह के बीच का फासला

प्रेम, इश्क, लव व इबादत

सब कुछ तोङ गई।

जंग

 

कहते है अपनों से हुए जंग हार जाना चाहिये,

पर बार-बार  हारते हुए,

सामने वालो को भूल का एहसास ना दिलाने 

अौर बस  ढोते रहने से,

 रिश्तों मे जो जंग लग जाती है

उसका क्या?

दर्दे हाल

किसी का दर्दे हाल जानना है ,

तब
पास जाअो, करीब से देखो।

दूर से तो सब कुछ

सुहाना हीं सुहाना  दिखता है।

जिंदगी के रंग – 26

 

IndiSpire – Ideas for Edition 185

Do you have that one person who was once your best companion but now a complete stranger? What changed?

जिंदगी के सफर में जब भी  रिश्तों की

कश्ती ङूबती है

कभी माँझी,  कभी मौसम अौर

कभी  नदी  के भँवर ………. बदनाम होते हैं।

पर जब नाव का  छुपा सुराख़ ही उसे

ङूबाने लगे  ,

 तब  वफा – वेवफा, टूटना – छूटना,

अपना -पराया क्या मतलब रखतें हैं?

धोखा… अविश्वास का  सुराख़…..

किसी  को मार  ङालने

के लिये अकेले हीं काफी है।

यह

    रिश्तों  को जीने  नहीं देता………

जिंदगी के रंग – 25

पलट कर देखा, लगा काश…..

बीता समय लौट आये।
जिंदगी ने हँस कर कहा –
यह लिखना -मिटाना

 फिर कुछ नया लिखना……..

यह  तुम्हारी फितरत होगी,

हमारी नही।
हम तुम्हारी तरह  लेखक या कवि नहीं हैं।
दूसरा मौका हम नहीं देते!!!!!

इम्तहान

 

जिंदगी के सफर में

सारे इम्तहान हमारे हीं हिस्से क्यों?

नतीज़े आये  ना आये ,

 अगला पर्चा शुरु हो जाता है

पत्थर

 

हम गलते-पीघलते नहीं ,
इसलिये 
पत्थर या पाषण कहते हो,
पर खास बात हैं कि
हम पल-पल बदलते नहीं।
अौर तो अौर, हम से
लगी ठोकरें क्या
तुम्हें कम सबक सिखाती हैं??

 

Moon and the night.

The

   moons

        stays

                bright,

                      when it

                                  doesn’t

                                              avoid

                                                     the night.

 ~ Rumi

आईना

 

आईना भी इस नासमझी पर

खुद से माफी नहीं मागँने देता।

कि खुद को दर्द क्यों पहुँचाना?

जमाना बैठा है इस काम के लिये।

फूलों की कीमत

 

मिट्टी में दबे बीज को हीं

मालूम होता है,

शाखों पर खिले फूलों की

क्या कीमत चुकाई है उसने……….