क्या कभी सच सामने आयेगा?-कविता Will the truth ever get revealed?

The Hindu, March 24, 2017—Fearing arrest, two women jump into pond, drown

 

News, The Indian Express, March 24, 2017--Police had raided red light area in Rajasthan’s Bharatpur. India.

Two women jumped into a pond and drowned, allegedly fearing arrest during a police raid at a red light area in Rajasthan’s Bharatpur on Tuesday, said the district administration.

The victims have been indentified as Shakko and Rachna. According to the police, the incident took place at Pachi ka Nagla village which comes under the jurisdiction of Sewar police station.

 

पंछियों के नगर भरतपुर में,

उसे भी आसमान में  आजाद  परिदें सा उङने  का शौक था।

वह थी सिर्फ 13 साल की,

चाहती थी सम्मान की जिंदगी जीना।

पुलिस की छापेमारी के बाद, उसका शव मिला……..

पानी में तैरता हुआ।

पुलिस ने कहा बचने के लिए पानी में कूद गई थी,

पर रोती माँ,  तन के चोट…..

कुछ और हीं कहानी  कह रहे थे,

 क्या   उन्हें अच्छी जिंदगी जीने की चाह  नहीं हो सकती?

कोठे,वेश्यालय  भी  तो चलते हैं सभ्य समाज की दया दृष्टि से,

 क्या  कभी सच सामने आयेगा?

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कर्तव्यों की इतिश्री-कविता

The International Day of Forests was established on the 21st day of March, by resolution of the United Nations General Assembly,  and 20 March World Sparrow Day is a day designated to raise awareness of the house sparrow

(20 मार्च गौरैया दिवस, 21 मार्च अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस)

हम जो हर रोज कोई न कोई दिवस मनाते हैं

और अगले दिन भूल जाते हैं।

इस से तो अच्छे हम पहले ही थे,

जब बलखाती नदियां, फुदकती गौरैया,

सरसराती हवाएं और जंगलों की हरियाली

हमेशा सहलाती थी

और हम उसे निहारते  अौर संभांलते  थे।

आज एक दिन  याद  कर क्यों हो जाती है कर्तव्यों की इतिश्री…….???

 

green forest and Sparrow

 

 

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अनजानी राहें – कविता Untraveled Routes -Poem

Some beautiful paths can’t be discovered without getting lost.

 

कभी-कभी  राहों मे,

खो जाना भी अच्छा है,

कुछ सुंदर नये रास्तों को पाने के लिए ।

खोये  बिना कुछ पाया नहीं  जा सकता।

अपने आप को भी भूल जाना

कभी-कभी अच्छा है

बहुत कुछ नया पाने के लिए।

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कन्या पूजन ( कविता )

बस एक पुरानी कविता आज के दिन को समर्पित है !!!!

अखबार के पन्ने  रंगे हैं ‘हैप्पी विमेंस डे’ की

बधाईयों  से,

लेकिन इन खबरों को पढ़ने के बाद

क्या लिखा जाए और क्यों लिखा जाए?

 

Todays News – The Indian Express wed, MARCH 8, 2017

  1. 19 foetuses found: homeopath held, police say he has confessed.
  2. women dies in botched-up abortion.
  3. sold to a brothel at 12, she fought diseases, poverty, but hung on to hope.

 

नवरात्रि की अष्टमी तिथि ,
प्रौढ़ होते, धनवान दम्पति ,
अपनी दरिद्र काम वालियों
की पुत्रियों के चरण
अपने कर कमलों से
प्यार से प्रक्षालन कर रहे थे.

अचरज से कोई पूछ बैठा ,
यह क्या कर रहें हैं आप दोनों ?

अश्रुपूर्ण नत नयनों से कहा –
“काश, हमारी भी प्यारी संतान होती.”
सब कुछ है हमारे पास ,
बस एक यही कमी है ,

एक ठंडी आह के साथ कहा –
प्रायश्चित कर रहें है ,
आती हुई लक्ष्मी को
गर्भ से ही वापस लौटाने का.

Source: कन्या पूजन ( कविता )

ख्वाबों ख्यालों ख्वाहिशों भरी जिंदगी -कविता

I have a thousand desires, all desires worth dying for………..

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले…

  MIRZA GHALIB

 

ख्वाबों ख्यालों ख्वाहिशों  से

बहुत आगे आ चुकी है जिंदगी।

गुनगुनाती सुबहें अौर शाम की

बस कुछ खुमारी बची है।

जिंदगी की जिम्मरदारियों ने,

वक्त के साथ क्या-क्या  बदल दिया?

अब तो अपने आप से बातें करने के लिए भी,

वक्त से इजाजत लेनी पड़ती है।

पर अभी भी  नही बदलीं हैं,

तो हसरतें अौर हज़ारों ख्वाहिशें…………..

 

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निद्रा मग्न राजकन्या -उर्मिला, कविता; Urmila -The sleeping beauty of Ramayna-poem,

 

   A mythological story  -Lakshman begged Nidra devi, the goddess of sleep,to leave him alone for fourteen years so that he could guard his brother and sister-in-law night and day.  But the law of nature demanded that someone should bear the burden of Lakshman’s share of sleep. “Go to my wife, Urmila, and inform her of the situation,” said Lakshman. Nidra went to Urmila.

एक किवदंती के अनुसार–  लक्ष्मण ने  चौदह साल के बनवास में निद्रा की देवी से वरदान माँगा कि उसे नींद ना आये अौर वह रात-दिन जाग कर  राम-सीता की सुरक्षा कर सके।  ऐसे में लक्ष्मण ने नींद को अपनी पत्नी उर्मिला के पास भेज दिया और अपना सन्देश भी भेजा,  लक्ष्मण के हिस्से की नींद उर्मिला को मिले अौर कहते हैं उर्मिला चौदह साल सोती रही।

मैं निद्रा  मग्न राजकन्या,

जनक नन्दिनी थी, पर नहीं कहलाई जानकी ,

 ना कहा मिथीला की मैथिली

ना विदेह की वैदेही कहलाई.

ना किसी ने उर्मिला-लक्ष्मण कहा सीताराम की तरह।

 राम कहलाये सियावर,  किसी ने लक्ष्मण को भी कहा होता उर्मिला-वर.

इन बातों का मुझे दुःख नहीं।

 पर 

मैंने तो पतिविहिन चौदह वर्ष का वनवास काटा था।

वनवास साथ जाने को  तैयार थी

मुझे क्यों छोङ गये लक्ष्मण?

नींद में नहीं ,ङूबी थी विषाद  में मैं।

किशोर पति चौदह वर्ष बाद आया  पुर्ण पुरुष बन ।

  फिर

दुर्वासा के श्राप से अयोध्या को बचाने,

तुमने ले ली सरयू नदी में जल समाधी

चले गये अनंत यात्रा पथ पर।

पर मेरा क्या?

रह गया कभी ना खत्म होने वाला वैराग्य …………

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जिंदगी के रंग ( 2) कविता

चलते -चलते लड़खड़ा गये क़दम,
तभी सहारे के लिये बढ़ आये नाजुक हाथ,
हैरानी से देखा,
ये तो वही हाथ हैं,
जिन्हे कभी मैंने पकड़ कर चलना सिखाया था,
सचमुच, जिंदगी रोज़ नये रंग दिखाती हैं हमें.

 

Source: जिंदगी के रंग ( 2) कविता

मौसम के साथ उङते प्रवासी परिंदे- कविता Migratory birds – Poem

Research reveals that global warming is compelling birds into early migration. Migrating birds are arriving at their breeding grounds earlier as global temperatures rise.

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मौसम के साथ उङते रंग- बिरंगे परिंदे,
कुदरत के जादुई रंगों के साथ,

जहाँ का मौसम माकूल – माफिक हो 

वहीं चल देते हैं। 

हमारी तरह बंधनों से बंधे नहीं हैं। 

ये बंधनों से ऊपर, घुमक्कड़  बंजारों से।

थके,-हारे, हजारों मीलों से उङ कर आते हैं।

हम आशियाना  अौर समाज के बंधन से बंधे लोग

इन की प्राकृतिक जीवन को समझे बिना।

नैसर्गिक सृष्टि के नियम से छेङ-छाङ कर,

इन्हें तकलीफ पहुँचाते हैं। 

शब्दार्थ- Word meaning

घुमक्कड़, बंजारा – gypsy

माकूल,  माफिक – suitable

कुदरत,सृष्टि – nature,

सृष्टि – Creation

नैसर्गिक – Natural

प्रवासी – Migratory

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Images courtesy  Chandni Sahay.