गूंज


हम अपने बोले शब्दों के गूजं अौर  मौन  के बीच  रहते हैं

हमारे अपने विचारों  से बनता है हमारी जिंदगी का आशियाना।

 

 

Image from internet.

जिंदगी के रंग (कविता – 5)

जीवन के इंद्रधनुषी सफर में
हजारो रंग नज़र आते है,
परायों को अपना कहनेवाले
अच्छों को बुरा कहने वाले
कहीँ ना कहीँ मिल जाते है

रोज़ सफेद -काले और
सतरंगी जिंदगी नज़र आती है
जिंदगी रोज़ नये रंग दिखाती है।

Source: जिंदगी के रंग (कविता – 5)

रेत के कण ( कविता ) #LessonOfLife


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क्या रेत के कणों को देख कर क्या

यह समझ आता है कि कभी ये

किसी पर्वत की चोटी पर तने अकडे

महा भीमकाय चट्टान होंगे
या कभी

किसी विशाल चट्टान को देख कर मन

में यह ख्याल आता है कि समय की

मार इसे चूर-चूर कर रेत बना देगी?

नहीं न?

इतना अहंकार भी किस काम का?

तने रहो, खड़े रहो पर विनम्रता से।

क्योंकि यही जीवन चक्र है।

जो कभी शीर्ष पर ले जाता है और

अगले पल धूल-धूसरित कर देता है।

शब्दार्थ- Word meaning

रेत -Sand

कण-Particles

पर्वत की चोटी – the top of the mountain

भीमकाय चट्टान – giant rock

चूर-चूर – Shattered

अहंकार – narcissism , Ego, high-and-mighty

विनम्रता- politeness, humbleness

जीवन चक्र- Life Cycle

शीर्ष – Top

What is the best lesson that life has taught you so far? #LessonOfLife

Source: रेत के कण ( कविता )

विश्वास- कविता faith- poem


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जिंदगी निकल गई खुश रहने की कोशिश अौर,

लोगों को खुश करने की कोशिश में।

दूसरों को खुबसूरती दिखाने अौर,

खुबसूरत दिखने की कोशिश में।

अब समझा आया, खुबसूरती अपने अंदर होती है।

अपने को पसंद करो अौर स्वंय खुश   रखो।

जीवन  की बदलती करवटें

सोंच पैदा करतीं हैं।

फिर लगता है ,

शायद ये, जिंदगी सीधी कर रहीं हैं।

बस विश्वास का ङोर थामे रखो।

 

जिंदगी के रंग -कविता 9


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Female weeper / weeping woman / professional mourners  –  In some part of    Rajasthan, India,  women (of a specific  caste ) are hired as professional mourners . They   are know as  “rudaali” /female weeper/ weeping woman  . Their job is to publicly express grief for family members who are not permitted to display emotion due to social status.

कुछ लोग हँस  कर ,

और कुछ हँसा कर

कमाते हैं.

कुछ लोग रो कर (रुदाली )

और कुछ लोगों को रुला कर.

रुलाने वाले क्या जवाब देंगे ?

   जब

ऊपर वाला उनसे पूछेगा –

उन्होंने क्या कमाया  ?

राजस्थान में कुछ  स्थानों पर  ऐसी प्रथा हैं. जिसमें सम्पन्न परिवारों में रो कर मातम मानने  के लिये रुदाली ( जाति  विशेष की महिलायें ) बुलायी जाती हैं.

rudaali

 

 

 

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इंद्रधनुष -कविता Rainbow -poem


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There is nothing in this world that is not a gift from you  ~  Rumi.

 

ज़िंदगी के सात रंगों को भूल,

       हम जीवन को ढूँढ रहे हैं

          काले-सफ़ेद रंगों के धुआँ अौर  धुंध में।

                   भाग रहें हैं,  अनजानी राहों पर ,

                       दुनिया के मायावी  मृगतृष्णा के पीछे।

                            आंगन की खिली धूप, खिलते फूल,

                                  बच्चों की किलकारी, 

                                   ऊपरवाले की हर रचना है न्यारी।

                                       अगर कुछ ना कर सको ,

                                        तो थमा दो ऊपर वाले को अपनी ङोर।

                                           खुबसूरत सतरंगी  इंद्रधनुषी  लगेगी,

                                                 ज़िंदगी हर अोर। 

 

 

image from internet.

जिंदगी के रंग ( कविता) 8

life

जिंदगी ने ना जाने कितने रंग बदले।

रेगिस्तान  के रेत की तरह

कितने निशां बने अौर मिटे

हर बदलते रंग को देख ,

दिल में तकलिफ हुई।

काश,  जिंदगी इतनी करवटें  ना ले।

पर , फिर समझ आया ।

यही तो है जिंदगी।

 

चोट (कविता)

strong

जीवन के इस

                                                    दौङ

में ना जाने कितनी बार

चोटें लगीं।

आँखों में कुछ कतरे

आँसू   भी छलक आए।

पर अब जाना।

वे तो हौसला-अफजाई कर गये।

मजबूत बना गये।

हिम्मत बढ़ा गये।

 

छाया चित्र इंटरनेट  से।

life- poetry जिंदगी -कविता

The philosophy of life and sea waves are similar.

They return , whatever is give  to them.

जिंदगी अौर सागर की लहरें

एक सी लगती हैं। 

जो दो
कभी ना कभी वापस
लौटाती हैं जरुर।

जिंदगी अौर सागर का फ़लसफा

शायद एक है।

coco

दशरथ मांझी और दाना मांझी (कविता)

Dashrath Manjhi -Mountain Man  single-handedly carved a path through a mountain in 22 years using only a hammer and chisel  to make a short cut rout to near by town. Because in the remote village his wife died , as she could not get medical facilities on time.

*

A poor tribal man in Odisha walked nearly 10 -12 kilometres with his daughter, carrying his wife’s body on his shoulder, after he was denied a mortuary van from a government hospital.

एक ने पहाड़ का सीना ,

चीर

बीमार पत्नी को समय पर

 इलाज ना दे पाने पर ,

पर्वत में राह बनाया.

वह था दशरथ मांझी.

दूसरे ने पत्नी का हर कर्ज

चुकाया ,

ना जाने कितने दूर ,

काँधे पर उसका शव उठा ,

दाना मांझी

मीलों चलता आया.

सिर्फ पत्नी धर्म की बातें

होती हैं.

पुरुषों के इस समाज में

पति धर्म निभाने वाले ऐसे भी

लोग होते हैं.

(बिहार  में दशरथ मांझी के माउंटन मैन बनने  की कहानी उनकी पत्नी  और अस्पताल के बीच खड़े  पहाड़  की देंन हैं. वक्त  पर इलाज नहीं मिलने से  वह  चल बसीं. तब इस गरीब मजदूर ने सिर्फ एक छेनी और हथौडी की सहायता से अकेले , पहाड़ के बीचो बीच रास्ता बनाया. जिससे 55  किलोमीटर का रास्ता मात्र 15 किलोमीटर    रह गया. इस काम में उन्हें 22 साल लग गये.

 उडिसा के एक अस्पताल में निर्धन दाना मांझी की पत्नी की  मृत्यु हो गई. कोई व्यवस्था ना देख , दाना ने पत्नी के शव को कंधे पर 12 किलोमीटर की दूरी पर , श्मशान घाट ले गये   

 वेदना  और हृदय की पीडा को कर्मठता में बदल देने वाले नायकों को सलाम  )

 

orissa-dana-majhi-kalahandi-Favim.com-4674147