
अभी का पल,
अगले पल मृत हो,
यादें बन जाता है।
इसलिए मनपसंद तरीक़े से,
मनपसंद लोगों के साथ
पल-समय बिताओ।
ताकि हर पल
मीठी और सुनहरी
यादों का ख़ज़ाना
बन जाए।

अभी का पल,
अगले पल मृत हो,
यादें बन जाता है।
इसलिए मनपसंद तरीक़े से,
मनपसंद लोगों के साथ
पल-समय बिताओ।
ताकि हर पल
मीठी और सुनहरी
यादों का ख़ज़ाना
बन जाए।

ज़िंदगी के जंग में
कुछ लोग टूटते नहीं।
क्योंकि, वे कई बार
टूट टूट कर बने होते हैं।
वे अपने खंडित अस्तित्व में
सुकून खोज़ लेते हैं।
अपनी आँखों की चमक
और मुस्कान में ख़ुशियाँ
ढूँढ लेतें हैं।
ज़िंदगी की थकान में
अपनी रौशनी बनाए रखना
सीख लेते हैं।
चोट के निशानों में
निखारना सीख लेते है।

कुछ रिश्ते,
टूटे काँच की
तरह होते है।
जोड़ने की कोशिश में
चुभन मिलती है।

हँस कर चाँद ने कहा –
यूँ गौर से ना देखो मुझे।
ज़िंदगी ऐसी हीं है।
सिर्फ़ मेरा हीं नहीं,
हर किसी का स्याह
समय आता है।
पर सबसे अच्छी बात है,
अपने आप को पूर्ण
करने की कोशिश
में लगे रहना !!

यक़ीन और भरोसा टूटने पर,
अपने ऐतबार पर शर्मिंदा ना हों।
कहते हैं,
बार-बार कोई विश्वास तोड़े,
तब उसे जाने दो।
समझ लो,
यह है ईश्वर का संकेत।
क्योंकि
किसी से खिलवाड़ करने वाले से, नियति है खिलवाड़ करती।
यह है ऊपर वाले का नियम।


Eternal Shine !!
सागर के दिल पर तिरती- तैरती नावें,
याद दिलातीं हैं – बचपन की,
बारिश अौर अपने हीं लिखे पन्नों से काग़ज़ के बने नाव।
नहीं भूले कागज़ के नाव बनाना,
पर अब ङूबे हैं जिंदगी-ए-दरिया के तूफान-ए-भँवर में।
तब भय न था कि गल जायेगी काग़ज की कश्ती।
अब समझदार माँझी
कश्ती को दरिया के तूफ़ाँ,लहरों से बचा
तलाशता है सुकून-ए-साहिल।
कलम थामे
लिखती उंगलियाँ आगे बढ़ती जातीं हैं।
तब एक जीवंत रचना उभरती हैं।
ये उंगलियाँ संदेश हैं –
जिंदगी आगे बढ़ते जाने का नाम है।
आधे पर रुक कर,
पंक्तियोँ…लाइनों को अधूरा छोङ कर,
लिखे अक्षरों को आँसूअों से धुँधला कर,
सृजनशीलता…रचनात्मकता का अस्तित्व संभव नहीं।
यही पंक्तियाँ… कहानियाँ… कविताएँ,
पन्नों पर उतर,
आगे बढ़नें की राहें बन जातीं हैं।
जिंदगी के पचास दिन बीत गये….कम हो गये।
बिना कुछ कहे-सुने, चुपके से एक शाम अौर ढल गई।
दिनों की गिनती शायद हीं कभी इतनी शिद्दत से की होगी।
यह भी एक यात्रा है।
मालूम नहीं कितनी लंबी।
कितने सबकों…पाठों के साथ।
ना शिकवा है ना गिला है।
पर यात्रा जारी है।
आशा भरे नये दिन, नई सुबह के इंतज़ार के साथ।
Image Courtesy- Chandni Sahay
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