
लोग क्या कहेगे?


जिंदगी के पचास दिन बीत गये….कम हो गये।
बिना कुछ कहे-सुने, चुपके से एक शाम अौर ढल गई।
दिनों की गिनती शायद हीं कभी इतनी शिद्दत से की होगी।
यह भी एक यात्रा है।
मालूम नहीं कितनी लंबी।
कितने सबकों…पाठों के साथ।
ना शिकवा है ना गिला है।
पर यात्रा जारी है।
आशा भरे नये दिन, नई सुबह के इंतज़ार के साथ।
Image Courtesy- Chandni Sahay
टेढी -मेढी बल खाती पगङंङी, ऊँची- नीची राहें ,
कभी फूलों कभी कांटों के बीच,
तीखे मोड़ भरे जीवन का यह सफ़र
मीठे -खट्टे अनुभव, यादों,
के साथ
एक अौर साल गुज़र गया
कब …..कैसे ….पता हीं नहीं चला।
कभी खुशबू, कभी आँसू साथ निभाते रहे।
पहेली सी है यह जिंदगी।
अभिनंदन नये साल का !!!
मगंलमय,
नव वर्ष की शुभकानायें !!!!