जब जिंदगी से कोई आजाद होता है,
किसी और को यादों की कैद दे जाता है.
सीखना चाह रहे हैं कैद में रहकर आजाद होना।
काँच के चश्मे में कैद आँखों के आँसू ..अश्कों की तरह.
जब जिंदगी से कोई आजाद होता है,
किसी और को यादों की कैद दे जाता है.
सीखना चाह रहे हैं कैद में रहकर आजाद होना।
काँच के चश्मे में कैद आँखों के आँसू ..अश्कों की तरह.

दर्द ने बताया
समंदर बाहर हो या
दिल अौ आँखों के अंदर .
दोंनो खारे होते हैं.


सुना था जिंदगी के सफ़र में,
ऐसे कई मोङ आते हैं
जहाँ कोई ना कोई छूट जाता हैं .
यह भी सुना-
छोटी सी है जिंदगानी
उम्र दो-चार रोज़ की मेहमान है .
मौसम रोज बदलते हैं…….
पर ऐसे बिना बोले
कोई अपना जाता है क्या ?

जिंदगी रोज़ नया कुछ सिखाती है, बशर्ते हम सीखना चाहें।
सुबह की शीतल बयार
कानों में कुछ कह रही थी …,..
उन पर भरोसा मत करो
जो दिलों को तकलीफ़ देते हों,
अपने वो हैं जो
पल भर का भी सुकून दे ,
हौसला , तस्सली दे .

जब तक फूलों सी
ख़ुशबू औ नज़ाकत थी .
बेदर्दी से पेश आते रहे लोग .
अपने को काँटे सा कठोर दिखाने के बाद
हम तो नहीं बदले पर
लोग बदल गए….
कुछ सुधर से गए हैं…..

एक खामोश ख्याल आता है दिल में,
हर अोर है शोर,
प्यार- प्रेम करो सबसे।
पर लफ्ज़ों – रिश्तों में बधीं उलझी
प्यार भरी इस जिंदगी
से प्यार करना अौर
प्यार से असली…..
…….शुद्ध प्यार पाना
सरल है क्या ?
टेढी -मेढी बल खाती पगङंङी, ऊँची- नीची राहें ,
कभी फूलों कभी कांटों के बीच,
तीखे मोड़ भरे जीवन का यह सफ़र
मीठे -खट्टे अनुभव, यादों,
के साथ
एक अौर साल गुज़र गया
कब …..कैसे ….पता हीं नहीं चला।
कभी खुशबू, कभी आँसू साथ निभाते रहे।
पहेली सी है यह जिंदगी।
अभिनंदन नये साल का !!!
मगंलमय,
नव वर्ष की शुभकानायें !!!!
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