जो बनते रहें हैं अपने.
कहते हैं पहचान नहीं पाए तुम्हें !
आँखों पर गुमान की पट्टी ऐसी हीं होती है.
अच्छा है अगर लोंग पहले पहचान लें ख़ुद को।
ज़िंदगी के राहों में,
हम ने बख़ूबी पहचान लिया इन्हें!
जो बनते रहें हैं अपने.
कहते हैं पहचान नहीं पाए तुम्हें !
आँखों पर गुमान की पट्टी ऐसी हीं होती है.
अच्छा है अगर लोंग पहले पहचान लें ख़ुद को।
ज़िंदगी के राहों में,
हम ने बख़ूबी पहचान लिया इन्हें!
शुभ मित्रता दिवस !!!!
कहते हैं जो बीत गई वो बात गई.
उन्हें जाने देना चाहिए !
पर सच तो है कि बहुत सी बीती बातें हीं
ठहर जातीं है बीत जाने पर भी,
जिद्द की तरह !!
बातों का क्या है – कही, अनकही,
कुछ अधूरी, कुछ पूरी. अटकी रहतीं हैं,
घर बना कर ज़ेहन के किसी कोने में.
ज़िन्दगी का हिस्सा बन.
जो बीत गई ,
वो बात रह गई ज़िंदगी का हिस्सा बन कर !!!


Image – Aneesh
लोगों के चेहरे देखते देखते ज़िंदगी कट गई।
चेहरे पहचानना अभी तक नहीं आया।
मेरी बातें सुन आईना हँसा और बोला –
मैं तो युगों-युगों से यही करता आ रहा हूँ।
पर मेरा भी यही हाल है।
मनचाहा दिखने के लिए,
लोग रोज़ नये-नये चेहरे बदलते रहते हैं।
सौ चेहरे गढ़,
कभी मुखौटे लगा, रिश्वत देते रहते हैं।
पल-पल रंग बदलते रहते हैं।
चेहरे में चेहरा ढूँढने और पहचानने की कोशिश छोड़ो।
अपने दिल की सुनो,
दूसरों को नहीं अपने आप को देखो।

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