
छोड़ आयी हूँ उस दरवाज़े तक।
लौट कर आओगे नहीं उस फ़लक
वापस कभी इस जहान तक।
फिर भी हर आहट पर होता है शक।
नज़रें उठ जाती है इस ललक,
शायद लौट आओ, दिल कहता है बहक।
सूनी राहें देख कदम रह जाते हैं ठिठक।
रूह में रह जाती है कसक।

छोड़ आयी हूँ उस दरवाज़े तक।
लौट कर आओगे नहीं उस फ़लक
वापस कभी इस जहान तक।
फिर भी हर आहट पर होता है शक।
नज़रें उठ जाती है इस ललक,
शायद लौट आओ, दिल कहता है बहक।
सूनी राहें देख कदम रह जाते हैं ठिठक।
रूह में रह जाती है कसक।

“वसुधैव कुटुम्बकम्” हमारी संस्कृति का चरमबिन्दु।
“समस्त धरती है परिवार” भारत का यह विचार मृदु।
तुम्हें अब आया ख़्याल, विश्व के सब नागरिक है एक!
अंतर्राष्ट्रीय मानव एकता दिवस मनाना किया शुरू।
हमारे विचारधारा सिखाते और मनाते हैं इसे हर रोज़।
हमारे संस्कार रूपी डएनए में यह है अंकित बन्धु।
यह वाक्य भारतीय संसद कक्ष में है अंकित साधु।
हमारे महा उपनिषद ग्रन्थों में है यह लिपिबद्ध बन्धु।
मानो या ना मानो हम हैं विश्व गुरु!
अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम् ।
उदारचरितानां वसुधैव कुटुम्बकम् ॥
( महोपनिषद्, अध्याय ६, मंत्र ७१)
अर्थ – यह मेरा अपना है और यह नहीं है, इस तरह की गणना छोटे चित्त वाले लोग करते हैं। उदार हृदय वाले लोगों की तो (सम्पूर्ण) धरती ही परिवार है।
English meaning- “Vasudhaiva Kutumbakam” is a Sanskrit phrase found in Hindu texts such as the Maha Upanishad, which means “The World Is One Family”. Vedic tradition mentions “Vasudhaiva Kutumbakam” meaning all living beings on the earth are a family.

कुछ यादें बाक़ी हों,
पर यादों की गलियाँ पीछे छूटने लगें।
चोट के कुछ निशा बाक़ी हों,
पर ज़ख्म भरने लगे।
ज़ख़्म में कुछ कसक बाक़ी है, पर दर्द घटने लगे।
धूप-छाँव ढल, धूप खिलने लगे।
उल्फ़त की धुंधली यादें,
उल्फ़त फिर करने कहने लगें।
तब ख़ुद को आज़माना।
यह इश्क़ है, वालिहान है, इबादत या बंदगी है?
अर्थ – वालिहाना ~ भक्तिपूर्वक, प्रेमियों की तरह का,
आशिकों जैसा, प्रेमपूर्वक, भावुकतापूर्ण, पागलों की तरह,


ख्वाहिश है अगली बार,
उम्र तुम्हारी लंबी हो यार।
तुम समझो, क्या होती है यादें
तुम जानो, क्या होता है तोड़ना वादें।
बस इतनी सी है मेरी बिखरी जहानी।
मेरी गुमशुदा ज़िंदगी की कहानी।
अर्थ- जहानीः worldly, relating to the world

रंग-बिरंगी रौशनी, कॉस्मिक क्लाउड बिखेरी सितारों ने
या रंग अबीर से खेली होली नभ के तारों-सितारों ने?
है यह समुद्र के नीचे की रीफ है या कॉस्मिक रीफ?
अद्भुत है आकाशगंगा और ऑरेंज नेबुला की ज़ईफ़।
करनी होगी चमकते-दमकते सितारों की ता’रीफ़
अर्थ ज़ईफ़ – faint, feeble, old.
News – December 16, 2022
Hubble Views a Billowing Cosmic Cloud. A stunning image of cosmic beauty, consisting of an ethereal hourglass of orange and blue dust being thrown out from a newly emerging star at its core, was recently photographed by NASA’s James Webb Space Telescope.
अंतरिक्ष में ‘अंडरसी वर्ल्ड’: 160,000 प्रकाश-वर्ष दूर से कॉस्मिक रीफ की शानदार छवि साझा की नासा ने। हबल स्पेस टेलीस्कोप द्वारा ली गई कॉस्मिक रीफ की एक तस्वीर।
https://science.nasa.gov/hubble-views-star-studded-cosmic-cloud

दुनिया में कालिमा भरे ऐसे भी हैं लोग शातिर।
जो दूसरे के मनोभाव पढ़ने में होतें हैं माहिर।
ये होते हैं महज़ लोगो को इस्तेमाल करनेवाले,
और झूठी हमदर्दी दिखाने वाले साहिर।
किसी के दर्द को महसूस करने में ये होतें हैं सिफ़र।
विडंबना है स्वार्थ और तम में डूबे इन्हें नहीं खबर ।
क्या है अपनापन और स्नेह भरा जीवन सफ़र।
अर्थ –
साहिर- टोने टोटके करने वाला।
सिफ़र- शून्य।
understanding human behaviour!
DARK EMPATH – A dark empath is a
dangerous personality type. A dark
empath is someone who uses cognitive
empathy at the expense of others,
often for personal gain. They can
recognize someone’s situation without
sympathizing with them.

If you find me not within you,
you will never find me.
For I have been with you,
from the beginning of me.
~~Rumi

हाथों में गर्म चाय की प्याली औ हम किताबों में गुम।
हो इश्क़ का तरन्नुम औ यादों में तुम।
तब लबों पर थिरक उठती है तबस्सुम,
और आँखों में अंजुम।
चाय, किताबें, इश्क़ और तुम
इन्ही से मिल बनें हैं हम।
अर्थ
अंजुम – सितारे; तारे।
तरन्नुम – स्वर-माधुर्य, गाना, मधुर गान, लय, अलाप।

अजब है नज़ारा जरा गौर कर।
ख़ुद से जुनूनी प्यार पर,
औरों से जरा ज़रा सी बातों पर
क्यों लोग है ख़फ़ा-ख़फ़ा?
अपने दिल को पढ़,
ज़िंदगी से गिला तो नहीं?
कहीं ख़ुद से ख़फ़ा तो नहीं?
नाराज़गी और राज़ी होना है हमारी फ़ितरत।
पर क्यों नाराज़गी उतारें औरों पर?
सोंचिये जरा, इंसानों के इस रवईये से
ग़र ख़ुदा सीख, ख़फ़ा हुआ इंसानों से
तो क्या होगा?
Narcissism is increasing in modern
societies, specially in West and
referred to as a “narcissism epidemic.
The endorsement rate for the statement “
Narcissism – a person who has an excessive
interest in or admiration of themselves.who
think the world revolves around them.
You must be logged in to post a comment.