ढलती धुआँ धुआँ सी
शाम सामने आते रात के
साँवले अँधेरे को ताक,
हँसी और बोली आज़ गुज़र गई,
फिर कल आऊँगी।
भीगी भीगी शाम की दहलीज़ पर
तुम फिर मुझे ढूँढते आओगे।
पर तुम करो आसनाई चरागों से।
हमें अंधेरे रास नहीं आते।

William Wordsworth was spot on when he said “Poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings: it takes its origin from emotion recollected in tranquility.” When my pen meets the paper, it always captures the many moods and their wild swings and emotions and their detours which overflows from my heart spontaneously into the paper transmogrifying into verses!!
ढलती धुआँ धुआँ सी
शाम सामने आते रात के
साँवले अँधेरे को ताक,
हँसी और बोली आज़ गुज़र गई,
फिर कल आऊँगी।
भीगी भीगी शाम की दहलीज़ पर
तुम फिर मुझे ढूँढते आओगे।
पर तुम करो आसनाई चरागों से।
हमें अंधेरे रास नहीं आते।

ज़िंदगी वह गुरु है
जो पर्चे शागिर्दों को देख कर नहीं बनाती है।
बल्कि वह अच्छे शागिर्दों को
कठिनतम इम्तहानों के लिए चुनती हैं।
और यह सिखाती है कि
इस दुनिया में जीवट हीं टिकते हैं –
“सरवाईवल औफ़ द फ़िटेस्ट”।
इसलिए अगर लगे ज़िंदगी कठिनाइयों भरी है।
इसका मायने है, ज़िंदगी ने चुना है तुम्हें,
ख़ास मक़सदों के लिए।



कुछ लोगों को दूसरों को
इस्तेमाल करने की आदत होती है।
अगर ना करने दिया
तो नाराज़ हो जातें हैं।
पर समझा करो यार –
हर कोई यूज़ एंड थ्रो नहीं होता।

विदा करने की हो न हो चाहत।
पर रुख़्सत करना पड़ता है।
चाहे गुज़रे किन्ही हालातों से।
चाहे कैफ़ियत कई हो दिल में।
पर आनेवाले को जाने देना पड़ता है।
दुनिया की है यह रीत।

देखा है कभी रक़्स-ए-जुगनू ,
अपने आप से इश्क़ करनेवाले,
नृत्य में डूबे जुगनुओं को?
रातों में अपनी रौशनी में महफ़िलें सजाते?
अँधेरे में बिखेरते अपने उजाले से दुनिया को रिझाते?
अपनी रौशनी से दीवाली मनाते?
दिया सा जलाते, बे-रौशन रातों में?
वैसे हीं अपनी रूह को रौशन रखो!
हौसले का एक सितारा दमकने दो।
यह जीवन के हर पल को रौशन करेगा, अंधकार हरेगा।
Interesting Psychological fact- Self-esteem is your overall opinion of yourself. If you have healthy self-esteem, you feel good about yourself and see yourself as deserving. When you have low self-esteem, you put little value on your opinions and ideas.

अपने सुकून और शांति के लिए
अगर कुछ लोगों से दूर होना पड़े।
तब इसका मतलब है वे आपके
स्वस्थ के लिए बेमेल- विरुद्धाहार हैं।
विरुद्ध आहार- बेमेल या अस्वस्थकर भोजन आयुर्वेद के अनुसार।

खुल कर साँसें लो। आज़ाद छोड़ दो अपने आप को।
तुम, तुम रहो। किसी के बनाए साँचें में बेमन से ना ढलो।
जैसे हो वैसे हीं स्वीकार करो अपने आप को।
इश्क़ करना सीखो अपने आप से।
जीतने की कोशिश करो,
पर मुस्कुराओ अगर हार भी जाते हो।
क्योंकि हम सब अपनी अपूर्णता,
कमियों और खामियों के साथ परिपूर्ण हैं।
वही अनूठापन है, वही हमारी पहचान है।
Psychological Fact – Self-love means having a high regard for your own well-being and happiness. Self-love means taking care of your own needs and not sacrificing your well-being to please others.

ना डरो,
जब चारो ओर गहन अँधेरा दिखे।
जब लगे, हो रहा सब ख़त्म।
तभी अंकुर निकलता है,
ऊपर बढ़ने के लिए।
रौशनी से होती है मुलाक़ात।
नीचे जड़े सहारा देने लगती हैं।
मिट्टी में दबे बीज सी है ज़िंदगी भी।

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