हो ना नाउम्मीद

कभी सब हाथ छूटने लगे,

रिश्ते टूटने लगे।

झड़ते पत्तों सी गिरती-बिखरती लगे ज़िंदगी,

हो ना नाउम्मीद।

हौसला रख।

सब्र कर।

पतझड़ आता हैं।

फिर बहारें भी आएँगी।

तय है कितनी भी लंबी रात हो,

सुबह आएगी।

जुबाँ

कभी कैक्टस, कभी पत्थर

बन जाती है नरम मुलायम जीभ।

कभी नर्म कभी गर्म, कभी ज़ख्म पर

मरहम सा सुकून भरा फाहा।

कभी घाव दे जाती है नाज़ुक जीभ।

कभी रिश्ते बनाती, कभी बिगाड़ती है।

कभी गुनाहगार कभी बेगुनाह निर्दोष बन जाती है।

शायद इसलिए ज़ुबान की दहलीज़ पर

लबों के पहरे होते हैं।

शायद इसलिए जुबाँ

कई दीवारों के पहरे में क़ैद रहती है।

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोये।

औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए।। ~~ कबीर

दुआओं में नाम ना होगा !

दूसरों को दर्द देने वाले को

मालूम होती है ख़ता अपनी।

क्यों जाया करना लफ़्ज इन पर?

इन्हें ना दे बद-दुआ, पर तय है

दुआओं में नाम ना होगा इनका।

जब कोई चोट और दर्द दे कर,

अपनी हीं तकलीफ़ का राग सुनाता है,

तब एक पुरानी कहावत याद आती है –

सूप बोले तो बोले, चलनी बोले जिसमें सौ छेद।

Psychological Fact – One may end up feeling exhausted, depressed, anxious, frustrated, and physically sick when Toxic people act as a victim.

अजब नशा

शराबखाने से ज़्यादा,

इश्क़ औ आँखों के नशे से बढ़ कर

जो ना टूटे वो अजब नशा है यह।

संभल कर कदम बढ़ाना सीढ़ियों पर

सोशल मीडिया के।

Psychological fact of social media addiction-

Using social media can lead to physical and psychological addiction because it triggers

the brain’s reward system to release

dopamine, the “feel-good” chemical.

ख्वाहिशें तो अनंत हैं!

क्यों आज़ लोग खुश और संतुष्ट नहीं?

क्यों लोग स्वयं को नहीं, दूसरों को देख रहें हैं?

आध्यात्मिक-मानसिक प्रगति से दूर,

भाग रहें हैं भौतिक प्रगति की ओर।

पर है स्वयं के गोली-बारी, हिंसा से लहू-लुहान।

गीता ने सदियों पहले बताया,

जो तुम्हारे पास है उसमें संतुष्ट, ख़ुश रहना सीखो,

क्योंकि ख्वाहिशें तो अनंत हैं।

सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः।

मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे प्रियः।।12.14।।

अर्थ- संयतात्मा दृढ़निश्चयी योगी सदा सन्तुष्ट है।

जो अपने मन और बुद्धि को मुझमें अर्पण किये हुए है?

वह मुझे प्रिय है। (भगवद् गीता अध्याय 12 श्लोक 14)

Salman Rushdie Stabbed In Neck At New York Event, Taken To Hospital. https://www.ndtv.com/world-news/author-salman-rushdie-attacked-on-stage-at-an-event-in-new-york-news-agency-pti-3249899/amp/1

ना तौल इंसा को!

नाप-तौल के रिश्ते निभाने वालों

हाथ में लिए तराज़ू,

ना तौल इंसाँ को।

ना भूल,

आकार, रूप, रंग हैसियत नहीं,

हुनर, स्वभाव और गुण काम आते हैं।

जैसे छोटे से छोटे भी अनमोल होते है

हीरा-स्वर्ण-जवाहरात ।

इंसान

इंसानों को पहचानना हैं?

उनकी दखलंदजी की सीमाएँ

तय कर दीजिए अपनी ज़िंदगी में।

जो उसे तोड़ने की कोशिश करें।

उन्हें सम्मान नहीं आपका,

आपकी सीमाओं और भावनाओं का।

उन्हें समझना है ज़रूरी।

Psychology- Setting limits is often part of relationships, but if you feel disrespected by someone crossing your boundaries, it may be time to take action.

परिवर्तन

हिरोशिमा

क्यों नहीं मानते हैं इसे?

लिटल बॉय ऐटम बम और

दूसरे विश्व युद्ध की विभीषिका को

क्यों याद नहीं करते?

ऐसी भयानकता याद कर शायद विश्व,

ना बढाये तीसरे विश्व युद्ध की ओर कदम।

6 August, Hiroshima Day- During world war 2, 1945 an atom bomb was dropped on Hiroshima, Japan. It killed more than 200000 people in few seconds and number of people got injured and disabled.

religion of solitude

The more powerful

and original a mind,

the more it will incline

towards the

religion of solitude.

~ Aldous Huxley