मृत यादें मर कर भी दर्द देतीं है।
ग़र अतीत के घाव नहीं भरे
तो वे रिसते रहेंगे।
यादों के दाग,
ज़ख्मों के जलन
अपने होने का एहसास देते रहेंगे।
अतीत से समझौता कर
आगे निकल जाना ज़रूरी है।

William Wordsworth was spot on when he said “Poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings: it takes its origin from emotion recollected in tranquility.” When my pen meets the paper, it always captures the many moods and their wild swings and emotions and their detours which overflows from my heart spontaneously into the paper transmogrifying into verses!!
मृत यादें मर कर भी दर्द देतीं है।
ग़र अतीत के घाव नहीं भरे
तो वे रिसते रहेंगे।
यादों के दाग,
ज़ख्मों के जलन
अपने होने का एहसास देते रहेंगे।
अतीत से समझौता कर
आगे निकल जाना ज़रूरी है।

दिल में दबा दर्द मुस्कुराहटों की ओट में पनाह लेता है।
मुस्कुराहटें आँखों के आँसुओं के नमी
के पीछे लुका-छिपी करती है।
क्यों एहसासों को छुपाने का चलन ज़माना सिखाता है?
दिल पर बोझ बढ़ाना सिखाता है?
वही आँखें, वही मुस्कान जो राज़दार बनती हैं,
वही दर्द-ए-दिल राज़ खोल देतीं हैं।
नासूर नहीं इलाज-ए-दर्द चाहिए।
Psychological Fact – Don’t Bury Your Feelings. Being in touch with your feelings will make you a better person, as well as a better parent and partner. Being true to your emotions can make you feel better about yourself.

तलाश थी अपनी, ढूँढते रहे
दहर…दुनिया के ज़र्रे-ज़र्रे में।
दिल के अंदर से आई आवाज़,
कस्तूरी मृग ना बन,
जो अपनी ही ख़ुशबू खोजता रहता है बाहर।
झाँक अपने अंदर।
हृदय के अंदर, रिक्त आकाश में है
असल तू, तेरा दहर ( शिव या ब्रह्म अंश)।
गुफ़्तगू कर उससे।
आईने सा नज़र आएगा अक्स तेरा।
चिदानंद रूपः शिवोहम शिवोहम!
शब्दार्थ- दहर- दुनिया, दहर – शिव या ब्रह्म अंश

शुभ शिवरात्रि !
Happy Shivratri – I am not the ether, nor the earth, nor the fire, nor the wind (the five elements). I am indeed, That eternal knowing and bliss, the auspicious (Shivam), love and pure consciousness.
ज़िंदगी के शतरंज पर
सम्बंधों की गोटियाँ ना खेलो।
ग़र किसी की ज़्यादती
बिना जवाब दिए झेल गए,
तब जवाब ऊपरवाला देता है।
महाभारत रचने में महारत रखने वालों
का भी यही हश्र हुआ था।

करो इश्क़ हर साँसों से,
साँसे ज़िंदगी…ताक़त है हमारी।
किसी और के फ़िक्र में ना टूटने दो दिल,
दिल अपना है।
चोट ना लगने दो अपने अंतरात्मा को।
रूह तुम्हारी है,
किसी भीड़ में ना गुम होने दो अपने आप को,
जब टूटने लगो ज़िंदगी में, ठहर कर,
एक गहरी साँस लो और आइने
में निहारो अपने आप को।
याद रखो, हम सबसे ज़्यादा अपने हैं।

जब हौसला अफजाई कम
और व्यंग बाण ज़्यादा हो जायें,
मायने बुलंदियाँ क़रीब हैं।
लोगों की निगाहे उठने लगें,
पैर नीचे खिंचने वाले बढ़ जायें,
मायने आसमाँ क़रीब है।
जब दोस्तों से दुश्मन ज़्यादा हो जायें।
लोगों की निगाहों में चढ़ने लगो।
मायने फ़लक के सितारे क़रीब हैं।
बस सब्र रखो, क्योंकि हर किसी के,
कर्म का नतीजा ज़रूर सामने आता है।


कहते हैं त्रुटि कपड़ों में हैं।
पर वे प्राचीन मूर्तियाँ जो मंदिरों में पाषाणों पर
युगों-युगों पहले उकेरी गई सौंदर्यपूर्ण मान।
उन्हें अश्लील या अर्ध नग्न तो नहीं कहते।
आज़ कहते हैं ग़लती लड़कियों की है।
क्या तब लोगों की निगाहें सात्विक थीं
या तब सौंदर्य बोध अलग था।
सुनते है, सब दोष मोबाइल का है।
बौद्ध भिक्षुकों के तप स्थली अजन्ता गुफाओँ में
उकेरे बौद्ध धर्म दृश्य और नारी सौंदर्य शिल्पकारी,
उत्कृष्ट कलात्मकता की है पराकाष्ठा।
हमारी प्राचीन संस्कृति कहती कुछ और है।
और आज कुछ और कहा जाता है।
भूल कहाँ है? गलती किसकी है?
चूक कहाँ हुई? क़सूर किसका?
सज़ा किसे?
गुनाहगार कोई, सज़ा पाए बेगुनाह?

कहते है आभार देते समय रहता मन शुद्ध सात्विक।
क्योंकि शुक्रगुज़ार होंने के वक्त
हम सब के साथ होती है सकारात्मक ऊर्जा।
आभार देते वक्त, शिकवे-गिले आते नहीं हैं ज़ेहन में।
अब विज्ञान के ख़यालात भी लगे हैं मिलने।
वे भी मानने लगें हैं, शुक्रिया कैसे भी अदा करो।
लफ़्ज़ों से, मन हीं मन या दिल से।
ख़ूबसूरती, सुकून और ख़ुशियाँ भरी होती है उनमें।
positive psychology research – gratitude is strongly and consistently associated with greater happiness. Gratitude helps people feel more positive. Giving thanks can make you happier – Harvard Health

आदतें दर्द भी देती हैं और मज़ा भी!
इनसे मिलती हैं आह भी और वाह भी।
कुछ आदतें ग़ुलाम बनाती हैं।
कुछ रचना की आज़ादी दिलातीं है।
जलते दीप को बुझाने, दर्द औ ग़म देने वालों
की आदत भी जाती नहीं।
बस, खिलखिलाने-मुस्कुराने
की आदत जाने ना दो।
Research shows that people with hobbies are less likely to suffer from stress, low mood, and depression. Activities that get you out and about can make you feel happier and more relaxed
National Break Free From the Big Three Day, celebrated on July 14, is an opportunity to break free from bad habits, relationships, and stale mobile plans.
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