वालिहाना

कुछ यादें बाक़ी हों,

पर यादों की गलियाँ पीछे छूटने लगें।

चोट के कुछ निशा बाक़ी हों,

पर ज़ख्म भरने लगे।

ज़ख़्म में कुछ कसक बाक़ी है, पर दर्द घटने लगे।

धूप-छाँव ढल, धूप खिलने लगे।

उल्फ़त की धुंधली यादें,

उल्फ़त फिर करने कहने लगें।

तब ख़ुद को आज़माना।

यह इश्क़ है, वालिहान है, इबादत या बंदगी है?

अर्थ – वालिहाना ~ भक्तिपूर्वक, प्रेमियों की तरह का,

आशिकों जैसा, प्रेमपूर्वक, भावुकतापूर्ण, पागलों की तरह,

गुमशुदा ज़िंदगी की कहानी

ख्वाहिश है अगली बार,

उम्र तुम्हारी लंबी हो यार।

तुम समझो, क्या होती है यादें

तुम जानो, क्या होता है तोड़ना वादें।

बस इतनी सी है मेरी बिखरी जहानी।

मेरी गुमशुदा ज़िंदगी की कहानी।

अर्थ- जहानीः worldly, relating to the world

रंग अबीर, कॉस्मिक क्लाउड या कॉस्मिक रीफ

रंग-बिरंगी रौशनी, कॉस्मिक क्लाउड बिखेरी सितारों ने
या रंग अबीर से खेली होली नभ के तारों-सितारों ने?

है यह समुद्र के नीचे की रीफ है या कॉस्मिक रीफ?

अद्भुत है आकाशगंगा और ऑरेंज नेबुला की ज़ईफ़।

करनी होगी चमकते-दमकते सितारों की ता’रीफ़

अर्थ ज़ईफ़ – faint, feeble, old.

News – December 16, 2022
Hubble Views a Billowing Cosmic Cloud.
A stunning image of cosmic beauty, consisting of an ethereal hourglass of orange and blue dust being thrown out from a newly emerging star at its core, was recently photographed by NASA’s James Webb Space Telescope.

अंतरिक्ष में ‘अंडरसी वर्ल्ड’: 160,000 प्रकाश-वर्ष दूर से कॉस्मिक रीफ की शानदार छवि साझा की नासा ने। हबल स्पेस टेलीस्कोप द्वारा ली गई कॉस्मिक रीफ की एक तस्वीर।

https://science.nasa.gov/hubble-views-star-studded-cosmic-cloud

कालिमा भरी हमदर्दी

दुनिया में कालिमा भरे ऐसे भी हैं लोग शातिर।
जो दूसरे के मनोभाव पढ़ने में होतें हैं माहिर।
ये होते हैं महज़ लोगो को इस्तेमाल करनेवाले,

और झूठी हमदर्दी दिखाने वाले साहिर।
किसी के दर्द को महसूस करने में ये होतें हैं सिफ़र।

विडंबना है स्वार्थ और तम में डूबे इन्हें नहीं खबर ।

क्या है अपनापन और स्नेह भरा जीवन सफ़र।

अर्थ –

साहिर- टोने टोटके करने वाला।

सिफ़र- शून्य।

understanding human behaviour!

DARK EMPATH – A dark empath is a

dangerous personality type. A dark

empath is someone who uses cognitive

empathy at the expense of others,

often for personal gain. They can

recognize someone’s situation without

sympathizing with them.

I have been with you!

If you find me not within you,

you will never find me.

For I have been with you,

from the beginning of me.

~~Rumi

चाय, किताबें, इश्क़ और तुम

हाथों में गर्म चाय की प्याली औ हम किताबों में गुम।

हो इश्क़ का तरन्नुम औ यादों में तुम।

तब लबों पर थिरक उठती है तबस्सुम,

और आँखों में अंजुम।

चाय, किताबें, इश्क़ और तुम

इन्ही से मिल बनें हैं हम।

अर्थ

अंजुम – सितारे; तारे।

तरन्नुम – स्वर-माधुर्य, गाना, मधुर गान, लय, अलाप।

ख़फ़ा

अजब है नज़ारा जरा गौर कर।

ख़ुद से जुनूनी प्यार पर,

औरों से जरा ज़रा सी बातों पर

क्यों लोग है ख़फ़ा-ख़फ़ा?

अपने दिल को पढ़,

ज़िंदगी से गिला तो नहीं?

कहीं ख़ुद से ख़फ़ा तो नहीं?

नाराज़गी और राज़ी होना है हमारी फ़ितरत।

पर क्यों नाराज़गी उतारें औरों पर?

सोंचिये जरा, इंसानों के इस रवईये से

ग़र ख़ुदा सीख, ख़फ़ा हुआ इंसानों से

तो क्या होगा?

Narcissism is increasing in modern

societies, specially in West and

referred to as a “narcissism epidemic.

The endorsement rate for the statement “

Narcissism – a person who has an excessive

interest in or admiration of themselves.who

think the world revolves around them.

सीमाएँ

बड़ी मुश्किलों से जाना अपने-आप को,

पहचाना अपने आप को,

अपनी रूह को।

कुछ नादान कहतें हैं-

बडे अच्छे से पहचानते हैं,

जानते तुम्हें हैं।

ये ज़िंदगी में वेवजह दखल देतें हैं।

दूसरों की सीमाएँ तोड़ने वाले से दूरी है ज़रूरी।

Positive Psychology – In real life mute

unwanted people by setting clear

boundaries. Boundaries define us.

शमा के नूर

पूछा किसी ने रूमी से- दरवेश! किस मद में चूर हो?

गोल-गोल झूमते और घूमते लगते शमा के नूर हो।

नृत्य में बेफ़िक्री डूबे किस सुरूर हो?

यह नशा पाते कहाँ से हो?

जवाब मिला – चूर हैं हम मद, औ मुहब्बत में उसके,

दुनिया रौशन है उल्फ़त में जिसके।

तु हर चोट की दरार से रिसके,

रौशनी भरने दे अपनी रूह में।

उसके इश्क़ को ना ढूँढ दिल में,

अपने अंदर जो दीवारें बना रखीं है,

तोड़ आज़ाद हो जा हँस के।

तु भी झूमने लगेगा इस मद में।

अर्थ

शमा – सूफी नृत्य की रूहानी दुनिया।

रूमी – सूफ़ी दरवेश \ संत।

ज़िंदगी के मेले में

ज़िंदगी के मेले में कई मिलते हैं

कुछ दूर साथ चलते हैं।

अपनी अपनी मंज़िल की ओर

बढ़ जाते हैं,

जैसे हो दरिया का बहता पानी।

बहती नादिया रुक जाये तो

खो देती है ताज़गी और रवानी।

बढ़ते जाना हीं है ज़िंदगानी।

मंज़िल पाना है जीवन की कहानी।