प्रतिबिंब अौर अक्स -कविता Reflection-poetry

The beauty you see in others, Is a reflection of you!!!

मन में उमड़ते-घुमड़ते कविता को,

जब पन्नों पर उतारना चाहा ।

शब्दों के माया जाल  ने उलझा लिया।

ढूंढते-ढूंढते जब शब्द हाथ लगे।

तब तक कविता न जाने कहां खो गई थी।

कुछ पंक्तियां जो याद रह गईं हैं  वे यहां है –

आप दूसरों में जो सुंदरता देखते हैं,

वह आप का हीं प्रतिबिंब अौर अक्स है !!!!!!

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वृंदावन की वृध्द विधवायेँ – कविता  Widows of Vrindavan 

( मान्यता हैं कि वृंदावन , वाराणसी आदि में शरीर त्यागने से मोक्ष के प्राप्त होती हैं. इसलिये प्रायः इन स्थानों पर विधवायें आ कर सात्विक जीवन बसर करती हैं अौर अपने मृत्यु का इंतजार करती हैं। यहाँ इन्हें अनेकों बंधनों के बीच जीवन व्यतीत करना पड़ता हैं। इस वर्ष (2016) पहली बार होली खेलने के लिये कुछ मंदिरों ने अपने द्वार इन विधवाओं के लिये खोल दिये. )

वृंदावन और कान्हा की मुरली
सब जानते हैं।
वृंदावन की होली
सब जानते हैं।
पर वहाँ कृष्ण को याद करती
सफेदी में लिपटी विधवाओ की टोली
किसने देखी हैं ?
आज़ जब पहली बार
उन्हों ने खेली फूलों की होली।
सफेदी सज गई गुलाबो की लाली से
कहीँ बज उठी कान्हा की मुरली
उनकी उदास साँसो से।

widows of vrindavan

Source: वृंदावन की वृध्द विधवाये ( कविता )

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ताश के घर House of cards

I saw many humans on whom there were no clothes.

I saw many clothes in which there were no humans.
~ Rumi

 हवा के झोंकों के साथ 

टूटते बिखरते देखा है.

शीशे से भी नाजुक 

ताश के घरों को.

क्यों दूसरों पर वार करते है लोग ?

जब खुद रहते है ताश के घरों  में ?

अनजानी राहें – कविता Untraveled Routes -Poem

Some beautiful paths can’t be discovered without getting lost.

 

कभी-कभी  राहों मे,

खो जाना भी अच्छा है,

कुछ सुंदर नये रास्तों को पाने के लिए ।

खोये  बिना कुछ पाया नहीं  जा सकता।

अपने आप को भी भूल जाना

कभी-कभी अच्छा है

बहुत कुछ नया पाने के लिए।

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कन्या पूजन ( कविता )

बस एक पुरानी कविता आज के दिन को समर्पित है !!!!

अखबार के पन्ने  रंगे हैं ‘हैप्पी विमेंस डे’ की

बधाईयों  से,

लेकिन इन खबरों को पढ़ने के बाद

क्या लिखा जाए और क्यों लिखा जाए?

 

Todays News – The Indian Express wed, MARCH 8, 2017

  1. 19 foetuses found: homeopath held, police say he has confessed.
  2. women dies in botched-up abortion.
  3. sold to a brothel at 12, she fought diseases, poverty, but hung on to hope.

 

नवरात्रि की अष्टमी तिथि ,
प्रौढ़ होते, धनवान दम्पति ,
अपनी दरिद्र काम वालियों
की पुत्रियों के चरण
अपने कर कमलों से
प्यार से प्रक्षालन कर रहे थे.

अचरज से कोई पूछ बैठा ,
यह क्या कर रहें हैं आप दोनों ?

अश्रुपूर्ण नत नयनों से कहा –
“काश, हमारी भी प्यारी संतान होती.”
सब कुछ है हमारे पास ,
बस एक यही कमी है ,

एक ठंडी आह के साथ कहा –
प्रायश्चित कर रहें है ,
आती हुई लक्ष्मी को
गर्भ से ही वापस लौटाने का.

Source: कन्या पूजन ( कविता )

जिंदगी के रंग- कविता 15

News PUNENewsline , Tuesday, MARCH 7, 2017

SSC Exam, Fearing paper leak cases,

 

फिसलते हुए वक्त को रोकना बस में नहीं है

जितना पकड़ो,

रेत की तरह मुट्ठी से रिस जाता है

बस बदलता ही रहता है  यह वक्त,

जिंदगी के  नये नये  परीक्षाअों  के साथ।

कितना भी पूछ लो पंडित नजूमियों से आगे क्या होगा???

कोई जवाब नहीं मिलता,

वक्त अौर जिंदगी में आगे क्या होगा ?

पर यह इंसान भी क्या चीज है,

खुद ही परीक्षा लेता है अौर

अक्सर  परीक्षा के पर्चे, परीक्षा से पहले

चंद सिक्कों के लिये  बेच दिया करता  हैं…………

ख्वाबों ख्यालों ख्वाहिशों भरी जिंदगी -कविता

I have a thousand desires, all desires worth dying for………..

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले…

  MIRZA GHALIB

 

ख्वाबों ख्यालों ख्वाहिशों  से

बहुत आगे आ चुकी है जिंदगी।

गुनगुनाती सुबहें अौर शाम की

बस कुछ खुमारी बची है।

जिंदगी की जिम्मरदारियों ने,

वक्त के साथ क्या-क्या  बदल दिया?

अब तो अपने आप से बातें करने के लिए भी,

वक्त से इजाजत लेनी पड़ती है।

पर अभी भी  नही बदलीं हैं,

तो हसरतें अौर हज़ारों ख्वाहिशें…………..

 

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फ़ीनिक्स या मायापंछी ? -कविता Phoenix-poetry

In Greek mythology, phoenix   is a long-lived bird that is cyclically regenerated or reborn. Associated with the Sun, a phoenix obtains new life by arising from the ashes . may symbolize renewal

फ़ीनिक्स एक बेहद रंगीन पक्षी  होता है । जिस की चर्चा प्राचीन मिथकों व दंतकथाओं में पाया जाता है।  माना जाता है कि  वह मर कर भी राख से पुनः जी उठता है।

phoenix  1.jpg

एक लड़की भीगी आंखों वाली।

उसकी भीगी आंखें जैसे,

अोस भरी भीगी रातें हो।

थोड़ी   जिद्दी, थोङी हैरान-परेशान,

माया पंछी की तरह मायावी।

लड़ती झगड़ती दुनिया की अनुचित बातों से,

फिनिक्स

की तरह हर बार फिर से उठ जाती

पता नहीं कहां से वह शक्ति लाती

कितनी बार  राख से पुनर्जन्म लेने की काबलियत है उसकी?

हर बार, हर बार………..पर  कितनी बार……..?

कौन जाने कितनी बार??????????

 

 

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निद्रा मग्न राजकन्या -उर्मिला, कविता; Urmila -The sleeping beauty of Ramayna-poem,

 

   A mythological story  -Lakshman begged Nidra devi, the goddess of sleep,to leave him alone for fourteen years so that he could guard his brother and sister-in-law night and day.  But the law of nature demanded that someone should bear the burden of Lakshman’s share of sleep. “Go to my wife, Urmila, and inform her of the situation,” said Lakshman. Nidra went to Urmila.

एक किवदंती के अनुसार–  लक्ष्मण ने  चौदह साल के बनवास में निद्रा की देवी से वरदान माँगा कि उसे नींद ना आये अौर वह रात-दिन जाग कर  राम-सीता की सुरक्षा कर सके।  ऐसे में लक्ष्मण ने नींद को अपनी पत्नी उर्मिला के पास भेज दिया और अपना सन्देश भी भेजा,  लक्ष्मण के हिस्से की नींद उर्मिला को मिले अौर कहते हैं उर्मिला चौदह साल सोती रही।

मैं निद्रा  मग्न राजकन्या,

जनक नन्दिनी थी, पर नहीं कहलाई जानकी ,

 ना कहा मिथीला की मैथिली

ना विदेह की वैदेही कहलाई.

ना किसी ने उर्मिला-लक्ष्मण कहा सीताराम की तरह।

 राम कहलाये सियावर,  किसी ने लक्ष्मण को भी कहा होता उर्मिला-वर.

इन बातों का मुझे दुःख नहीं।

 पर 

मैंने तो पतिविहिन चौदह वर्ष का वनवास काटा था।

वनवास साथ जाने को  तैयार थी

मुझे क्यों छोङ गये लक्ष्मण?

नींद में नहीं ,ङूबी थी विषाद  में मैं।

किशोर पति चौदह वर्ष बाद आया  पुर्ण पुरुष बन ।

  फिर

दुर्वासा के श्राप से अयोध्या को बचाने,

तुमने ले ली सरयू नदी में जल समाधी

चले गये अनंत यात्रा पथ पर।

पर मेरा क्या?

रह गया कभी ना खत्म होने वाला वैराग्य …………

Image from internet.

जिंदगी के रंग ( 2) कविता

चलते -चलते लड़खड़ा गये क़दम,
तभी सहारे के लिये बढ़ आये नाजुक हाथ,
हैरानी से देखा,
ये तो वही हाथ हैं,
जिन्हे कभी मैंने पकड़ कर चलना सिखाया था,
सचमुच, जिंदगी रोज़ नये रंग दिखाती हैं हमें.

 

Source: जिंदगी के रंग ( 2) कविता