
समय खुशबू की तरह उड़
गुजरता जाता है . .
समय की खुशबू में डूब
खट्टी मीठी यादें
सूखे गुलाब से
किताब के पन्नों में दबे रह जाते है .
और
कभी खजाने और कभी टीस बन
अपनी खुशबू बिखेर जाते है……….


समय खुशबू की तरह उड़
गुजरता जाता है . .
समय की खुशबू में डूब
खट्टी मीठी यादें
सूखे गुलाब से
किताब के पन्नों में दबे रह जाते है .
और
कभी खजाने और कभी टीस बन
अपनी खुशबू बिखेर जाते है……….

61 MORE KIDS DIE IN LAST 72 HOURS AT GORAKHPUR HOSPITAL
Farrukhabad: 49 infants die in UP hospital
गोरखपुर में 72 घंटे में 46 बच्चों की मौत
अब फर्रुखाबाद में 49 बच्चों की मौत
हर रोज नन्हें बच्चों के मृत्यु की खबरें
दहशत पैदा कर रहीं हैं ।
कौन सी आसुरी वृत्ति इनके मौत का कारण है?
द्वापर युग में
मथुरा राज कंस ने आकाशवाणी सुनी –
देवकी का आठवाँ बालक उनका वध करेगा।
कुपित क्रूर कंस ने
देवकी के समस्त संतानों को मार ङाला।
आठवीं कन्या को मारना चाहा ,
तब वह
काली रुपा आसमान में जा कर बोल पङी —
“तुझे मारने वाला तो जन्म ले चुका है।”
मृत्यु भय ग्रस्त कंस ने सभी
नवजात शिशुओं को मरवाना शुरु कर दिया।
क्या आज फिर उसी कुकाण्ङ की पुनरावृत्ति हो रही है?
बढ़ते पाप – अनाचार के नाश अौर
धर्म की स्थापना के लिये,
मस्तक पर मोर मुकुट
वक्षस्थल पर कौस्तुभ मणि धारण करने वाले विष्णुवतार
कृष्ण ने क्या फिर कहीं जन्म लिया है?
यह ताङंव रुकेगा क्या?
कशमकश में दिवस बीत गया….
सूरज धुल कर चाँद हो गया।
तब
आसमान के झिलमिलाते सितारों ने कहा –
हौसला रखो अौर आसमान चुमने की कोशिश करो।
क्योकिं अगर
उतना ऊपर ना भी पहुँच सके,
तब भी हम सितारों तक
तो जरुर पहुँच जाअोगे!!!
वह सफेद लिबास में, सफेद गुलदस्ते सी थी,
घर वालों को चाहिये थी लाली वाली दुलहन।
यह शादी, मैरेज अौर निकाह के बीच का फासला
प्रेम, इश्क, लव व इबादत
सब कुछ तोङ गई।
कहते है अपनों से हुए जंग हार जाना चाहिये,
पर बार-बार हारते हुए,
सामने वालो को भूल का एहसास ना दिलाने
अौर बस ढोते रहने से,
रिश्तों मे जो जंग लग जाती है
उसका क्या?
किसी का दर्दे हाल जानना है ,
तब
पास जाअो, करीब से देखो।
दूर से तो सब कुछ
सुहाना हीं सुहाना दिखता है।
IndiSpire – Ideas for Edition 185
Do you have that one person who was once your best companion but now a complete stranger? What changed?
जिंदगी के सफर में जब भी रिश्तों की
कश्ती ङूबती है
कभी माँझी, कभी मौसम अौर
कभी नदी के भँवर ………. बदनाम होते हैं।
पर जब नाव का छुपा सुराख़ ही उसे
ङूबाने लगे ,
तब वफा – वेवफा, टूटना – छूटना,
अपना -पराया क्या मतलब रखतें हैं?
धोखा… अविश्वास का सुराख़…..
किसी को मार ङालने
के लिये अकेले हीं काफी है।
यह
रिश्तों को जीने नहीं देता………
पलट कर देखा, लगा काश…..
बीता समय लौट आये।
जिंदगी ने हँस कर कहा –
यह लिखना -मिटाना
फिर कुछ नया लिखना……..
यह तुम्हारी फितरत होगी,
हमारी नही।
हम तुम्हारी तरह लेखक या कवि नहीं हैं।
दूसरा मौका हम नहीं देते!!!!!
(अभी अभी व्हाट्सएप्प स्टेटस में आरजे वशिष्ठ का एक वीडियो देखा जिसकी आखिरी पंक्तियों के बोल थे तो क्या हुआ…इतना अच्छा लगा की मेरे एहसास भी इसके साथ जुड़ गए…और कुछ पंक्तिया मेने भी लिख दी आशा है की आप सब पसंद करेंगे)
साथ रहने का वादा टुटा…..तो क्या हुआ..
कंधे पे जिसके रोते थे ….वो कन्धा छुटा तो क्या हुआ..
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ऐसा तो नही था की तुम और हम बने ही थे एक दूजे के लिए…
साथी थे हमसफ़र तो नहीं…
राह चलते…राहे बदलते कोई साथी छूटा तो क्या हुआ…
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जिस यारी के दम पर लोगो को जलाया करते थे…वो याराना ही टुट गया… तो क्या हुआ…
मुस्कुराते होठो से मुस्काने छूटी… तो क्या हुआ..
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मीठे से मन की…मिठास ही मिट गई… तो क्या हुआ…
कामयाबी के शिखरो के आगे….जमींन पर कोई यार छुटा…. तो क्या हुआ
.
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वो रोया गिड़गिड़ाया..टुटा ….जुड़ा… फिर…
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जिस राह पर हर बार मुझे
अपना कोई छलता रहा ।
फिर भी ना जाने क्यों मैं
उसी राह ही चलता रहा।
सोंचा इस बार….
रौशनी नहीं धुआँ दूँगा।
लेकिन चिराग था फितरत से,
जलता रहा..
जलता रहा……
Anonymius
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