चाँद कहाँ रहते हो तुम?

पूछा जलते और ढलते सूरज ने।

तपन के बावजूद हम साज़िश करते रहते है

ताकि चाँद तुम दमक सको

मेरी प्रतिबिंबित रोशनी से।

मिलन ना लिखा हो हमारा।

पर ख्वाहिश है कि

चाँद तेरी दूधिया चाँदनी चमके

आफ़ताब….सूरज की रौशनी से।

Topic by yourquote

नारी या ज़िद्दी पेड़

औरत क्या सिर्फ़ एक ज़िद्दी पेड़ की तरह है?

कही से उखाड़ कर कही और लगा दो।

उसे पनपना ही होगा।

चाहे उसमें इसकी शक्ति हो ना हो।

उसे पसंद हो ना हो।

पत्नी ना रहे तो कहते हैं आदमी कब तक रहे अकेला?

पति ना रहे तो कहते हैं –

पत्नी को वैधव्य धर्म निभाना चाहिए।

इतना फ़र्क़ क्यों?

Every woman should have the same

rights as men, because a woman is

the mother who gives birth to a man.

We should always respect them.

~~ RAJA RAM MOHAN ROY

(20th August 1828, the first session of Raja Ram Mohan Roy’s Brahmo Samaj was held in Kolkata.)

ज़िंदगी एक फ़िल्म है,

जिसका लेखक, डायरेक्टर सब है ऊपरवाला,

और मुख्य पात्र हैं हम।

कब क्या होगा, किसी को नहीं मालूम।

नए नए ट्विस्ट और टर्न के साथ

अग़ल दृश्य हमेशा है एक मिस्ट्री।

दृश्य है बदलते रहते।

बस नहीं रहता

किसी को इस

फ़िल्म के द एंड

या अंत का इंतज़ार।

Topic by YourQuote.

माघ नक्षत्र वर्षा जल

पुराण कहते हैं सूर्य जब 14 दिन माघ नक्षत्र में होता है, तब वर्षा जल बन जाता है गंगाजल सा। कर लो इससे देव अर्चना, महादेव अभिषेक या श्री यंत्र पर श्री सूक्तम अभिषेक, प्रसन्न होगी लक्ष्मी। आयुर्वेद बताता है, यह जल है अति पवित्र और रोग नाशक। किवदंतियाँ कहतीं हैं चातक पक्षी साल भर प्यासा रह करता है इंतज़ार, पीने को अमृतमय माघ नक्षत्र वर्षा जल का। कृषक मनाते हैं, धरती की प्यास बुझाती यह जल है स्वर्ण समान। चाणक्य ने सही कहा है – नास्ति मेघसमं तोयं’।

(सूर्य लगभग 14 दिनों तक एक नक्षत्र की परिक्रमा करता है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष माघ नक्षत्र में सूर्य की कक्षा 17 अगस्त को दोपहर 1:18 बजे से 30 अगस्त की रात 9:18 बजे तक माघ नक्षत्र में होगा। मान्यता है कि अनमोल है माघ नक्षत्र के बारिश का जल। लोग अमृत समान मान इस समय के वर्षा जल को संचित करते हैं।

विज्ञान और नासा जिन बातों को खोज़ रहें है। उनकी जानकारियाँ हमारे भारतीय पंचांगों में सटीक तरीक़े से सदियों से बताया जा रहा है।)

शुभ जन्माष्टमी !! Happy Janmashtami!!

‘तू करता वही है , जो तू चाहता है ,

होता वही है जो मै चाहता हूँ।

तू वही कर ,जो मै चाहता हूँ ,

फिर होगा वही ,जो तू चाहता है। ‘

-श्रीमद्भागवत गीता

Happy Birthday lord Krishna!

हो ना नाउम्मीद

कभी सब हाथ छूटने लगे,

रिश्ते टूटने लगे।

झड़ते पत्तों सी गिरती-बिखरती लगे ज़िंदगी,

हो ना नाउम्मीद।

हौसला रख।

सब्र कर।

पतझड़ आता हैं।

फिर बहारें भी आएँगी।

तय है कितनी भी लंबी रात हो,

सुबह आएगी।

जुबाँ

कभी कैक्टस, कभी पत्थर

बन जाती है नरम मुलायम जीभ।

कभी नर्म कभी गर्म, कभी ज़ख्म पर

मरहम सा सुकून भरा फाहा।

कभी घाव दे जाती है नाज़ुक जीभ।

कभी रिश्ते बनाती, कभी बिगाड़ती है।

कभी गुनाहगार कभी बेगुनाह निर्दोष बन जाती है।

शायद इसलिए ज़ुबान की दहलीज़ पर

लबों के पहरे होते हैं।

शायद इसलिए जुबाँ

कई दीवारों के पहरे में क़ैद रहती है।

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोये।

औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए।। ~~ कबीर

दुआओं में नाम ना होगा !

दूसरों को दर्द देने वाले को

मालूम होती है ख़ता अपनी।

क्यों जाया करना लफ़्ज इन पर?

इन्हें ना दे बद-दुआ, पर तय है

दुआओं में नाम ना होगा इनका।

जब कोई चोट और दर्द दे कर,

अपनी हीं तकलीफ़ का राग सुनाता है,

तब एक पुरानी कहावत याद आती है –

सूप बोले तो बोले, चलनी बोले जिसमें सौ छेद।

Psychological Fact – One may end up feeling exhausted, depressed, anxious, frustrated, and physically sick when Toxic people act as a victim.

अजब नशा

शराबखाने से ज़्यादा,

इश्क़ औ आँखों के नशे से बढ़ कर

जो ना टूटे वो अजब नशा है यह।

संभल कर कदम बढ़ाना सीढ़ियों पर

सोशल मीडिया के।

Psychological fact of social media addiction-

Using social media can lead to physical and psychological addiction because it triggers

the brain’s reward system to release

dopamine, the “feel-good” chemical.

ख्वाहिशें तो अनंत हैं!

क्यों आज़ लोग खुश और संतुष्ट नहीं?

क्यों लोग स्वयं को नहीं, दूसरों को देख रहें हैं?

आध्यात्मिक-मानसिक प्रगति से दूर,

भाग रहें हैं भौतिक प्रगति की ओर।

पर है स्वयं के गोली-बारी, हिंसा से लहू-लुहान।

गीता ने सदियों पहले बताया,

जो तुम्हारे पास है उसमें संतुष्ट, ख़ुश रहना सीखो,

क्योंकि ख्वाहिशें तो अनंत हैं।

सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः।

मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे प्रियः।।12.14।।

अर्थ- संयतात्मा दृढ़निश्चयी योगी सदा सन्तुष्ट है।

जो अपने मन और बुद्धि को मुझमें अर्पण किये हुए है?

वह मुझे प्रिय है। (भगवद् गीता अध्याय 12 श्लोक 14)

Salman Rushdie Stabbed In Neck At New York Event, Taken To Hospital. https://www.ndtv.com/world-news/author-salman-rushdie-attacked-on-stage-at-an-event-in-new-york-news-agency-pti-3249899/amp/1