दुआओं में नाम ना होगा !

दूसरों को दर्द देने वाले को

मालूम होती है ख़ता अपनी।

क्यों जाया करना लफ़्ज इन पर?

इन्हें ना दे बद-दुआ, पर तय है

दुआओं में नाम ना होगा इनका।

जब कोई चोट और दर्द दे कर,

अपनी हीं तकलीफ़ का राग सुनाता है,

तब एक पुरानी कहावत याद आती है –

सूप बोले तो बोले, चलनी बोले जिसमें सौ छेद।

Psychological Fact – One may end up feeling exhausted, depressed, anxious, frustrated, and physically sick when Toxic people act as a victim.