IIT-Madras student’s suicide: Fathima’s father demands fair prob

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According to WHO data, the age standardized suicide rate in India is 16.4 per 100,000 for women (6th highest in the world) and 25.8 for men (ranking 22nd).

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IIT मद्रास की छात्रा फातिमा लतीफ की खुदकुशी

फातिमा लतीफ (Fathima Latif) के परिवारवाले इसे आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या मान रहे हैं. उन्हें आरोप लगाया कि इसमें IIT मद्रास के ही एक प्रोफेसर का हाथ हो सकता है, जो कथित रूप से उसके अलग धर्म के कारण उसके साथ भेदभाव करता था चेन्नई. IIT मद्रास की छात्रा फातिमा लतीफ (Fathima Latif) की खुदकुशी (Suicide) का मामला लगातार उलझता जा रहा है. किसी को ये यकीन नहीं हो रहा है कि फातिमा ने खुदकुशी कर ली. परिवारवाले इसे आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या मान रहे हैं. उन्हें आरोप लगाया कि इसमें IIT मद्रास के ही एक प्रोफेसर का हाथ हो सकता है, जो कथित रूप से उसके अलग धर्म के कारण उसके साथ भेदभाव करता था. बढ़ते दबाव के चलते अब कॉलेज प्रशासन ने केंद्रीय अपराध शाखा को जांच की जिम्मेदारी दी है.

 

The family of Fathima Latheef has alleged that the 18-year-old, who was found hanging in her hostel room at the Indian Institute of Technology (IIT), Madras, killed herself after facing harassment from a faculty member.

A suicide note retrieved from her phone says “her teacher is the reason for her death”, her father Abdul Latheef said at a press meet here on Tuesday.

Rank holder

Fathima, a first-year student of humanities and a rank holder, joined the IIT in July 2019 and was found dead in her room on Saturday.

Dead student’s family points the finger at IIT teacher
Note from victim’s phone says teacher is reason for death’

 

news in detail

4 thoughts on “IIT-Madras student’s suicide: Fathima’s father demands fair prob

  1. ये बहोतही सिरीयस बात है. देशमे जिस तरह धर्मवाद को बढावा दिया जा रहा है उसीके कारण ऐसी घटनाए होनेकी संभावायें बढती है.

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    1. यह बहुत दुखद है और सीरियस बात है। अगर यह दुर्घटना धर्म प्रेरित है, तब यह हम सबों के लिए शर्मिंदगी और दुख की बात भी है। एक तरफ हम “लड़की पढ़ाओ” की बात करते हैं और दूसरी तरफ एक जीनियस, होनहार, बुद्धिमान लड़की के साथ ऐसी घटना होती है।
      और अगर यह आत्महत्या है तब भी यह बेहद अफसोस जनक है। अच्छे शिक्षण संस्थानों में बच्चे किसी कारणवश इतने मानसिक दबाव में हैं कि वे आत्महत्या कर ले। यह भी बेहद शर्मिंदगी भरी गंभीर समस्या है
      ।लड़कियों में आत्महत्या के आंकड़े हमारे देश में बहुत ज्यादा है। इसके लिए गंभीर चिंतन मनन और सुधार की जरूरत है।

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