कविता एक दर्पण -सौंदर्य

यह सच है कि

काव्य ……कविता …

एक दर्पण है,

जो विकृत को भी सुंदर बना देती है .

पर दरअसल ख़ूबसूरती तो

देखने वालों के नज़र में होती है .

यह तो अपना नज़रिया है

कि हम क्या देखना चाहते हैं.

वरना कड़वाहट, कटुता भरी

कविताएँ भी रची जाती हैं.

Poetry is a mirror which makes beautiful that which is distorted.

Percy Bysshe Shelley

27 thoughts on “कविता एक दर्पण -सौंदर्य

  1. waaah badhiya

    वरना कड़वाहट, कटुता भरी

    कविताएँ भी रची जाती हैं.

    kal maine ek aiseee he kavita padhi ek blogger ki …maine comment kiya “Neeras rachana nahi hai bhai” ….mohtarma भड़क gai … 🙂 🙂

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      1. haha , bhari spelling mistake ho giya..ekdum bawaal …apun neeras saras me confuge ho gaya
        haha 🙂
        sahi hai ty 🙂 dost 🙂

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  2. जी बिल्कुल कविता एक दर्पण है।
    हो सकता है किसी को नीरस किसी को सरस् लगे,
    किसी को कड़वाहट भरी
    तो किसी को मीठा लगे।
    सत्य सबको पसन्द नही
    झूठ मिश्री सा मीठा लगे।

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    1. आभार मधुसूदन मेरी कविता की प्रशंसा और इतनी अच्छी व्याख्या के लिए.

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