रहगुज़र से गुज़र कर

रहगुज़र से गुज़र कर

ख़्वाबों तक जाने में

चाँद मिला राहों में .

कहा उसने –

आसमान छूने की कोशिश कर.

अगर राह मुकम्मल ना भी हुई

सपनों के दुनिया की.

कम से कम अपने को

सितारों के बीच तो पाओगे.

16 thoughts on “रहगुज़र से गुज़र कर

    1. बिलकुल सही. अगर लक्ष्य ऊँचा रखा जाए तो ऊँचाइयों तक पहुँचा जा सकता है.

      Like

Leave a reply to Girija Jandu Cancel reply