क्या रहने वाला मकान ख़ाली कर गया? July 1, 2019 Rekha Sahay दिल का कोना कभी ख़ाली ख़ाली सा लगता है. कभी आबाद , कभी वीरान सा लगता है. क्या वहम है हमारा ? या रहने वाला मकान ख़ाली कर गया? Rate this:Share this: Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Click to share on Pinterest (Opens in new window) Pinterest Click to share on Tumblr (Opens in new window) Tumblr Click to share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn Click to share on Pocket (Opens in new window) Pocket Click to share on Reddit (Opens in new window) Reddit Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on Telegram (Opens in new window) Telegram Like Loading... Related
कविता के भाव समझने के लिए दिली आभार. यादें ही यादें …. ख़ुशियाँ भी देती हैं और तकलीफ़ भी. LikeLiked by 1 person Reply
Will you please share the link of your new blog once again as I am unable to reach. LikeLiked by 1 person Reply
अपनो को रहने के लिए मकान नहीं घर चाहिए होता है dear अपने दिल के कौने में तलाश करो शायद कही छुपकर बैठा हो LikeLiked by 2 people Reply
शुक्रिया गिरिजा इस प्यारे से जवाब के लिए . घर , मकान सब तलाश लिया. नहीं मिला. हाँ दिल के हर कोने में यादों ने ज़रूर घर बना लिया है. LikeLiked by 2 people Reply
दिल का ख़ाली कोना तो यादों से ही आबाद होता है रेखा जी । पंकज उदहास जी की गाई हुई मशहूर ग़ज़ल -‘दीवारों से मिलकर रोना अच्छा लगता है’ का एक शेर है : दुनिया भर की यादें हमसे मिलने आती हैं शाम ढले इस सूने घर में मेला लगता है LikeLiked by 1 person Reply
बहुत ख़ूब !!! सही है, यादें हमेशा साथ निभातीं हैं. बहुत शुक्रिया जितेंद्र जी . LikeLiked by 1 person Reply
रहने वाला मकान खाली कर सकता है पर उसकी यादें ……
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कविता के भाव समझने के लिए दिली आभार.
यादें ही यादें …. ख़ुशियाँ भी देती हैं और तकलीफ़ भी.
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deepshanti.WordPress.com
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Thanks dear.
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Welcome 😊
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hi deepshanti, isse bhi nhi mila.
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sorry, i got it. thanks
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अपनो को रहने के लिए मकान नहीं घर चाहिए होता है dear अपने दिल के कौने में तलाश करो शायद कही छुपकर बैठा हो
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शुक्रिया गिरिजा इस प्यारे से जवाब के लिए . घर , मकान सब तलाश लिया. नहीं मिला. हाँ दिल के हर कोने में यादों ने ज़रूर घर बना लिया है.
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बहुत हि गहरी पंक्तियाँ है🙏😊
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शुक्रिया , मन की गहराइयों से निकली बातें हैं.
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बस इसी वजह से लोगों के मन की गहराईयों को छु रही है💐😊
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बहुत आभार.
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दिल का ख़ाली कोना तो यादों से ही आबाद होता है रेखा जी । पंकज उदहास जी की गाई हुई मशहूर ग़ज़ल -‘दीवारों से मिलकर रोना अच्छा लगता है’ का एक शेर है :
दुनिया भर की यादें हमसे मिलने आती हैं
शाम ढले इस सूने घर में मेला लगता है
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बहुत ख़ूब !!!
सही है, यादें हमेशा साथ निभातीं हैं.
बहुत शुक्रिया जितेंद्र जी .
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