Life

Life always waits

              for some crisis

                            to occur,

                                   before……

                                           revealing itself.

 

 

~~Paulo  Coelho 

काल चक्र

जिंदगी के हसीन  पलों को

कितनी  भी बार कहो – थम जा !!

पर यह कब रुकता है?

पर दर्द भरे पलों का

बुलाअो या ना बुलाअो,

लगता है यह खिंचता हीं चला जा रहा है………

पता नहीं समय का खेल है या मन का?

पर इतना तो तय है –

वक्त बदलता रहता है………….

यह काल चक्र चलता रहता है।

जैसा भी समय हो,    बीत हीं जाता है ……….

 

 

 

Our Greatest strength

Our greatest

strength lies

in the

gentleness

and

tenderness

of our heart.

 

❤ Rumi

My mind

Go slow my mind,

everything happens at its own pace.

The gardener may water with a hundred pots,

but the fruit will appear only in its season.

 

❤ Kabir

जीवन के रंग 28 – भीङ में तन्हाई

खामोशी में शब्द

मौन में अर्थ

अंधेरे में उजाला

कोलाहल में शांती

शोर में संगीत

दुख में सुख

आँसू में मुस्कान

इंद्रधनुष के सात रंगों  में सफेद रंग

भीङ में तन्हाई

मौत में जीवन

खोजना

क्या सरल है ?

इतनी गहराई आ जाये……

तब जिंदगी से शिकवा हीं ना रह जाये…….

self worth

Sometimes you need to walk away,

not to make someone else realize-

how worthy you are,

but for you to understand

and acknowledge your own self worth.

 

 

~Anonymous

I found myself

Doing as others told me, I was blind.

Coming when others called me, I was lost.

Then I left everyone, myself as well.

Then I found everyone, myself as well.

 

❤ Rumi 

यह सच है

 

यह सच है 

अँधेरे में अपनी परछाईं भी साथ छोङ जाती है,

पर कुछ अपनों की पहचान हो जाती है।
अौर
कुछ अपने बनने वालों की सच्चाई  सामने आ जाती है।

हिन्दी दिवस (हिंदी सप्ताह ) Hindi Divas (Devanagari)

शुभकामनाएँ

“हिन्दी दिवस” – 14 सितंबर के शुभ अवसर पर सभी   को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।

 

Happy  Hindi Divas (Day) ! It is  celebrated on 14 September

 

यह गर्व की बात हैं कि  हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा है. इसकी विशेषताएं हैं

1. जो लिखते हैं ,वही पढ़ते हैं और वही बोलते हैं.

2.  उच्चारण सही हो, तब सुन कर लिख सकते हैं.

3. वाक्य सम्बोधन  बड़े या छोटे के लिये अलग अलग होते हैं. जैसे आप ,तुम.

4. वाक्य शुरू करनेवाले  विशेष अक्षर ( capital ) नहीँ     होते.

  वैज्ञानिक कारण

 अक्षरों का वर्गीकरण, बोली  और उच्चारण के अनुसार हैं. “क” वर्ग  कंठव्य कहे जाता हैं , क्योंकि इसका कंठ या गले से हम उच्चारण करते हैं.बोलने के समय जीभ गले के ऊपरी भाग को छूता हैं. बोल कर इसे  समझा जा सकता हैं.

क, ख, ग, घ, ङ.

इसी तरह “च ” वर्ग के सब अक्षर तालव्य कहलाते हैं.इन्हें बोलने के  समय जीभ तालू  को छूती है ।

च, छ, ज, झ,ञ

    “ट”  वर्ग मूर्धन्य कहलाते हैं. इनके  उच्चारण के समय जीभ  मूर्धा से लगती  है ।

ट, ठ, ड, ढ ,ण

त ” समूह के अक्षर दंतीय कहे जाते हैं. इन्हें बोलने के  समय जीभ दांतों को छूता हैं.

त, थ, द, ध, न

“प ” वर्ग ओष्ठ्य कहे गए, इनके  उच्चारण में दोनों ओठ आपस में मिलते  है।

प , फ , ब ,भ , म.

इसी तरह दंत ” स “, तालव्य  “श ” और मूर्धन्य “ष” भी बोले और लिखे जाते हैं.

जिंदगी के रंग – 27

बेचैन लहरें किनारे पर सर पटकती,

कह रहीं हैं – ये सफेद झाग, ये खूबसूरत बुलबुले

बस कुछ पल के लिये हैं।

जिंदगी की तरह……

बीत रहे वक्त अौ लम्हे को…..

जी लो जी भर के।