Accept your dear ones , as they are !!!!
आज कहीं कुछ पढ़ते हुए,
बरसों पुरानी अपनी ही बोली कुछ पंक्तियां याद आ गई –
मेरी तुलना ना करो कोई…….
जैसी हूँ बस मैं ऐसी ही हूँ !!!!!
मुझे कविता से कहानी बनाने
या
सुबह के सूरज के बदले, दिन का दमकता सूरज बनने ना कहो।
जैसी हूं वैसे ही रहने दो।
इतने सालों बाद अपनी ही बातों
की गहराई अब समझ आती है …..
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