मेरा ब्लॉग -नरेटिवे ट्रांसपोटेशन या परिवहन कल्पना My Blog-Narretive Transportation


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About the name of my blog – 

     Narrative transportation theory proposes that when people lose themselves in a story  or write-up,  their attitudes and intentions change to reflect that story.

          According to Psychology this theory can be used to explain the persuasive effect of what    people read. Stories, poetry and write-ups may have a huge influence on  the readers mind .

 मेरे ब्लॉग के नाम के विषय में –

मेरे ब्लॉग का नाम नरेटिवे ट्रांसपोटेशनया परिवहन कल्पना है। यह  नाम कुछ अलग सा है। इसलिए मैं इस बारे में कुछ बातें करना चाहूंगी। कभी-कभी हम किसी रचना को पढ़ कर उसमें डूब जाते हैं। उसमें खो जाते हैं। उस में कुछ अपना सा लगने लगता है।  ऐसी कहानी या गाथा जो आप को अपने साथ बहा ले जाये। हमारा मन  उसमें ङूब जाये  । इस प्रभाव को   कथा परिवहन अनुभव  या  नरेटिवे ट्रांसपोटेशन कहते हैं।  यह एक मनोवैज्ञानिक सिद्धांत है। 

मैं चाहती हूँ कि मेरी रचनाओं को पढ़ने वाले पाठक भी ऐसा महसूस करें। इसमें हीं मेरे लेखनी की सार्थकता है। शब्दों का ऐसा मायाजाल बुनना बहुत कठिन काम है। फिर भी मैं प्रयास करती रहती हूँ। अगर मेरा यह प्रयास थोड़ा भी पसंद आए। तब बताएं जरूर। यह मेरा हौसला बढ़ाएगा।

मौसम के साथ उङते प्रवासी परिंदे- कविता Migratory birds – Poem

Research reveals that global warming is compelling birds into early migration. Migrating birds are arriving at their breeding grounds earlier as global temperatures rise.

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मौसम के साथ उङते रंग- बिरंगे परिंदे,
कुदरत के जादुई रंगों के साथ,

जहाँ का मौसम माकूल – माफिक हो 

वहीं चल देते हैं। 

हमारी तरह बंधनों से बंधे नहीं हैं। 

ये बंधनों से ऊपर, घुमक्कड़  बंजारों से।

थके,-हारे, हजारों मीलों से उङ कर आते हैं।

हम आशियाना  अौर समाज के बंधन से बंधे लोग

इन की प्राकृतिक जीवन को समझे बिना।

नैसर्गिक सृष्टि के नियम से छेङ-छाङ कर,

इन्हें तकलीफ पहुँचाते हैं। 

शब्दार्थ- Word meaning

घुमक्कड़, बंजारा – gypsy

माकूल,  माफिक – suitable

कुदरत,सृष्टि – nature,

सृष्टि – Creation

नैसर्गिक – Natural

प्रवासी – Migratory

Image from internet.

Images courtesy  Chandni Sahay.

विज्ञान की नई खोज- किमेरा भ्रूण(chimera embryos -growing spare human organs in other animals)

Scientists Create First Human-Pig Chimeric Embryos  – Researchers may one day overcome the problem of organ shortages for transplantation by growing spare human organs in other animals. A group led by scientists at the Salk Institute for Biological Studies has taken the first big step toward making this a reality  (on January 26 , 2017 ) in Cell, they report having grown the first human-pig chimeric embryos.

हर साल दुनिया में हजारों लोगों की मृत्यु मानव अंगों की कमी की वजह से होती हैं। लगभग हर दस मिनट में  एक न एक व्यक्ति  अंग प्रत्यारोपण के लिए  प्रतीक्षा सूची में जोड़ा जाता है और हर दिन, उस सूची में 22 लोगों को अंग की जरूरत पूरी नहीं होने से  मर जाते हैं।

कैलिफोर्निया में सॉल्‍क इंस्‍टीट्यूट फोर बायलॉजिकल स्‍टडीज, अमेरिका के वैज्ञानिकों ने  सुअरों के अंदर इंसानी अंग उगाने के प्रयोग कि‍या हैं । 26 जनवरी, २०१७ को   वैज्ञानिकों ने एक उल्लेखनीय घोषणा की ।  वे पहली बार सफल मानव पशु संकर बनाने में सफल हुए हैं। पहला मानव-सुअर संकर भ्रूण प्रयोगशाला में बनाया गया है।  अभी प्रयोग शुरुआती दौर में है। पर वैज्ञानिकों  विश्वास है कि एक दिन प्रयोगशाला में मानव अंग  विकसित  अौर प्रत्यारोपित किये जा सकगें।

इस प्रक्रिया के तहत मरीज के ही शरीर की मूल कोशिकाओं को सूअर  के शरीर में विकसित किया जा सकेगा। एक बार अंगों के विकसित हो जाने पर उसे मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट  किया जा सकता है। ये अंग मरीज की अपनी कोशिकाओं से विकसित होने केी वजह से शरीर द्वारा स्वीकार किए जाने की ज्यादा संभावना रहेगी ।

 

 

 

 

 

Image from internet.

 

 

रेत के कण ( कविता ) #LessonOfLife


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क्या रेत के कणों को देख कर क्या

यह समझ आता है कि कभी ये

किसी पर्वत की चोटी पर तने अकडे

महा भीमकाय चट्टान होंगे
या कभी

किसी विशाल चट्टान को देख कर मन

में यह ख्याल आता है कि समय की

मार इसे चूर-चूर कर रेत बना देगी?

नहीं न?

इतना अहंकार भी किस काम का?

तने रहो, खड़े रहो पर विनम्रता से।

क्योंकि यही जीवन चक्र है।

जो कभी शीर्ष पर ले जाता है और

अगले पल धूल-धूसरित कर देता है।

शब्दार्थ- Word meaning

रेत -Sand

कण-Particles

पर्वत की चोटी – the top of the mountain

भीमकाय चट्टान – giant rock

चूर-चूर – Shattered

अहंकार – narcissism , Ego, high-and-mighty

विनम्रता- politeness, humbleness

जीवन चक्र- Life Cycle

शीर्ष – Top

What is the best lesson that life has taught you so far? #LessonOfLife

Source: रेत के कण ( कविता )

जो गिनती में नहीं हैं-कविता

Pune civic polls: At 56, she waits to walk with pride, sporting blue ink on finger
Namira Shaikh, along with 43 other sex workers, will receive their voter identity cards on January 25, National Voters’ Day. ( News -The Indian Express ,PUNENewsLine Tuesday January  24, 2017)


IndiChange - Harnessing the collective power of blogging to fight evil.

उनका क्या जो गिनती में नहीं  हैं,

पुत्री, पत्नी या वधु नहीं मात्र नगरवधु है।

पण्यै: क्रोता स्त्री ( रुपया देकर आत्मतुष्टि के लिए खरीदी गई नारी),

वेश्या, गणिका, वारवधू, लोकांगना, नर्तकी कह

शतकों से प्रेयशी – रक्षिता बन ,

मन बहलाती रही।

उस का  प्रवेश निषिद्ध क्यों सभ्य समाज में ?

जीवन-मृत्यु में उसकी गिनती  हीं नहीं।

चलो, उन्हें गिनने का, ऊपर   उठाने का विचार तो आया।

शब्दार्थ – word meaning

वेश्या, गणिका, वारवधू, लोकांगना,रक्षिता,नगरवधू, पण्यै: क्रोता स्त्री- रुपया देकर आत्मतुष्टि के लिए खरीदी गई नारी -Prostitute.

शतकों –  Centuries.

प्रवेश निषिद्ध -No entery.

सभ्य समाज -Civilised society.

Image courtesy – internet.

धुंध- जिंदगी के रंग- 11(कविता) A Tributes -poetry

Etah road accident: School bus collides with truck killing over 20 school kids, dozens injured.( 19th January, 2017)

palash

राह चलते-चलते ,

सामने धुंध छा गया।

धुंधली राह में ङगर खो गया।

हँसते- खिलखिलाते नन्हें-मुन्ने भी

खो गये कोहरे की चादर में।

रह गये बिखरे नन्हें जूते, किताबें, स्कूल बैग…….

जाते हुए शिशिर अौर

आते हुए वसन्त ने पलाशों को खिला दिया।

जैसे ‘जंगल में आग’ लगा दिया।

पर ये फूल से नन्हें-मुन्ने  समय से पहले मुरझा क्यों गये?

आग बनने से पहले, राख में खो गये।

रह गये ‘टेसू के आग’ से टीस दिलों में………

शब्दार्थ- Word meaning

जंगल की आग,टेसू, पलाश – flower known as flame-of-the-forest, bastard teak.

शिशिर -Winter Season

वसन्त – Spring Season

टीस – twinge, suffering, pain, misery, ache.

Images from Internet.

  सपने – कविता #Dream – Poetry


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सपने तो सपने है

        कभी हँसाते , रूलाते , डराते , जगाते,

              जाने अनजाने सपने .

                     फ़िर भी  सपने तो सपने है.

                           पर बेहद अपने है.

                                   हाँ , कभी कभी देर से सही 

                                           पूरे होते हुए भी देखा है इन्हे .

क्या आप विश्वास करेंगे ?

          कभी किसी ने

               अपने मौत की ख़बर और वजह 

                    मुझे सपने में जो बताई 

                         आँसू भरी आँखों से !

                                 कुछ दिनो बाद  उसे सच होते सुना……..

(यह मेरे जीवन की एक सच्ची  घटना है. बड़ी जद्दोजहद और सोंच विचार  के बाद कविता का रुप दे सकी हूँ. )

IndiSpire topic –

Have you ever seen an interesting or strange dream? Have any of such dreams come true? Do you try to figure out the meaning of your dreams?

Kahaani 2: Some Incidents in Childhood Can Haunt Every Facet of One’s Life for Decades to Come

 

Kahaani 2 is really hitting hard on the issue of child abuse and it’s life long impact on the personality of the person. Such things distort the personality and self-esteem. POSCO Act  is a law for protection of children from sexual offences .  Thanks Kahaani 2 for spreading awareness.

**Caution: Spoilers Ahead***

Ye raatein nayi purani, aate jaate kehti hai koi kahaanii sings Lata Mangeshar’s silvery voice in the background as Vidya Sinha writes in her diary, reliving past days filled with laughter and contentment, with her wheelchair-bound daughter, Mini. The sunny day in the sleepy little town of Chandan Nagar pulls you in as mother and daughter cook, laugh and cheat over a game of ludo. Vidya feels that things are falling into place after years. You find her admission of wanting to write in her diary after a long time cryptic, but you leavePlease click here to continue reading

मानवता – कविता #beingtrulyhuman-Poem


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साम्राज्य  छोङ बुद्ध   ने कहा-

मानवता हित अौर सेवा सबसे ऊपर

हम भूले, विश्व में फैला बुद्धत्व।

ईशु ने  दिया  विश्व शांति,  प्रेम और  सर्वधर्म   सम्मान संदेश।

कुरआन ने कहा  जहाँ मानवता वहाँ अल्लाह।

गीता का उपदेश- कर्मण्यवाधिकारस्ते मा……

– निस्वार्थ  कर्तव्य पालन करो।

कर्ण ने सर्वस्व अौर दधिची  ने किया अस्थि दान ,

कितना किसे याद है, मालूम नहीं।

मदाधं  मानवों की पशुवत पाशविकता जाती नहीं।

मानव होने के नाते, हमारे पास ज्ञान की कमी नहीं।

बस याद रखने की जरुरत है,

पर हम ङूबे हैं झगङे में – धर्म, सीमा, रंग , भाषा……..

हम ऊपरवाले की सर्वोत्तम कृति हैं !

कुछ जिम्मेदारी हमारी भी बनती है।

 

Topic of Indispire –

What would be your idea of an evolved human being? #beingtrulyhuman

 

Image from internet.

तितलियों के देश में – बालकथा (Land of butterfly-story for children)


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नन्ही चाँदनी अपने खुबसूरत बगीचे में , बङे-बङे गेंदे अौर ङालिया के फूलों को निहार रही थी। गुलाबी जाङे में बगीचा खुशबूदार, रंगीन अौर ताजे फूलों से भरा था। हर क्यारी में अलग-अलग तरह के सुंदर फूल हवा के झोंकों के साथ झूम रहे थे। साथ हीं उन पर मंङरा रहीं थी रंगबिरंगी तितलियाँ।
चाँदनी, रेङ्ङी माली भईया से रोज कहती- “ ङालिया के फूलों को अौर बङा करो ना भईया”, अौर वह हँस कर कहता- “ हौब्बे नहीं करेगा – होगा हीं नहीं”। उसकी बातें सुन चाँदनी खिलखिला कर हँस पङती थी। उसे माली भईया की अटपटी हिंदी सुन कर बङा मज़ा आता था। उसके साथ खङी उसकी चिक्की दीदी दोनों की बातें सुन कर मुस्कुरा देती थी।

चिक्की दीदी को बगीचे में काम करना बङा पसंद था। इसलिये माली भईया के कुछ दिनों के लिये घर जाने पर, मम्मी ने यह काम उसे सौंप दिया था। आजकल हर शाम चिक्की दीदी बगीचे में पाईप से पानी ङालती। चाँदनी भी दीदी की मदद करती। फिर दीदी फूलों पर दवा अौर खाद स्प्रे करती। माली भईया घर से वापस लौटे तो हैरानी से बोल पङे – “ अरे, ङालिया के फूल तुम्हारे चेहरे से भी बङे कैसे हो गये ? तुमने जादू कर दिया क्या”? चाँदनी हँस पङी।
चाँदनी को तितलियों के पीछे दौङने में बङा अच्छा लगता था। अभी भी, चाँदनी की बङी-बङी आँखे, खुबसूरत रंगबिरंगी तितलियों का पीछा कर रही थीं। वह उनसे दोस्ती करना चाहती थी। इसलिये वह उन्हें पकङने के लिये उनके पीछे भागती रहती थी।

आज भी वह बङी देर तक उनके पीछे दौङती- भागती रही। पर वे तितलियाँ पकङ में हीं नहीं आ रहीं थीं। तभी उसकी नजर गुलाबों की क्यारी पर पङी। एक बङे-बङे पंखों वाली प्यारी, सुंदर सी तितली बङे आराम से गुलाबी गुलाब का रस पी रही थी। चाँदनी दबे पैर तितली के पास, पीछे से पहुँची। उसने धीरे-धीरे , चुपके से अपनी नन्हीं अंगुलियों से तितली के रंगीन परों को पकङ लिया। तितली बङे जोरों से पंख फङफङाने लगी। चाँदनी ङर गई। घबङा कर उसने तितली को छोङ दिया। तितली बङी तेज़ी से दूर आकाश में उङ गई।

अब तक चाँदनी तितलियों के पीछे भागती – भागती थक गई थी। पकङ में आई तितली के उङ जाने से वह उदास भी हो गई थी। उसके बाग में एक कटे पेङ का तना दो पत्थरों पर रख कर बेंच जैसा बना था। वह उस पर जा बैठी। फिर बगीचे में लगे छोटा से झूले पर जा कर आराम से बैठ गई।

झुले के पास के छोटे से पानी के टैंक में कमल का नीला फूल खिला था। उसमें बहुत सी छोटी -छोटी काली मौली मछलियाँ तैर रहीं थीं। टैंक के चारो अोर गुच्छे- गुच्छे फ्लौक्स के रंग- बिरंगे फूल खिले थे। चाँदनी मछलियों को देखती हुई झूला झूलने लगी।

तभी, उसने देखा, बगीचे वाली खुबसूरत, बङे-बङे पंखों वाली तितली नीले कमल के फूल पर आ कर बैठ गई अौर सुबक-सुबक कर रोने लगी। चाँदनी ने तितली को आवाज़ दे कर पूछा – “ तुम रो क्यों रही हो”। तितली ने जवाव दिया – “ मेरा नाम मोनार्क है। मुझे मेरे देश से निकाल दिया गया है”। “क्यों” – चाँदनी पूछ बैठी। सुबकते हुए तितली ने कहा – “ क्योंकि, तुम्हारे पकङने से मेरे पंखों के रंग निकल गये “। इसलिये तितलियों के देश की रानी ने मुझे निकाल दिया”।

चाँदनी को अपनी गलती पर पछतावा होने लगा।मन हीं मन उसने सोंचा , अब वह कभी तितलियों को पकङ कर परेशान नहीं करेगी। उसकी नजरें अपनी अंगुलियों पर पङी। सचमुच उसकी अंगुलियों पर तितली के पंख के रंग लगे थे। उसने मोनार्क को अपनी अंगुलियों पर लगे रंग का धब्बा दिखाया। मोनार्क खुशी से बोल पङी, “अरे मेरे रंग तो सुरक्षित हैं। मैं इन्हें वापस ले सकती हूँ । तुम अपनी अंगुलियों को फिर से मेरे परों पर धीरे से रखो”।
चाँदनी ने वैसा हीं किया। मोनार्क अपने पंखों को हौले से चाँदनी की अंगुलियों पर रगङने लगी अौर सचमुच रंग पंखों पर वापस आ गये। मोनार्क अौर चाँदनी खुशी से खिलखिला कर हँसने लगी।

मोनार्क ने वापस जाने के लिये पंख फङफङाये अौर कहा – “चाँदनी अपनी आँखे बंद करो”। चाँदनी ने जब आँखें खोली तब हैरान रह गई। वह ढेरों तितलियों के बीच, उनके देश में थी। मोनार्क ने चाँदनी को तितलियों के पूरे जीवन चक्र के बारे में बताया अौर दिखाया, कैसे पत्तों पर वे अपने अंङे सुरक्षित रहने के लिये चिपका देतीं हैं। जिनसे लार्वा निकलता है। वह कुछ दिनों में वह प्युपा बन पेङ के तनों पर लटक जाते हैं अौर समय आने पर इन प्युपा का कायापलट हो जाता है। ये खुबसूरत तितलियों के रुप में अपने झिल्ली से बाहर आ जाते हैं। चाँदनी, आश्चर्य के साथ सारी बातें सुन रही थी।

life-cycle

फिर मोनार्क उसे अपनी रानी तितली के पास ले गई। रानी तितली ने चाँदनी को मोनार्क के रंगों को लौटाने के लिये धन्यवाद दिया । उसने चाँदनी को तोहफे में एक सुंदर पीला गुलाब दिया। तभी चाँदनी ने मम्मी के पुकारने की आवाज सुनी। उसने चौंक कर देखा। मम्मी उसे जगा रहीं थीं। वह शायद झूला झूलते हुए सो गई थी। तभी उसकी नजर झूले पर पङे पीले गुलाब पर पङी। वह सोंच में पङ गई, यह सपना था या सच्चाई? फिर उसने मन हीं मन सोंचा, जो भी हो अब वह तितलियों को कभी नहीं सतायेगी।

(बच्चों की अपनी एक   काल्पनिक दुनिया  (fantasy land) होती है।  इसलिये बाल मनोविज्ञान को समझते हुए , कहानी के माध्यम से  बच्चे बातें ज्यादा अच्छी तरह समझते हैं। यह कहानी बच्चों  को तितलियों के जीवन चक्र की जानकारी देती  है। साथ हीं यह बच्चों को  सह्रिदयता  का पाठ पढ़ाती है)

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