
हौसला



दुनिया में कालिमा भरे ऐसे भी हैं लोग शातिर।
जो दूसरे के मनोभाव पढ़ने में होतें हैं माहिर।
ये होते हैं महज़ लोगो को इस्तेमाल करनेवाले,
और झूठी हमदर्दी दिखाने वाले साहिर।
किसी के दर्द को महसूस करने में ये होतें हैं सिफ़र।
विडंबना है स्वार्थ और तम में डूबे इन्हें नहीं खबर ।
क्या है अपनापन और स्नेह भरा जीवन सफ़र।
अर्थ –
साहिर- टोने टोटके करने वाला।
सिफ़र- शून्य।
understanding human behaviour!
DARK EMPATH – A dark empath is a
dangerous personality type. A dark
empath is someone who uses cognitive
empathy at the expense of others,
often for personal gain. They can
recognize someone’s situation without
sympathizing with them.

अजब है नज़ारा जरा गौर कर।
ख़ुद से जुनूनी प्यार पर,
औरों से जरा ज़रा सी बातों पर
क्यों लोग है ख़फ़ा-ख़फ़ा?
अपने दिल को पढ़,
ज़िंदगी से गिला तो नहीं?
कहीं ख़ुद से ख़फ़ा तो नहीं?
नाराज़गी और राज़ी होना है हमारी फ़ितरत।
पर क्यों नाराज़गी उतारें औरों पर?
सोंचिये जरा, इंसानों के इस रवईये से
ग़र ख़ुदा सीख, ख़फ़ा हुआ इंसानों से
तो क्या होगा?
Narcissism is increasing in modern
societies, specially in West and
referred to as a “narcissism epidemic.
The endorsement rate for the statement “
Narcissism – a person who has an excessive
interest in or admiration of themselves.who
think the world revolves around them.

आफ़ताब से आँख मिलाने की कोशिश ना कर
रौशनी से शिकवा-शिकायत न कर।
अंधेरे को उजाला करने को
इक किरण-ए-आफ़ताब काफ़ी है।
चम्पई अंधेरा और सुरमई उजाला
रौशन करने को गज़ाला-ए-किरण…
…धूप का इक टुकड़ा हीं काफ़ी है।
अर्थ : गज़ाला -सूर्य, सूरज,
picture courtesy – Anurag Dutta

पाना है अगर मंज़िल,
राज़ रखो अपनी मंज़िल।
बढ़ाते रहो पूरे विश्वास से कदम।
ग़र ना हो राज़-ए-मक़सद रखने का दम
दिल साज़िश करने लगता है हरदम।
कम कर हौसला,
देते है एहसास ऐसा भर
जैसे पा लिया हो मंज़िल।
बिना पाये मंज़िल।
Interesting Psychological Fact – Don’t tell
everyone your goals, because it chemically
satisfies the brain and that’s similar to
completing it.
Meaning मक़सद / मंज़िल – goal.

चाँद ने सूरज को आवाज़ दे कर कहा –
ज़िंदगी की राहों में कुछ पाना,
कुछ खोना लगा रहता है।
कम ज़्यादा होना लगा रहता है।
भला या बुरा किया किसी के साथ,
उसका जवाब मिलता रहता है।
आवाज़ की गूंजें लौट कर है आती रहतीं हैं।
सागर और ब्रह्मांड का यह है फ़लसफ़ा।

खोने का डर क्यों? साथ क्या लाए थे।
क्या कभी बिना डरे जीने कोशिश की?
तब तो फ़र्क़ समझ आएगा।
इस जहाँ में आए, सब यहाँ पाए।
सब यही छोड़ जायें।
यही कहती है ज़िंदगी।
ग़र जीवन का अर्थ खोजना है।
एक बार ज़िंदगी की बातें मान
कर देखने में हर्ज हीं क्या है?
Topic by yourQuote
‘तू करता वही है , जो तू चाहता है ,
होता वही है जो मै चाहता हूँ।
तू वही कर ,जो मै चाहता हूँ ,
फिर होगा वही ,जो तू चाहता है। ‘
-श्रीमद्भागवत गीता
Happy Birthday lord Krishna!

आ कर चले जातें है लोग, वहीं जहाँ से आए थे।
पर यहीं कहीं कुछ यादें , कुछ वादे छोड़ जातें हैं।
ग़ायब बस वह एक चेहरा होता है।
जो अक्सर तन्हाईयों को छूता रहता है।
बस रह जाती हैं कुछ कहानियाँ,
सुनने-सुनाने को, आँखें गीली कर जाने को।
साजो-सामान के साथ मेहमान
विदा होतें हैं, यादें क्यों छोड़ जातें हैं?
क्यों यह रस्म-ए-जहाँ बनाई? ऐ ज़िंदगी!
तुम्हारी अपनी,
पैग़ाम-ए-हयात

होते हैं कुछ लोग
ख़ुशगवार-सुकुमार दिखते पीपल से।
दीवारों-छतों-घरों पर बिन बताए,
बिना अनुमति ऊग आये पीपल से।
नाज़ुक पत्तियों और हरीतिमा भरा पीपल।
समय दिखाता है,
इनके असली रंग।
गहरी जड़ें कैसे आहिस्ते-आहिस्ते गलातीं है,
उन्ही दरों-दीवारों को टूटने-बिखरने तक,
जहाँ मिला आश्रय उन्हें।

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