
If you find me not within you,
you will never find me.
For I have been with you,
from the beginning of me.
~~Rumi

If you find me not within you,
you will never find me.
For I have been with you,
from the beginning of me.
~~Rumi

हाथों में गर्म चाय की प्याली औ हम किताबों में गुम।
हो इश्क़ का तरन्नुम औ यादों में तुम।
तब लबों पर थिरक उठती है तबस्सुम,
और आँखों में अंजुम।
चाय, किताबें, इश्क़ और तुम
इन्ही से मिल बनें हैं हम।
अर्थ
अंजुम – सितारे; तारे।
तरन्नुम – स्वर-माधुर्य, गाना, मधुर गान, लय, अलाप।

अजब है नज़ारा जरा गौर कर।
ख़ुद से जुनूनी प्यार पर,
औरों से जरा ज़रा सी बातों पर
क्यों लोग है ख़फ़ा-ख़फ़ा?
अपने दिल को पढ़,
ज़िंदगी से गिला तो नहीं?
कहीं ख़ुद से ख़फ़ा तो नहीं?
नाराज़गी और राज़ी होना है हमारी फ़ितरत।
पर क्यों नाराज़गी उतारें औरों पर?
सोंचिये जरा, इंसानों के इस रवईये से
ग़र ख़ुदा सीख, ख़फ़ा हुआ इंसानों से
तो क्या होगा?
Narcissism is increasing in modern
societies, specially in West and
referred to as a “narcissism epidemic.
The endorsement rate for the statement “
Narcissism – a person who has an excessive
interest in or admiration of themselves.who
think the world revolves around them.

बड़ी मुश्किलों से जाना अपने-आप को,
पहचाना अपने आप को,
अपनी रूह को।
कुछ नादान कहतें हैं-
बडे अच्छे से पहचानते हैं,
जानते तुम्हें हैं।
ये ज़िंदगी में वेवजह दखल देतें हैं।
दूसरों की सीमाएँ तोड़ने वाले से दूरी है ज़रूरी।
Positive Psychology – In real life mute
unwanted people by setting clear
boundaries. Boundaries define us.

ज़िंदगी के मेले में कई मिलते हैं
कुछ दूर साथ चलते हैं।
अपनी अपनी मंज़िल की ओर
बढ़ जाते हैं,
जैसे हो दरिया का बहता पानी।
बहती नादिया रुक जाये तो
खो देती है ताज़गी और रवानी।
बढ़ते जाना हीं है ज़िंदगानी।
मंज़िल पाना है जीवन की कहानी।

आफ़ताब से आँख मिलाने की कोशिश ना कर
रौशनी से शिकवा-शिकायत न कर।
अंधेरे को उजाला करने को
इक किरण-ए-आफ़ताब काफ़ी है।
चम्पई अंधेरा और सुरमई उजाला
रौशन करने को गज़ाला-ए-किरण…
…धूप का इक टुकड़ा हीं काफ़ी है।
अर्थ : गज़ाला -सूर्य, सूरज,
picture courtesy – Anurag Dutta

ऐसा होता तो वैसा होता।
वैसा होता तो अच्छा होता।
अगर मन की बातें होतीं
कैसे मालूम कैसा होता?
कौन जाने क्या होता?
शायद यही सबसे अच्छा है?
अपने मन की बातें जाने दो।
बातें जैसी है वैसे स्वीकार कर लो,
ग़र ख़ुशियाँ और सुकून चाहिए।
Do not worry that your life is turning
upside down. How do you know the
side you are used to is better than
the one to come?
~ Rumi

उम्मीदों की शाख़ पर
आफ़ताब को गले लगाने की ज़िद्द ना कर।
महताब को पाने की ज़िद्द ना कर।
ज़िंदगी हमेशा हसीन कहानी सी हो
यह साजिद ना कर।
ज़िन्दगी कभी मिले राहों में,
उससे बातें कर।
बतायेगी, उम्मीदों की शाख़ पर, नई राह पर,
नये आरजूओं का सफ़र है ज़िंदगी।

पाना है अगर मंज़िल,
राज़ रखो अपनी मंज़िल।
बढ़ाते रहो पूरे विश्वास से कदम।
ग़र ना हो राज़-ए-मक़सद रखने का दम
दिल साज़िश करने लगता है हरदम।
कम कर हौसला,
देते है एहसास ऐसा भर
जैसे पा लिया हो मंज़िल।
बिना पाये मंज़िल।
Interesting Psychological Fact – Don’t tell
everyone your goals, because it chemically
satisfies the brain and that’s similar to
completing it.
Meaning मक़सद / मंज़िल – goal.

कमियाँ किसमें नहीं?
पर सबसे बड़ी कमी है वही,
ज़ेहन के अँधेरे को मानना सही।
कभी ख़ुद का आईना बन तो सही।
नेकनीयती से गौर कर कभी
अपनी सकारात्मक और नकारात्मक,
अच्छी और बुरी बातों की बही।
नज़रों के सामने से हटेगा कम-निगही।
अपनी होड़, अपनी स्पर्द्धा अपने आपसे कर,
ईमानदारी और प्यार से खुद का ऑडिट कर।
अच्छा-बुरा जो भी पाया उन लम्हों में
उसका हर दिन रियाज़ कर।
अर्थ- कम-निगही- short sighted
Positive Psychology- Self-acceptance is the
first step to self-mastery. Mastery of the
self comes from accepting all our flaws.
Talk To Yourself with empathy.
You must be logged in to post a comment.