हाथ पकङना साथ नहीं होता
हाथ छूटना , संबंध टूटना नहीं होता।
अकेले रिश्ते निभाये नहीं जाते,
जैसे एक हाथ से ताली बजाई नहीं जाती।
एक दूसरे के लिये इज़्जत और ईमानदारी हो तो
रिश़्तों का निभाना अौर निभना
अपने आप हो जाता है……
हाथ पकङना साथ नहीं होता
हाथ छूटना , संबंध टूटना नहीं होता।
अकेले रिश्ते निभाये नहीं जाते,
जैसे एक हाथ से ताली बजाई नहीं जाती।
एक दूसरे के लिये इज़्जत और ईमानदारी हो तो
रिश़्तों का निभाना अौर निभना
अपने आप हो जाता है……
वह सफेद लिबास में, सफेद गुलदस्ते सी थी,
घर वालों को चाहिये थी लाली वाली दुलहन।
यह शादी, मैरेज अौर निकाह के बीच का फासला
प्रेम, इश्क, लव व इबादत
सब कुछ तोङ गई।
जिस राह पर हर बार मुझे
अपना कोई छलता रहा ।
फिर भी ना जाने क्यों मैं
उसी राह ही चलता रहा।
सोंचा इस बार….
रौशनी नहीं धुआँ दूँगा।
लेकिन चिराग था फितरत से,
जलता रहा..
जलता रहा……
Anonymius
जिंदगी के सफर में
सारे इम्तहान हमारे हीं हिस्से क्यों?
नतीज़े आये ना आये ,
अगला पर्चा शुरु हो जाता है
हमने तो जिंदगी को कभी ना जाँचा ना परखा ना इम्तहान लिया,
फिर यह क्यों रोज़ नये इम्तहान लेती, परखती रहती है?
सोने की तरह कसौटी पर कस कर अौर कभी
पत्थर पर घिस कर हिना बना हीं ङालेगी शायद।
कहते हैं
रंग लाती है हिना पत्थर पर घिस जाने के बाद ……..
मुम्बई की रिमझिम वर्षा की फुहारें
गंदलाये समुन्द्र की उठती पटकाती लहरे,
आसमान से नीचे झुक आये धुंध बने बादल ,
सीकते भुट्टो की सोंधी खुशबू
देख फुहारों में भीगने का दिल हो आया. …..
बाद में कहीँ नज़र आया
टपकती झोपड़ियों में भीगते ठिठुरते बच्चे ,
यह मेह किसी के लिये मजा और किसी की सजा है.
बाहर का बरसात, अंदर आँखो के रस्ते बरसने लगा.
Image from internet.
जिंदगी ने बहुत से दर्द भरे सबक दिये,
उन्हें पन्नों पर उतारते-उतारते ,
फिर से……………
इश्क हो गया जिंदगी, कलम अौर कागज से
आप इन्हें जो चाहे कहें,
जिंदगी के रंग, जिंदगी के फलसफे, तजुर्बे या कविता……….
एक दिन ऊपर वाले ने कहा –
हर दिन कुछ ना कुछ
नये की कामना हैं तुम्हें.
कभी नया भगवान भी तो
आजमा कर देखो.
बहुत कुछ नया मिल जायेगा.
गीता और रामायण के बाद
आजकल कुरआन और बाइबल
पढ़ने लगी हूँ……
Source: गीता , कुरआन , बाइबल -कविता
The divine, eternal, and spiritual love – Krishna went to Radha to bid his farewell before leaving Vrindavan. They spent a few minutes without a word. They knew each other’s feelings. Words had little meaning to convey their love.
कान्हा ने राधा से पूछा, कहाँ है तु खोई-खोई?
क्यों तु लग रही है रोई-रोई ?
राधा ने कहा —
कुछ रिश्ते भावनाअों -एहसासों मे ङूबे होते हैं।
इसलिए निर्दोष होते हैं …
सुंदर होते हैं……
मैंने जितना तुम्हें खोजा,
जितना अधिक जाना,
उतना अौर पाना चाहा, पर पाया नहीं !
कान्हा ने कहा – इसलिये क्योकिं,
अपने दिल में तो तुने झाँका हीं नहीं……
हर मंदिर में तु ही तो होती है मेरे साथ।
राधा-कृष्ण के आध्यात्मिक रिश्ता अौर अलौकिक प्रेम की अनेकों कहानियाँ है। वृंदावन छोङने से पहले कान्हा, राधा से मिले। पर दोनों कुछ नहीं बोल रहे थे, बस चुप थे। पर मौन की भी अपनी एक भाषा होती है।
मंदिर के सामने बच्चे खेल रहे थे,
मस्जिद के सामने लङने लगे।
चर्च के सामने झगङने लगे।
पर लोग हैरान थे, मुद्दा मंदिर, मस्जिद, चर्च नहीं
एक नन्ही सी, हवा में लहराती पतंग क्यों है ? ??
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