आँसू अौर मुस्कान

 

कुछ हँस कर, कुछ रो कर झेलते हैं।

 दुःख सहने का अपना- अपना तरीका होता है।

क्या अच्छा हो, गर आँखों में आँसू  पर  होंठों पर मुस्कान हो।

 

 

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कन्या पूजन ( कविता )

मेरी पाँच कविताएँ / My 5 Poems Published in She The Shakti, Anthology– POEM 5

 

नवरात्रि की अष्टमी तिथि ,
प्रौढ़ होते, धनवान दम्पति ,
अपनी दरिद्र काम वालियों
की पुत्रियों के चरण
अपने कर कमलों से
प्यार से प्रक्षालन कर रहे थे.

अचरज से कोई पूछ बैठा ,
यह क्या कर रहें हैं आप दोनों ?

अश्रुपूर्ण नत नयनों से कहा –
“काश, हमारी भी प्यारी संतान होती.”
सब कुछ है हमारे पास ,
बस एक यही कमी है ,

एक ठंडी आह के साथ कहा –
प्रायश्चित कर रहें है ,
आती हुई लक्ष्मी को
गर्भ से ही वापस लौटाने का.

Source: कन्या पूजन ( कविता )

Image – Sundarban temple,

by Rekha Sahay.

तरीके और हथियार ( कविता )

मेरी पाँच कविताएँ / My 5 Poems Published in She The Shakti, Anthology– POEM 3

 

उसके पति ने कहा ,
सजावट की तरह रहो ,
कौन तुम्हें मदद करेगा ?
यह पुरुषों की दुनियाँ हैं.
सब के सब , कभी न कभी
ऐसे रिश्ते बनाते हैं.
अगर तुमने मेरी जिंदगी मॆं
ज्यादा टाँग अडाई ,
तब सब से कह दूँगा –
यह औरत पागल हैं.

उसने नज़रें उठाई और कहा-
सब के सब तुम्हारे जैसे नहीँ हैं.
तुम्हारे ये तरीके और हथियार पुराने हो गये ,
मुझ पर काम नहीँ करते.
हाँ , जो तुम जैसे हैं ,
वहीं तुम्हारा साथ देते हैं.

मैं नारी हूँ, रानी हूँ, शक्ति हूँ।
इसलिये शर्मिंदा होने का समय तुम्हारा हैं.
मेरा नहीँ.

आज़ के आधुनिक समय में अभी भी कुछ ऐसे लोग मिल जाते हैं , जो नारी को समानता का दर्ज़ा देने में विश्वाश नही रखते.

Source: तरीके और हथियार ( कविता )

सपने -कविता Dream

Where there is pain, the cure will come.
~ Rumi

जब छोटी थी, बङे-बङे सपने देखा करती, 

अब पहले की छोटी-छोटी बातें याद आती हैं।

खुशियों अौ गम के  खेल में यह समझ आया,

ये सब आती -जाती रहती है

 अौर

 कोई ना कोई सबक दे कर जाती हैं। 

 

नाम -कविता 

खिला खिला गुलमोहर तपिश में मोहरें लूटाता रहा…..

पूरा चाँद,  रात भर  जल कर चाँदनी बाँटता  रहा.

ना पेड़ों ने कहीँ अपना नाम लिखा ना शुभ्र गगन में चाँद ने.

और हम है घरों – कब्रों पर अपना नाम लिखते रहते है.

 

half

 

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दिल से 

दिल से निकली बाते ही

अक्सर दिल को छू पाती है.

पुराने लोगों से मिलो ….बाते करो …

तो पुराने दिन याद आते है .

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बेलगाम   ख्वाहिशें-  कविता 

कुछ ख्वाहिशें बेलगाम उडती,

 बिखरती रहती है हवा के झोंकों सी.

 सभी अरमानों को पूरा करना मुशकिल है,

और  बंधनों में बाँधना भी मुश्किल है.

राहें -कविता

We are stars wrapped in skin,
The light you are seeking has always been within.
~ Rumi

जिंदगी की राहें  सड़कों की तरह  कभी खत्म नहीं होती है,

मंजिल की दूरी से ङरने से अच्छा है, 

एक -एक कदम उठा कर  चलते जाना।

जब लगे, सारे रास्ते बंद हैं,  शुन्य से भी शुरु करने में भी क्या हर्ज़ है?

सफेद पन्ने पर फिर से जो चाहे लिखने का मौका  मिला है।

बस अपने अंदर की आग को जलते रहने देना है। 

जब किसी बात से हमारे कदम लङखङा जाते हैं, यह कविता  उस वक्त के  लिये है। पर विशष कर

उन बच्चों को समर्पित है, जिन्हों ने परीक्षा में अपने मन लायक सफलता – उपलब्धि नहीं पाई है। 

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पहचान – कविता #JudgingPeople- poetry

मित्र आगमन पर नंगे पैर दौङ पङे कृष्ण,

ना कान्हा ने सुदामा  को आंका।

ना राम ने सबरी , हनुमान  को नापा।

हम किसी से मिलते हीं सबसे पहले,

एक- दूसरे को  भांपते है, आंकते है,

आलोचना -समालोचना करते हैं।

तभी सामने वाले का मोल तय करते हैं। 

रुप, रंग, अौकात …..

देख कर  लोगों को पहचानते हैं।

भूल जाते हैं , अगर  ऊपरवाला हमारा  मोल लगाने लगेगा,

तब हमारी पहचान क्या होगी ? हमारा मोल क्या होगा? 

Indispose,  Edition 172 –How do you feel when people judge you? Do you judge people as well? #JudgingPeople

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वर्णमालायें -कविता Alphabets-Poetry

 

“A good head and good heart are always a formidable combination. But when you add to that a literate tongue or pen, then you have something very special.”
― Nelson Mandela

मन में भरे हो असीमित, बेहिसाब  विचार,

दिल में हों जमाने भर के ख़याल।

लिपिबद्ध,

कुछ वर्णमालायें, कुछ अक्षर….शब्द, 

अल्फाबेट,  अलिफ़-बे,

हीं वे माध्यम हैं,  जो

लिखे-बेलिखे विचारों को

ऊतार देते है पन्नों पर।

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