अपूर्णता में भी पूर्णता हैं,
कमियों में भी सौंदर्य।
जुनून में होता है नशा।
धुन में होती है खुमारी।
सर्वोतम या उत्कृष्ट होने से
बेहतर है सच्चा होना।

अपूर्णता में भी पूर्णता हैं,
कमियों में भी सौंदर्य।
जुनून में होता है नशा।
धुन में होती है खुमारी।
सर्वोतम या उत्कृष्ट होने से
बेहतर है सच्चा होना।

लगता था, क्या सुनाए दास्तान?
उम्र गुज़र जाएगी, पर पूरी नहीं होगी।
हर लफ़्ज़ पर आँसू थे छलकते,
गला था रुँधता।
दर्द में डूबी कहानी अधूरी रह जाती।
ज़िंदगी औ समय ने बना दी आदत,
आँसू पी कहानी सुनाने की।
समुंदर के साथ भी यही हुआ था क्या?

अपने हीं आँसुओं को पी-पी कर खारा हो गया क्या?
जो मिला उसमें जीना सीखा लिया।
जो ना मिला उसमें गुज़ारा करना सीख लिया।
चाहना, पसंद करना छोड़ना सीख लिया।
घूमते रही इर्दगिर्द तुम्हारे,
घड़ी की सुइयों की तरह।
क्या अपने आप को था जीत लिया?
या खो दिया अस्तित्व अपना?
यही होती है बज़्म-ए-हस्ती औरत की।

आँखें दिलकश ख़्वाबों और इश्क़ की है राहें।
जब निगाहों-निगाहों में बातें होतीं है।
बिन ज़ुबान दिल की बातें बयान होती है।
लाख रखो पहरे, इश्क़ सरेआम होतीं है।
लाख छुपाओ नशीली आँखें से,
मुहब्बत खुलेआम बयान होती है।
Interesting Psychology fact about LOVE-
Researches says dilated pupils are a sign
of attraction. The “love hormones”
oxytocin and dopamine have an effect
on pupil size. Our brain gets a boost of
these chemicals when we’re sexually
or romantically attracted to someone.
This surge in hormones appears to
make our pupils dilate and large.

ज़िंदगी की राहों पर अकेले हो?
तन्हाइयों का मलाल ना करो।
तय है, लक्ष्य है क़रीब।
सर्वोच्च स्थान, उच्चतम शिखर,
भीड़ नहीं,
सिर्फ़ सर्वश्रेष्ठ विजेता है पहुँचता।
The Winner Stands Alone.
Solitude makes us strong ,
if we have the power to
handle it positively.

दुनिया से नाराज़ होना छोड़ दिया अरसे पहले।
अब अपने आप से भी नाराज़ नहीं होते।
बात ऐसी नहीं कि ज़िंदगी हसीन हो गई है।
बात बस इतनी है कि
मुहब्बत करने लगे हैं अपने-आप से।
ख़ुशी की बात हो, कि ग़मों की,
सब से पहले, गुफ़्तगू अपने आप से करते हैं।
हौसला अफजाई अपने आप की करते हैं।
Positive Psychology –
Our most important relationship
is with our inner voice- Our internal
monologue shapes mental wellbeing,
says psychologists.

तारों की कहकशाँ से सजी रात है,
आकाश में छिटके चाँद-तारे, शरद पूर्णिमा की रात।
धरा पर राधा -कान्हा करते महारास,
वृंदावन की अद्भुत धूम में महारासलीला की रात।
आध्यात्म और प्रेमोत्सव की निराली रात।
सोलह कलाओं से पूर्ण चंद्रमा की,
बिखरी चाँदनी में गोपियाँ नाचती रही,
बरसात रहा अमृत सारी-सारी रात।
रक़्स…नृत्य में डूबी तारों भरी रात है।
(अश्विन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा / शरद पूर्णिमा, रविवार, 09 अक्टूबर 2022 )

प्यासे मृग सी कशाकश में,
मृगतृष्णा के पीछे भागते
बीतती है दिन-रात।
कट जाती है ज़िंदगी फ़क़त
मरीचिका सी उलझन में।
बता वक्त ख़ता ढूँढे या सज़ा?

दो दिलों…रूहों की जुगलबंदी है इश्क़।
इश्क़ के हैं कुछ अदब-कायदे।
अज़ाब-ए-हिज्र-ओ-विसाल…
मिलन और वियोग में जीना
है सिखाती इश्क़ की जुगलबंदी।
टूट जाए यह जुगलबंदी,
फिर भी टूट कर जीना है सीखती।
एक दूसरे के लय-ताल पर
जीना है इश्क़-ए-जुगलबंदी।

Topic by YourQuote.
सदियाँ और युग बीते,
रावण कभी नहीं मरा।
था अति विद्वान।
पर जीत नहीं सका अहंकार अपना।
विजया और रावण दहन सीख है,
जीत सको तो जीत लो अहंकार अपना।
ना रखो कई चेहरे,
दुनिया में कई चेहरे वाले कई रावण है,
इसलिये राम याद आतें हैं।

You must be logged in to post a comment.