सफलता के साँचे में
ढलना हो,
तो ज़िंदगी की धूप में
तपना और चलना होगा।

सफलता के साँचे में
ढलना हो,
तो ज़िंदगी की धूप में
तपना और चलना होगा।

विजय उत्सव है दिवाली।
रावण महापंडित, शिव भक्त, नवग्रह गुलाम उसके।
उसके बल, बुद्धि, विद्या और ज्ञान पर संशय था नहीं।
फिर भी पराजित हुआ वानर सेना और राम से।
आखिर क्यों ?
यह जीत है अहंकार पर, अँधकार पर!
विजय उत्सव है दिवाली।

अनजानी चाह में,
ना दे बिसार जो है हाथ में।
कई धोखे…वहम भरी
आँख-मिचौली खेलती,
शोख़ ख्वाहिशें हम सब
उम्र भर रहते हैं तलाशते।
मिलने पर ग़र ना आए रास तो?
कहते हैं – हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी
कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन
फिर भी कम निकले।

कुछ लोग होते हैं
ख़ूबसूरत ख़ामोश किताब से।
दमकते सुनहरे अल्फ़ाज़ों में लिखे नाम से।
समय की बहती बयार जब छेड़-छाड कर
खोलती है जिस्म-ए-किताब,
वरक़ दर वरक़, पन्ने दर पन्ने .. …
ख़ुशियों औ ग़म-ए-ज़िंदगी की
खुल जाते है कई हिसाब।
हर एक लफ़्ज़, अल्फ़ाज़ औ
तहरीरे बोल उठतीं है,
गुफ़्तगू कर उठती है दास्तान-ए-ज़िंदगी।
Psychological fact- if we hold things tight
and hide them away . it will burst out
some day. bottled up emotions may affect
the mental health negatively too.

अक्सर फ़रेब करने वाले,
आज़माते रहते हैं दूसरों को।
भूल जाते हैं, फ़िज़ा में घुली
ख़ुशबुएँ आज़माई नहीं जाती।
गुमान करने वाले परखनते रहते हैं, दूसरों को।
कसौटी पर स्वर्ण ही परखते हैं।
भूल जातें हैं लोहे परखे नहीं जाते।
दूसरों में कमियाँ ढूँढने वाले
धूल आईना की साफ़ करते रहते है,
भूल जातें है ख़ुद के चेहरे साफ़ करना।

जिसे भूलना चाहा, उम्र कट गई भुलाने में।
जो याद रखना चाहा, ना जाने कब भूल गए।
भूलना-भुलाना नहीं कोई ख़ता,
यह इंसानी फ़ितरत है ज़रूरी,
दिल-औ-दिमाग के सुकून के लिए।
Interesting Psychological Fact- For proper
balance in life, both conservation of memory
and forgetting are important. The ability to
forget helps us prioritize, think better, make
decisions, and be more creative. Normal
forgetting, in balance with memory, gives us
the mental flexibility to grasp abstract concept
from a morass of stored Information.

ज़िंदगी में मिलतीं कई हैं राहें।
कुछ राहें जातीं हैं
तिमिर से तिमिर… अंधकार की ओर।
कुछ अंधकार से रोशनी की ओर,
कुछ ज्योति से तिमिर की ओर,
कुछ ज्योति से ज्योति की ओर।
इन मुख़्तलिफ़ राहों से चुन लो
किधर है जाना।
इन राहों में जिसे चाहो चुनो,
वापस लौटने की नहीं है गुंजाइश,
शर्त-ए-ज़िंदगी बस इतनी है।

जीवन संग्राम में सबसे बड़ा समर है,
जीतना अपने आप से।
अपने आप को स्वीकार करना,
साथ अपनी कमियों के।
अपने आप को प्यार करना।
अपने एहसासों पर इख़्तियार रखना,
अपने एहसासों के इख़्तियार में नहीं रहना।

कुछ कहना था, कुछ सुनना था।
पर बात अधूरी रह गई।
क़िस्सा-ए-इश्क़ छेड़ा,
पर कहानी अधूरी रह गई।
क्या शिकवा आल्फ़ाज़ो और
लफ़्ज़ों की ग़र वे अनसुनी रह गई।
जब नज़्म-ए-ज़िंदगी अधूरी रह गई।

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