
बातें



सोंच विचार है ज़रूरी ।
क्यों बार-बार माफ़ करते हैं
दर्द देने वालों को?
खोने के डर से?
किसी को पाने की कोशिश में?
तब ज़िंदगी में दर्द और तकलीफ़ मिलेगी
और खोना होगा अपने आप को।
कठिन है लोगों को बदला।
आसान है आसपास के लोगों को बदलना।
Psychological fact – Human wants
bond for love and support. Sometimes
we bond with people who are mentally
and/or physically not good for us/ abuse us.
Trauma bond is bad for our mental health.
Don’t shoot them with your camera !
आँखें ख़्वाब, औ सपने बुनतीं हैं,
हम सब बुनते रहते हैं,
ख़ुशियों भरी ज़िंदगी के अरमान।
हमारी तरह हीं बुनकर पंछी तिनके बुन आशियाना बना,
अपना शहर बसा लेता है.
बहती बयार और समय इन्हें बिखेर देते हैं,
यह बताने के लिये कि…
नश्वर है जीवन यह।
मुसाफिर की तरह चलो।
यहाँ सिर्फ रह जाते हैं शब्द अौर विचार।
वे कभी मृत नहीं होते।
जैसे एक बुनकर – कबीर के बुने जीवन के अनश्वर गूढ़ संदेश।

बुनकर पंछी- Weaver Bird.
रूमी की पंक्तियों आपको क्या कहतीं हैं? ज़रूर बतायें. आप सबों के विचार मेरे लिए बेहद मायने रखते हैं.
रूमी को मैंने कुछ साल पहले मायूसी के पलों में, गहराई से पढ़ना शुरू किया था. अब गीता, कबीर, रूमी, नानक और ढेरों संतों की बातों और विचारों में समानता पाया. इनकी पंक्तियाँ मुझे गहरा सुकून देतीं हैं.
जीवन के बाद के जीवन, को जानने की लालसा इतनी प्रबल है कि ,
मन व आत्मा को हमेशा खींचता है अपनी ओर.
जीवन के अंत से ङरे बिना।
उसमें अब एक लालसा और जुड़ गई है – किसी से मुलाक़ात की.
मिलेंगे फिर वहाँ, जहाँ एक और जहाँ… दुनिया हैं.
भीड़ और परखने वाली नज़रों से दूर…. सही ग़लत से दूर .
What did Rumi mean when he said:
Out beyond ideas of wrongdoing
and rightdoing there is a field.
I’ll meet you there.
When the soul lies down in that grass
the world is too full to talk about.

Rumi ❤️
समय चक्र चलता रहता है,
अँधेरा …. अौर फिर उजाला….
कहते हैं –
अँधेरे को उजाला हराता है।
पर अक्सर लगता है –
रात के अँधेरे अनोखे…. अद्भुत…… विचार देते हैं।
शायद
मौन अंधेरा आँखों
की ताकत भी दिलो दिमाग में भर देता है।
शायद
स्वयं को देखने अौर आत्म मंथन
के हालात बना नवल -नये विचारों को जगाता है।
ईश्वर-नियन्ता पत्थरों की मुर्तियोँ में नहीं बसते।
हमारे विचारों मे बसते हैं।
अौर मन-आत्मा-दिल
वह मंदिर- मस्जिद -चर्च
वह पूजा स्थल हैं….
जहाँ ये विचार उपजते हैं।
ना जाने कितने शब्द अौर विचार
जेहन में आते जाते रहते हैं ।
कुछ को पन्नों पर ऊतार दिया
अौर कुछ खो जाते है।
सोते या अर्ध निंद्रा में भी
कई विचार अाते जाते रहते है।
पकङ लिया तो अपने हैं
वरना सपने हैं।
चेहरा क्या है?
ईश्वर प्रदत उपहार….
हमारे उम्र अौर विचारों की छाया।
पर ये लफ्ज , ये बोली,
सच्चाई का आईना है
अपने विचारों को
पढ़ने अौर पकङने के जुनून अौर जोश ने
मनन करना सीखा दिया।
मन के विचारों
को पन्नों पर
शब्द जाल बना कर, ऊतारना सीखा दिया।
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