बिखरती खुशबू को समेटने
की चाहत देख सुगंध ने कहा –
हमारी तो फितरत हीं है बिखरना
हवा के झोंकों के साथ।
तुमने बिखर कर देखा है कभी क्या ?
इस दर्द में भी आनंद है।
बिखरती खुशबू को समेटने
की चाहत देख सुगंध ने कहा –
हमारी तो फितरत हीं है बिखरना
हवा के झोंकों के साथ।
तुमने बिखर कर देखा है कभी क्या ?
इस दर्द में भी आनंद है।
दर्द भरे दिल पर पङे बोझ को जब उठाया
उसके तले दबे
बहुत से जाने पहचाने नाम नज़र आये।
जो शायद देखना चाहते थे….
तकलीफ देने से कितना दर्द होता है?
पर वे यह तो भूल गये कि
चेहरे पर पङा नकाब भी तो सरक उनके असली चेहरे दिखा गया।
जिंदगी के हसीन पलों को
कितनी भी बार कहो – थम जा !!
पर यह कब रुकता है?
पर दर्द भरे पलों का
बुलाअो या ना बुलाअो,
लगता है यह खिंचता हीं चला जा रहा है………
पता नहीं समय का खेल है या मन का?
पर इतना तो तय है –
वक्त बदलता रहता है………….
यह काल चक्र चलता रहता है।
जैसा भी समय हो, बीत हीं जाता है ……….
किसी का दर्दे हाल जानना है ,
तब
पास जाअो, करीब से देखो।
दूर से तो सब कुछ
सुहाना हीं सुहाना दिखता है।
सबसे गहरा दर्द तब महसूस होता है,
अपने आप को नकार कर
हर किसी को खुश रखने
की चाहत में हार जाअो।
बहुत खामोशी ……
अौर
हर पल मुस्कराता चेहरा…………
कभी गौर से देखो,
गर पढ़ सको………
तब दिखेगा,
यह तो दर्द का आईना है।
जिंदगी ने बहुत से दर्द भरे सबक दिये,
उन्हें पन्नों पर उतारते-उतारते ,
फिर से……………
इश्क हो गया जिंदगी, कलम अौर कागज से
आप इन्हें जो चाहे कहें,
जिंदगी के रंग, जिंदगी के फलसफे, तजुर्बे या कविता……….
किसी ने ग़ालिब से पूछा – …..”कैसे हो?” ग़ालिब ने हँस कर कहा –
जिंदगी में ग़म है……
ग़म में दर्द है………….
दर्द में मज़ा है ………
अौर मज़े में हम हैं।
जिंदगी के बीते लम्हों ,
और हर तजुर्बे ने ,
बताया है.
खुशियाँ और मुस्कुराहटे ,
उतने अपने नहीँ होते ,
जितने दर्द और तकलीफ के,
निजी एकांत पल.