ज़िंदगी एक फ़िल्म है,

जिसका लेखक, डायरेक्टर सब है ऊपरवाला,

और मुख्य पात्र हैं हम।

कब क्या होगा, किसी को नहीं मालूम।

नए नए ट्विस्ट और टर्न के साथ

अग़ल दृश्य हमेशा है एक मिस्ट्री।

दृश्य है बदलते रहते।

बस नहीं रहता

किसी को इस

फ़िल्म के द एंड

या अंत का इंतज़ार।

Topic by YourQuote.

शुभ जन्माष्टमी !! Happy Janmashtami!!

‘तू करता वही है , जो तू चाहता है ,

होता वही है जो मै चाहता हूँ।

तू वही कर ,जो मै चाहता हूँ ,

फिर होगा वही ,जो तू चाहता है। ‘

-श्रीमद्भागवत गीता

Happy Birthday lord Krishna!

हो ना नाउम्मीद

कभी सब हाथ छूटने लगे,

रिश्ते टूटने लगे।

झड़ते पत्तों सी गिरती-बिखरती लगे ज़िंदगी,

हो ना नाउम्मीद।

हौसला रख।

सब्र कर।

पतझड़ आता हैं।

फिर बहारें भी आएँगी।

तय है कितनी भी लंबी रात हो,

सुबह आएगी।

जुबाँ

कभी कैक्टस, कभी पत्थर

बन जाती है नरम मुलायम जीभ।

कभी नर्म कभी गर्म, कभी ज़ख्म पर

मरहम सा सुकून भरा फाहा।

कभी घाव दे जाती है नाज़ुक जीभ।

कभी रिश्ते बनाती, कभी बिगाड़ती है।

कभी गुनाहगार कभी बेगुनाह निर्दोष बन जाती है।

शायद इसलिए ज़ुबान की दहलीज़ पर

लबों के पहरे होते हैं।

शायद इसलिए जुबाँ

कई दीवारों के पहरे में क़ैद रहती है।

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोये।

औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए।। ~~ कबीर

दुआओं में नाम ना होगा !

दूसरों को दर्द देने वाले को

मालूम होती है ख़ता अपनी।

क्यों जाया करना लफ़्ज इन पर?

इन्हें ना दे बद-दुआ, पर तय है

दुआओं में नाम ना होगा इनका।

जब कोई चोट और दर्द दे कर,

अपनी हीं तकलीफ़ का राग सुनाता है,

तब एक पुरानी कहावत याद आती है –

सूप बोले तो बोले, चलनी बोले जिसमें सौ छेद।

Psychological Fact – One may end up feeling exhausted, depressed, anxious, frustrated, and physically sick when Toxic people act as a victim.

अजब नशा

शराबखाने से ज़्यादा,

इश्क़ औ आँखों के नशे से बढ़ कर

जो ना टूटे वो अजब नशा है यह।

संभल कर कदम बढ़ाना सीढ़ियों पर

सोशल मीडिया के।

Psychological fact of social media addiction-

Using social media can lead to physical and psychological addiction because it triggers

the brain’s reward system to release

dopamine, the “feel-good” chemical.

ख्वाहिशें तो अनंत हैं!

क्यों आज़ लोग खुश और संतुष्ट नहीं?

क्यों लोग स्वयं को नहीं, दूसरों को देख रहें हैं?

आध्यात्मिक-मानसिक प्रगति से दूर,

भाग रहें हैं भौतिक प्रगति की ओर।

पर है स्वयं के गोली-बारी, हिंसा से लहू-लुहान।

गीता ने सदियों पहले बताया,

जो तुम्हारे पास है उसमें संतुष्ट, ख़ुश रहना सीखो,

क्योंकि ख्वाहिशें तो अनंत हैं।

सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः।

मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे प्रियः।।12.14।।

अर्थ- संयतात्मा दृढ़निश्चयी योगी सदा सन्तुष्ट है।

जो अपने मन और बुद्धि को मुझमें अर्पण किये हुए है?

वह मुझे प्रिय है। (भगवद् गीता अध्याय 12 श्लोक 14)

Salman Rushdie Stabbed In Neck At New York Event, Taken To Hospital. https://www.ndtv.com/world-news/author-salman-rushdie-attacked-on-stage-at-an-event-in-new-york-news-agency-pti-3249899/amp/1

परिवर्तन

एहसास !

दिल में दबा दर्द मुस्कुराहटों की ओट में पनाह लेता है।

मुस्कुराहटें आँखों के आँसुओं के नमी

के पीछे लुका-छिपी करती है।

क्यों एहसासों को छुपाने का चलन ज़माना सिखाता है?

दिल पर बोझ बढ़ाना सिखाता है?

वही आँखें, वही मुस्कान जो राज़दार बनती हैं,

वही दर्द-ए-दिल राज़ खोल देतीं हैं।

नासूर नहीं इलाज-ए-दर्द चाहिए।

Psychological Fact – Don’t Bury Your Feelings. Being in touch with your feelings will make you a better person, as well as a better parent and partner. Being true to your emotions can make you feel better about yourself.

ज़िंदगी के शतरंज

ज़िंदगी के शतरंज पर

सम्बंधों की गोटियाँ ना खेलो।

ग़र किसी की ज़्यादती

बिना जवाब दिए झेल गए,

तब जवाब ऊपरवाला देता है।

महाभारत रचने में महारत रखने वालों

का भी यही हश्र हुआ था।