
मकाँ है क़ब्र
जिसे लोग ख़ुद बनाते हैं,
मैं अपने घर में हूँ
या मैं किसी मज़ार में हूँ।
~~मुनीर नियाज़ी

मकाँ है क़ब्र
जिसे लोग ख़ुद बनाते हैं,
मैं अपने घर में हूँ
या मैं किसी मज़ार में हूँ।
~~मुनीर नियाज़ी

पाना है अगर मंज़िल,
राज़ रखो अपनी मंज़िल।
बढ़ाते रहो पूरे विश्वास से कदम।
ग़र ना हो राज़-ए-मक़सद रखने का दम
दिल साज़िश करने लगता है हरदम।
कम कर हौसला,
देते है एहसास ऐसा भर
जैसे पा लिया हो मंज़िल।
बिना पाये मंज़िल।
Interesting Psychological Fact – Don’t tell
everyone your goals, because it chemically
satisfies the brain and that’s similar to
completing it.
Meaning मक़सद / मंज़िल – goal.

कमियाँ किसमें नहीं?
पर सबसे बड़ी कमी है वही,
ज़ेहन के अँधेरे को मानना सही।
कभी ख़ुद का आईना बन तो सही।
नेकनीयती से गौर कर कभी
अपनी सकारात्मक और नकारात्मक,
अच्छी और बुरी बातों की बही।
नज़रों के सामने से हटेगा कम-निगही।
अपनी होड़, अपनी स्पर्द्धा अपने आपसे कर,
ईमानदारी और प्यार से खुद का ऑडिट कर।
अच्छा-बुरा जो भी पाया उन लम्हों में
उसका हर दिन रियाज़ कर।
अर्थ- कम-निगही- short sighted
Positive Psychology- Self-acceptance is the
first step to self-mastery. Mastery of the
self comes from accepting all our flaws.
Talk To Yourself with empathy.

इंसान का वजूद हो या
जलते दिए का।
सब माटी से पैदा हुए,
माटी में मिल जाएँगें।
जिसकी सोंधी खुशबू,
रची-बसी होती है ज़िंदगी में।
“मिट्टी के मोल” समझने में माटी को,
ऐसा ना हो अस्तित्व ना रहे जीवन का धरा पर।
5 December – World Soil Day
It is observed on 5 December to raise
awareness about the importance of soil,
healthy ecosystems and human well-being.

मुसाफ़िरों को नदी पार कराती किश्ती।
घाट घाट जाती है किश्ती।
पानी-हवा की दोस्ती से नदिया के
साथ तैरती जाती है किश्ती।
वही दोस्त नाराज़ हो तो
आँधी तूफ़ान बन डूबातें है किश्ती।
छोटी सी है इसकी हस्ती।
कम नहीं होती पानी पर नाच इसकी मस्ती।
बिना डरे सारी दुनिया घूम दिन ढले
अपने ठौर वापस आती है किश्ती।

पसंद
हम चाहें ना चाहें,
सब हमें चाहें।
हम कबूलें या ना क़बूलें लोगों को,
पर हमें सब क़बूल करें।
यह ज़िद्द क्यों, सब पसंद करें तुम्हें?
क्या कायनात मे सभी पसंद हैं तुम्हें?

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।
(जीवन में आने वाली विपरीत परिस्थितियों में हौसला दिलानेवाला श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक)
भगवान श्रीकृष्ण ने संसार को गीता के ज्ञान रूप में अपनी विशेष कृपा प्रदान की है। मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को गीता जयंती मनाई जाती है.
Gita Mahotsav is an event centred around the Bhagavad Gita, celebrated on the Shukla Ekadashi, the 11th day of Margashirsha the waxing moon of the (Agrahayan) month of the Hindu calendar. It is believed the Bhagavad Gita was revealed to Arjunaby Krishna in the battlefield of Kurukshetra.

चाँद ने सूरज को आवाज़ दे कर कहा –
ज़िंदगी की राहों में कुछ पाना,
कुछ खोना लगा रहता है।
कम ज़्यादा होना लगा रहता है।
भला या बुरा किया किसी के साथ,
उसका जवाब मिलता रहता है।
आवाज़ की गूंजें लौट कर है आती रहतीं हैं।
सागर और ब्रह्मांड का यह है फ़लसफ़ा।

चराग़-ए-रहगुज़र रौशन करता है।
मुसाफिर की अँधेरी राहों को।
जब दिल में चराग़ जल उठते हैं,
रौशन करते हैं रूह की राहें को।
अर्थ –
चराग़-ए-रहगुज़र – lamp on the way

कुछ लोग बिन आईना जीते हैं ज़िंदगी।
वे भूल जातें है, ख़ुद एक आईना है ज़िंदगी।
और जब अचानक उन्हें हीं उनका चेहरा
दिखाती है आईना-ई-ज़िंदगी।
तब नहीं पाते अपने आप को पहचान,
या अपना भूला चेहरा ना चाहतें हैं पहचानना?
धूमिल, दाग़दार, मलिन अक्स।
आईना नहीं बोलता झूठ, जानते हैं सभी शख़्स
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