
दर्द और चुभन कम
करने के लिए,
बार बार चुभनेवाली कील
ज़िंदगी से हटा देनी चाहिए।
अपने लिए जीना,
खुश रहना स्वार्थ नहीं
समझदारी है।
सच्ची बात यह है कि
जो स्वयं खुश हैं।
वही दुनिया में
ख़ुशियाँ बाटें सकतें है।

दर्द और चुभन कम
करने के लिए,
बार बार चुभनेवाली कील
ज़िंदगी से हटा देनी चाहिए।
अपने लिए जीना,
खुश रहना स्वार्थ नहीं
समझदारी है।
सच्ची बात यह है कि
जो स्वयं खुश हैं।
वही दुनिया में
ख़ुशियाँ बाटें सकतें है।

दीया
हर दीया की होती है,
अपनी कहानी।
कभी जलता है दीवाली में,
कभी दहलीज़ पर है जलता,
गुजरे हुए की याद का दीया
या चराग़ हो महफ़िल का
या हो मंदिर का।
हवा का हर झोंका डराता है, काँपते लहराते एक रात जलना और ख़त्म हो जाना,
है इनकी ज़िंदगी।
फिर भी रोशन कर जाते है जहाँ।

ज़िंदगी वह आईना है,
जिसमें अक्स
पल पल बदलता है।
इसलिए वही करो
जो देख सको।


जो बनते रहें हैं अपने.
कहते हैं पहचान नहीं पाए तुम्हें !
आँखों पर गुमान की पट्टी ऐसी हीं होती है.
अच्छा है अगर लोंग पहले पहचान लें ख़ुद को।
ज़िंदगी के राहों में,
हम ने बख़ूबी पहचान लिया इन्हें!

Image – Aneesh
You must be logged in to post a comment.