ख़ुशगवार ज़िंदगी

ज़माने की महफ़िल में मुस्कुरा कर

करते हो बातें।

अपनों से, जाने-अनजानों से।

कुछ अपनी फ़िक्र, अपना ख़याल करो।

ज़माने के रंज-औ-ग़म ना उतारो ख़ुद पर।

चाहिए ग़र ज़िंदगी ख़ुशगवार चुस्त।

अपने-आप से बातें करो वही जो हों दुरुस्त।

Interesting Psychological Fact – Self-talk is

our internal dialogue. It’s influenced by

our subconscious mind, and it reveals

our thoughts, beliefs, questions, and ideas.

Positive Self-talk can enhance your

performance and general well-being.

अपनी ज़िंदगी कब जियोगे?

लोग क्या कहेंगे?

अगर सुन रहे हो लोगों की।

तब जी रहे हो उनकी ज़िंदगी,

उनकी बातें,

उनकी ख्वाहिशें।

अपनी ज़िंदगी कब जियोगे?

सफ़र ज़िंदगी की

अपेक्षायें, सफ़ाई और

कई जज़्बा-ए-बेनाम,

आने लगे सफ़र-ए-ज़िंदगी के बीच।

जो चैन और सुकून छीन ले,

तब

लोगों को ना करे कोशिश बदलें की।

आसपास के लोगों को बदल दें।

अर्थ- जज़्बा-ए-बेनाम: अनाम अहसास / nameless emotions.

मकतब-ए-ज़िंदगी ने सिखाया,

मुस्कुरा-मुस्कुरा कर

लोगों को ना कर इतना बर्दाश्त

कि वे हद से गुज़र जाएँ।

सितम सहन इतना ना कर,

कि लोग सीमा तोड़ जाए।

कि ख़ुद वे बर्दाश्त-ए-काबिल ना रह जायें।

Positive Psychology-

If someone is crossing your boundaries,

take action. At the same time, Be careful

with how much you tolerate. You are

teaching them how to treat you.

ज़िंदगी की धूप

सफलता के साँचे में

ढलना हो,
तो ज़िंदगी की धूप में

तपना और चलना होगा।

शर्त-ए-ज़िंदगी

जैसे चाहो, जी लो ज़िंदगी।

वापस लौटने की नहीं है गुंजाइश,
बस इतनी है शर्त-ए-ज़िंदगी।

ज़िंदगी एक फ़िल्म है,

जिसका लेखक, डायरेक्टर सब है ऊपरवाला,

और मुख्य पात्र हैं हम।

कब क्या होगा, किसी को नहीं मालूम।

नए नए ट्विस्ट और टर्न के साथ

अग़ल दृश्य हमेशा है एक मिस्ट्री।

दृश्य है बदलते रहते।

बस नहीं रहता

किसी को इस

फ़िल्म के द एंड

या अंत का इंतज़ार।

Topic by YourQuote.

ज़िंदगी के शतरंज

ज़िंदगी के शतरंज पर

सम्बंधों की गोटियाँ ना खेलो।

ग़र किसी की ज़्यादती

बिना जवाब दिए झेल गए,

तब जवाब ऊपरवाला देता है।

महाभारत रचने में महारत रखने वालों

का भी यही हश्र हुआ था।

ज़िंदगी के हक़दार हैं हम सब

अक्सर लड़कियाँ को सबक़ – ढके रहना सीखो।

सहना-चुप रहना सीखो, कहना नहीं।

लड़कों के सबक़ होतें हैं – लड़के हो, रोना नहीं,

आँसू नहीं बहाना, ज़िम्मेदार और मज़बूत रहना।

अंदर हीं अंदर घुटती भावनाओं

और दर्द के नासूर का क्या करना?

अपनी तकलीफ़-पीड़ा किसे है बतानी?

अपने लिए खड़े होना कौन सिखायेगा?

सच तो यह है –

भावनाओं और दर्द से भरा बारूद ना बन,

पहले ख़ुद से, अपने दिल-दिमाग़-रूह से प्यार कर।

खुशहाल ज़िंदगी के हक़दार है हम सब।

ज़िंदगी ने चुना है!

ज़िंदगी वह गुरु है

जो पर्चे शागिर्दों को देख कर नहीं बनाती है।

बल्कि वह अच्छे शागिर्दों को

कठिनतम इम्तहानों के लिए चुनती हैं।

और यह सिखाती है कि

इस दुनिया में जीवट हीं टिकते हैं –

“सरवाईवल औफ़ द फ़िटेस्ट”।

इसलिए अगर लगे ज़िंदगी कठिनाइयों भरी है।

इसका मायने है, ज़िंदगी ने चुना है तुम्हें,

ख़ास मक़सदों के लिए।