
जब अपने महफ़ूज़ आशियाने में,
अप्रिय, अनजाने मेहमानों को
नहीं बुलाते इस ज़माने में।
तब
दिल, रूह, तन और मन के पावन आशियाँ में,
क्यों बिना सोंचे सब को
जगह देंना इस ज़माने में?
नासमझी भरे ऐतबार ज़ख़्म
हीं दिया करते हैं हर ज़माने में।

जब अपने महफ़ूज़ आशियाने में,
अप्रिय, अनजाने मेहमानों को
नहीं बुलाते इस ज़माने में।
तब
दिल, रूह, तन और मन के पावन आशियाँ में,
क्यों बिना सोंचे सब को
जगह देंना इस ज़माने में?
नासमझी भरे ऐतबार ज़ख़्म
हीं दिया करते हैं हर ज़माने में।
ना मारो अपनी रूह, आत्मा, ज़मीर को।
अपने ऊपर आक्रोश और ग़ुस्सा कर,
अपने लिए कड़वे नकारात्मक बातें कर।
अपने-आप को
अपराध बोध में ना डुबाओ।
Psychological Fact- Guilt is a self-conscious
emotion that involves negative
evaluations of the self, feelings of distress,
and feelings of failure. It’s not good for
our health. Always protect your mental
well-being and quality of life.

दर्द और छल बदल देता है आदतें।
धोखा खाए लोग किसी पर
भरोसा करने से डरने लगते है।
दूसरों के छल झेल कर भी जो निश्छल रहे,
वे वह रौशनी हैं जो दमकते रहते हैं
बिना हार माने।
Psychological fact-
long-term effects of being cheated on –
It may take a long time to heal. It can cause
chronic anxiety, post-traumatic stress, depression,
and mistrust for a long time after the event.

पूछा जलते और ढलते सूरज ने।
तपन के बावजूद हम साज़िश करते रहते है
ताकि चाँद तुम दमक सको
मेरी प्रतिबिंबित रोशनी से।
मिलन ना लिखा हो हमारा।
पर ख्वाहिश है कि
चाँद तेरी दूधिया चाँदनी चमके
आफ़ताब….सूरज की रौशनी से।

Topic by yourquote
औरत क्या सिर्फ़ एक ज़िद्दी पेड़ की तरह है?
कही से उखाड़ कर कही और लगा दो।
उसे पनपना ही होगा।
चाहे उसमें इसकी शक्ति हो ना हो।
उसे पसंद हो ना हो।
पत्नी ना रहे तो कहते हैं आदमी कब तक रहे अकेला?
पति ना रहे तो कहते हैं –
पत्नी को वैधव्य धर्म निभाना चाहिए।
इतना फ़र्क़ क्यों?
Every woman should have the same
rights as men, because a woman is
the mother who gives birth to a man.
We should always respect them.
~~ RAJA RAM MOHAN ROY
(20th August 1828, the first session of Raja Ram Mohan Roy’s Brahmo Samaj was held in Kolkata.)

‘तू करता वही है , जो तू चाहता है ,
होता वही है जो मै चाहता हूँ।
तू वही कर ,जो मै चाहता हूँ ,
फिर होगा वही ,जो तू चाहता है। ‘
-श्रीमद्भागवत गीता
Happy Birthday lord Krishna!

कभी कैक्टस, कभी पत्थर
बन जाती है नरम मुलायम जीभ।
कभी नर्म कभी गर्म, कभी ज़ख्म पर
मरहम सा सुकून भरा फाहा।
कभी घाव दे जाती है नाज़ुक जीभ।
कभी रिश्ते बनाती, कभी बिगाड़ती है।
कभी गुनाहगार कभी बेगुनाह निर्दोष बन जाती है।
शायद इसलिए ज़ुबान की दहलीज़ पर
लबों के पहरे होते हैं।
शायद इसलिए जुबाँ
कई दीवारों के पहरे में क़ैद रहती है।
ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोये।
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए।। ~~ कबीर

क्यों आज़ लोग खुश और संतुष्ट नहीं?
क्यों लोग स्वयं को नहीं, दूसरों को देख रहें हैं?
आध्यात्मिक-मानसिक प्रगति से दूर,
भाग रहें हैं भौतिक प्रगति की ओर।
पर है स्वयं के गोली-बारी, हिंसा से लहू-लुहान।
गीता ने सदियों पहले बताया,
जो तुम्हारे पास है उसमें संतुष्ट, ख़ुश रहना सीखो,
क्योंकि ख्वाहिशें तो अनंत हैं।
सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः।
मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे प्रियः।।12.14।।
अर्थ- संयतात्मा दृढ़निश्चयी योगी सदा सन्तुष्ट है।
जो अपने मन और बुद्धि को मुझमें अर्पण किये हुए है?
वह मुझे प्रिय है। (भगवद् गीता अध्याय 12 श्लोक 14)

Salman Rushdie Stabbed In Neck At New York Event, Taken To Hospital. https://www.ndtv.com/world-news/author-salman-rushdie-attacked-on-stage-at-an-event-in-new-york-news-agency-pti-3249899/amp/1
नाप-तौल के रिश्ते निभाने वालों
हाथ में लिए तराज़ू,
ना तौल इंसाँ को।
ना भूल,
आकार, रूप, रंग हैसियत नहीं,
हुनर, स्वभाव और गुण काम आते हैं।
जैसे छोटे से छोटे भी अनमोल होते है
हीरा-स्वर्ण-जवाहरात ।

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