जीवन सार

तन थके तो आराम चाहिए।

मन थके तो सुकून चाहिए।

“जो होगा अच्छा होगा”

मन के सुकून और शांति के लिए,

यह विश्वास क़ायम रखना है ज़रूरी।

कोशिश से बना सकते है यह यक़ीन।

गीता में छुपा है यह जीवन सार –

जो हुआ अच्छा हुआ।

जो हो रहा है वह अच्छा है।

जो होगा वह भी अच्छा होगा।

एक अरसा हो गया ख़ुद से मिले…

हमें मालूम है तुम्हें,

एक अरसा हो गया है ख़ुद से मिले।

दुआ देतें हैं, तुम्हें तुम जैसा कोई मिले।

उस आईने में,

अक्स से नज़रें मिला सको तो देखना

तुम्हें अपना व्यवहार

अपना किरदार नज़र आएगा।

#TopicByYourQuote

ये भी याद है !

मुलाक़ात न होने पाई थी

वक्त-ए- रुख़्सत ।

पर बंद आँखों से देखा था,

एक गहरी सी साँस और

तिरी गीली आँखों का झुक जाना,

क़तरे अश्क़ो का छलक जाना,

सूखे लबों का थरथराना।

तेरे हाथों का यूँ उठ जाना याद है

जैसे डूबने वाला हो कोई।

पर कहा नहीं तूने अलविदा

ये भी याद है।

रफ़ू रिश्ते

ग़र किसी ने दूरियाँ बना ली,

गिला करने से पहले,

झाँक कर देखो गिरेबान में अपने।

कितनी बार रिश्तों के

फटे गिरेबाँ रफ़ूगर करे रफ़ू?

थक कर समझ गया,

बेहतर है अपनी

राह-ए-मंज़िल पर बढ़ जाना।

बसंती बयार

चराग़

गुमान

क़तरे आँसुओं के

क़तरे आँसुओं के

दर्द , ग़ुस्सा आँसू पीते जाने से

रूह की प्यास मिटती नहीं है।

दर्द नासूर बन टीसने लगता है।

फिर भी अक्सर नज़र आतें हैं

दर्द छुपाते नक़ली मुस्कान भरे चेहरे,

मुस्कुराती आखें और आँखों में छुपे

झिलमिलाते क़तरे आँसुओं के।

Psychological fact – Denial is best known defense mechanisms, used when people are unable to face reality or admit an obvious truth to protect their ego.

पत्थर दिल

ग़र दिल आपका नाज़ुक, कोमल है,

लोगों पर ऐतबार करने वाला है।

तब लाज़िमी है चोटें भी बहुत आएँगी।

दुनिया को रास नहीं आते ऐसे लोग।

दर्द दे हर दिल को अपने जैसा बनाने वाले

ढेरों है ज़माने में।

पत्थर दिलवालों को वहम होता है,

इस ज़माने में सब उन जैसे पत्थर दिल हीं हैं।

बलिदान दिवस, शहीद दिवस, 23 March

शक्ति मद नींद में डूबे अंग्रेज सरकार को,

जगाने की कोशिश में फेंका संदेशमय पर्चे के साथ बम –

“मानव को मारा जा सकता है, उसके विचार को नहीं।

बड़े से बड़े साम्राज्यों का पतन हो जाता है

लेकिन विचार हमेशा जीवित रहते हैं।”

सुप्त, बधिर, क्रूर आंग्ल शासकों को जगाने की कोशिश में

23 मार्च, क्रांतिकारी वीर भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव

सो गए चिर निंद्रा, देश की आज़ादी के लिए।