सफलता के साँचे में
ढलना हो,
तो ज़िंदगी की धूप में
तपना और चलना होगा।

सफलता के साँचे में
ढलना हो,
तो ज़िंदगी की धूप में
तपना और चलना होगा।

भावनाएँ.. एहसास हावी हों,
तो नहीं रहता अख़्तियार अपने-आप पर।
जैसे अपनी साँसों पर ना हो अख़्तियार।
ग़र साध लिया अपने दिल-औ-दिमाग़ को,
जीत सकते हैं जग का हर जंग।
PSYCHOLOGYCAL FACT – EQ
Emotional intelligence / EQ refers to
someone’s ability to perceive, understand
and manage their own feelings and emotions.
High EQ person can handle their stress,
uncertainty, and anxiety in a better way.

अनजानी चाह में,
ना दे बिसार जो है हाथ में।
कई धोखे…वहम भरी
आँख-मिचौली खेलती,
शोख़ ख्वाहिशें हम सब
उम्र भर रहते हैं तलाशते।
मिलने पर ग़र ना आए रास तो?
कहते हैं – हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी
कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन
फिर भी कम निकले।

अक्सर फ़रेब करने वाले,
आज़माते रहते हैं दूसरों को।
भूल जाते हैं, फ़िज़ा में घुली
ख़ुशबुएँ आज़माई नहीं जाती।
गुमान करने वाले परखनते रहते हैं, दूसरों को।
कसौटी पर स्वर्ण ही परखते हैं।
भूल जातें हैं लोहे परखे नहीं जाते।
दूसरों में कमियाँ ढूँढने वाले
धूल आईना की साफ़ करते रहते है,
भूल जातें है ख़ुद के चेहरे साफ़ करना।

कभी अज़ान में, कभी आरती की
आवाज़ में खोजते रहे सुकून।
यादों से भागे फिरते रहे फ़िज़ूल।
पलकों के दहलीज़ पर चमकते रहे
कुछ सितारे और टूट कर बरसते रहे।
इंद्रधनुष के रंग, बेरंग हो गए।
यादों के चराग़ मज़ारों में टिमटिमाते रह गए।

लफ़्ज़ों के इस्तेमाल का दाम नहीं लगता।
पर लफ़्ज़ लफ़्ज़ मिल इज़हार करते हैं,
कई नई तस्वीर और तहज़ीब।
कलम के क़ैद-ओ-रिहाई से निकले
लफ़्ज़ ख़ूबसूरत मंज़र हैं ढालते,
या हैं रंग बिगाड़ते।
कविता, खबर, कहानियाँ….
अमूल्य या मूल्यहीन,
शालीन, सभ्य या अश्लील।
लफ़्ज़ों में हैं जादू-मिसाल,
टूटे लफ़्ज़ हैं तोड़ते, मीठे लफ़्ज़ हैं जोड़ते।

जिसे भूलना चाहा, उम्र कट गई भुलाने में।
जो याद रखना चाहा, ना जाने कब भूल गए।
भूलना-भुलाना नहीं कोई ख़ता,
यह इंसानी फ़ितरत है ज़रूरी,
दिल-औ-दिमाग के सुकून के लिए।
Interesting Psychological Fact- For proper
balance in life, both conservation of memory
and forgetting are important. The ability to
forget helps us prioritize, think better, make
decisions, and be more creative. Normal
forgetting, in balance with memory, gives us
the mental flexibility to grasp abstract concept
from a morass of stored Information.

ज़िंदगी में मिलतीं कई हैं राहें।
कुछ राहें जातीं हैं
तिमिर से तिमिर… अंधकार की ओर।
कुछ अंधकार से रोशनी की ओर,
कुछ ज्योति से तिमिर की ओर,
कुछ ज्योति से ज्योति की ओर।
इन मुख़्तलिफ़ राहों से चुन लो
किधर है जाना।
इन राहों में जिसे चाहो चुनो,
वापस लौटने की नहीं है गुंजाइश,
शर्त-ए-ज़िंदगी बस इतनी है।

जीवन संग्राम में सबसे बड़ा समर है,
जीतना अपने आप से।
अपने आप को स्वीकार करना,
साथ अपनी कमियों के।
अपने आप को प्यार करना।
अपने एहसासों पर इख़्तियार रखना,
अपने एहसासों के इख़्तियार में नहीं रहना।

कुछ कहना था, कुछ सुनना था।
पर बात अधूरी रह गई।
क़िस्सा-ए-इश्क़ छेड़ा,
पर कहानी अधूरी रह गई।
क्या शिकवा आल्फ़ाज़ो और
लफ़्ज़ों की ग़र वे अनसुनी रह गई।
जब नज़्म-ए-ज़िंदगी अधूरी रह गई।

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