
ज़िंदगी की झलक


ज़िंदगी सफ़र है
मिलने-बिछड़ने और खोने-पाने का।
कई अपने खो जातें है राहों में।
साथ छोड़ जातें है कई दोस्त बहारों में।
ख़ुद को ना खोना कभी,
किसी को पाने की ज़िद में।
किसी को मनाने की जिद में।
कोई मोल समझे ना समझे,
ना भूलो अपना अनमोल मोल
कि तुम अर्श….आसमान का सितारा हो।

Psychological fact- Self acceptance and self-love are important for living happier and healthier in every aspect of our life.
अर्श….आसमान में चमकते आफ़ताब की तपिश और
महताब की मोम सी चाँदनी
ज़हन को जज़्बाती बना देते हैं.
सूरज और चाँद की
एक दूसरे को पाने की यह जद्दोजहद,
कभी मिलन नहीं होगा,
यह जान कर भी एक दूसरे को पाने का
ख़्याल इनके रूह से जाती क्यों नहीं?
****
अर्थ –
अर्श-आसमान।
आफ़ताब- सूरज।
महताब- चाँद।
ज़हन – दिमाग़।


आसमान छूने की चाहत छोड़,
कैद कर लिया है अपने को,
अपनी जिंदगी को,
खुले दरवाजे और शीशे की कुछ अजनबी दीवारों, खिड़कियों में।
जैसे बंद पड़ी किताबें,
कांच की अलमारी से झांकती हैं अपने को महफ़ुज मान,
पन्नों में अपनी दास्तानों को कैद कर।
अब खाली पन्नों पर,
अपने लफ्ज़ों को उतार
रश्म-ए-रिहाई की नाकाम कोशिश कर रहें हैं।
बरसात की झड़ी
बादलों का गरजना ,
बरसती बूँदों की झड़ी
से प्यार हो जाता हैं ,
जब नीले आसमान में
छिटके इंद्रधनुष की सतरंगी
छँटा खिड़की तक उतर आती हैं.
धनक दिल और धड़कनों को अपने रंग में रंग जाती है.

आसमान के बादलों से पूछा –
कैसे तुम मृदू- मीठे हो..
जन्म ले नमकीन सागर से?
रूई के फाहे सा उङता बादल,
मेरे गालों को सहलाता उङ चला गगन की अोर
अौर हँस कर बोला – बङा सरल है यह तो।
बस समुद्र के खारे नमक को मैंने लिया हीं नहीं अपने साथ।
सम्बन्धों को बनाये रखना ,
ईमानदारी से रिश्ते निभाये रखना ,
जीवन जीने की कला है।
वरना …..
टूटते रिश्ते , बिखरते लोगों को देखा है ,
आसमान के आँसुओं को ओस बन कर टपकते देखा है ।
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