The moon !!

If you want the moon ,

Do not hide from the night,

If you want a rose ,

Do not run away from the thorns,

If you want to love ,

Do not hide from yourself .

~ Rumi

 

 

 

Image from internet.

कन्या पूजन ( कविता )

बस एक पुरानी कविता आज के दिन को समर्पित है !!!!

अखबार के पन्ने  रंगे हैं ‘हैप्पी विमेंस डे’ की

बधाईयों  से,

लेकिन इन खबरों को पढ़ने के बाद

क्या लिखा जाए और क्यों लिखा जाए?

 

Todays News – The Indian Express wed, MARCH 8, 2017

  1. 19 foetuses found: homeopath held, police say he has confessed.
  2. women dies in botched-up abortion.
  3. sold to a brothel at 12, she fought diseases, poverty, but hung on to hope.

 

नवरात्रि की अष्टमी तिथि ,
प्रौढ़ होते, धनवान दम्पति ,
अपनी दरिद्र काम वालियों
की पुत्रियों के चरण
अपने कर कमलों से
प्यार से प्रक्षालन कर रहे थे.

अचरज से कोई पूछ बैठा ,
यह क्या कर रहें हैं आप दोनों ?

अश्रुपूर्ण नत नयनों से कहा –
“काश, हमारी भी प्यारी संतान होती.”
सब कुछ है हमारे पास ,
बस एक यही कमी है ,

एक ठंडी आह के साथ कहा –
प्रायश्चित कर रहें है ,
आती हुई लक्ष्मी को
गर्भ से ही वापस लौटाने का.

Source: कन्या पूजन ( कविता )

Happy Women’s Day

God, take my soul to that place, where I may speak without words.
~ Rumi

 

My research work was based on ‘educated Indian women’.  I met 400+  women and applied various Psychological tests and questionnaire on them.  

Many of them shared their stories and sorrows with me . It took me to an entire different world. A Hidden World !!!  as our society’s taboos do not allow them to openly  discuss their issues………. 

In the changing social scenario, I feel, still things have not changed much for them. Can we progress by leaving almost,  fifty percent of god’s best creation  behind??

मेरे पी एचङी यानि शोध  के अध्ययन  का विषय ‘भारतीय पढ़ी लिखी महिलाएं’  थीं। इस काम के लिए मैं 400 से ज्यादा महिलाओं से मिली और उनके बहुत से मनोवैज्ञानिक टेस्ट लिये।  मेरी नज़रों के  सामने महिलाओं की दुनिया का एक नया नजारा आया। अक्सर हम ऊपर से दिख रही  दुनिया को ही सच  मानते हैं, पर जब सच्चाई की चादर हटती है तो बहुत से दर्द अौर तकलीफ भरी बातें नजरों के सामने आती है। जिन्हें कहने के लिये मेरे पास शब्द कम पङते हैं।

उन की जिंदगी की कहानियाँ सुनी। जिसे वे समाज के  बंदिशों की वजह से बताने में हिचकिचाती हैं। मेरे इस ब्लॉग के लगभग सारे पोस्ट महिलाअों की सच्ची कहानियां या अनुभव से प्रेरित है। अौर कुछ मेरे अनुभव है मेरी जिंदगी के । आप उस दर्द को कविताअों और कहानियों में महसूस कर सकते हैं।

दुनिया तेजी से बदल रही है, पर मुझे आज भी महिलाअों की स्थिती में ज्यादा बदलाव नज़र नहीं आता है।  मैं  यह कभी नहीं समझ पाती हूँ कि अपनी  लगभग, आधी आबादी को…… ईश्वर की सर्वोत्तम कृति को पीछे छोङ कर कितना आगे जा सकते हैं हम ????

 

वह कौन थी?

जिन्दगी में उलझी-उलझी

सब कुछ सुलझाने की कोशिश में,

बहुत कुछ झेलती हुई

जिन्दगी के सैकङो रंगों से खेलती हुई

खङी

कुछ परेशान, कुछ हताश,

फिर भी हँसती सी।

वह कौन है?

??????

  नारी …

 

 

images courtesy internet.

 

 

 

 

जिंदगी के रंग- कविता 15

News PUNENewsline , Tuesday, MARCH 7, 2017

SSC Exam, Fearing paper leak cases,

 

फिसलते हुए वक्त को रोकना बस में नहीं है

जितना पकड़ो,

रेत की तरह मुट्ठी से रिस जाता है

बस बदलता ही रहता है  यह वक्त,

जिंदगी के  नये नये  परीक्षाअों  के साथ।

कितना भी पूछ लो पंडित नजूमियों से आगे क्या होगा???

कोई जवाब नहीं मिलता,

वक्त अौर जिंदगी में आगे क्या होगा ?

पर यह इंसान भी क्या चीज है,

खुद ही परीक्षा लेता है अौर

अक्सर  परीक्षा के पर्चे, परीक्षा से पहले

चंद सिक्कों के लिये  बेच दिया करता  हैं…………

ख्वाबों ख्यालों ख्वाहिशों भरी जिंदगी -कविता

I have a thousand desires, all desires worth dying for………..

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले…

  MIRZA GHALIB

 

ख्वाबों ख्यालों ख्वाहिशों  से

बहुत आगे आ चुकी है जिंदगी।

गुनगुनाती सुबहें अौर शाम की

बस कुछ खुमारी बची है।

जिंदगी की जिम्मरदारियों ने,

वक्त के साथ क्या-क्या  बदल दिया?

अब तो अपने आप से बातें करने के लिए भी,

वक्त से इजाजत लेनी पड़ती है।

पर अभी भी  नही बदलीं हैं,

तो हसरतें अौर हज़ारों ख्वाहिशें…………..

 

image from internet

#AWoman

    women 1.jpg

                Women have been called queens or lakshmi for

                 a long time, but is the kingdom given to them

                  worth ruling with so many odds? ………..

                  ….acid attacks, surname change, taboos, ban

                 in entering shrines, rapes, female fotecide …

                                                   #AWoman

                                         Happy Womens’ Day!!!

In Advance

 

 

Attention

The attention
you give
to others
is a gift
you also give
to yourself.

Source: Attention

Are you OK !!

How beautiful to find 

a heart that loves you,

Without asking you

for anything,

 but to be…..

okay !!!!!

 

image courtesy internet.

फ़ीनिक्स या मायापंछी ? -कविता Phoenix-poetry

In Greek mythology, phoenix   is a long-lived bird that is cyclically regenerated or reborn. Associated with the Sun, a phoenix obtains new life by arising from the ashes . may symbolize renewal

फ़ीनिक्स एक बेहद रंगीन पक्षी  होता है । जिस की चर्चा प्राचीन मिथकों व दंतकथाओं में पाया जाता है।  माना जाता है कि  वह मर कर भी राख से पुनः जी उठता है।

phoenix  1.jpg

एक लड़की भीगी आंखों वाली।

उसकी भीगी आंखें जैसे,

अोस भरी भीगी रातें हो।

थोड़ी   जिद्दी, थोङी हैरान-परेशान,

माया पंछी की तरह मायावी।

लड़ती झगड़ती दुनिया की अनुचित बातों से,

फिनिक्स

की तरह हर बार फिर से उठ जाती

पता नहीं कहां से वह शक्ति लाती

कितनी बार  राख से पुनर्जन्म लेने की काबलियत है उसकी?

हर बार, हर बार………..पर  कितनी बार……..?

कौन जाने कितनी बार??????????

 

 

Images from internet.

 

 

 

निद्रा मग्न राजकन्या -उर्मिला, कविता; Urmila -The sleeping beauty of Ramayna-poem,

 

   A mythological story  -Lakshman begged Nidra devi, the goddess of sleep,to leave him alone for fourteen years so that he could guard his brother and sister-in-law night and day.  But the law of nature demanded that someone should bear the burden of Lakshman’s share of sleep. “Go to my wife, Urmila, and inform her of the situation,” said Lakshman. Nidra went to Urmila.

एक किवदंती के अनुसार–  लक्ष्मण ने  चौदह साल के बनवास में निद्रा की देवी से वरदान माँगा कि उसे नींद ना आये अौर वह रात-दिन जाग कर  राम-सीता की सुरक्षा कर सके।  ऐसे में लक्ष्मण ने नींद को अपनी पत्नी उर्मिला के पास भेज दिया और अपना सन्देश भी भेजा,  लक्ष्मण के हिस्से की नींद उर्मिला को मिले अौर कहते हैं उर्मिला चौदह साल सोती रही।

मैं निद्रा  मग्न राजकन्या,

जनक नन्दिनी थी, पर नहीं कहलाई जानकी ,

 ना कहा मिथीला की मैथिली

ना विदेह की वैदेही कहलाई.

ना किसी ने उर्मिला-लक्ष्मण कहा सीताराम की तरह।

 राम कहलाये सियावर,  किसी ने लक्ष्मण को भी कहा होता उर्मिला-वर.

इन बातों का मुझे दुःख नहीं।

 पर 

मैंने तो पतिविहिन चौदह वर्ष का वनवास काटा था।

वनवास साथ जाने को  तैयार थी

मुझे क्यों छोङ गये लक्ष्मण?

नींद में नहीं ,ङूबी थी विषाद  में मैं।

किशोर पति चौदह वर्ष बाद आया  पुर्ण पुरुष बन ।

  फिर

दुर्वासा के श्राप से अयोध्या को बचाने,

तुमने ले ली सरयू नदी में जल समाधी

चले गये अनंत यात्रा पथ पर।

पर मेरा क्या?

रह गया कभी ना खत्म होने वाला वैराग्य …………

Image from internet.