उसने हँस कर कहा –
तुम्हारी कुछ बातें
मुझे समझ नहीं आतीं……….
जवाब मिला ,
तुम तो पहेली हो।
मुझे तुम्हारी कुछ भी बातें
समझ नहीं आती।
फिर भी सुनना अच्छा लगता है………
उसने हँस कर कहा –
तुम्हारी कुछ बातें
मुझे समझ नहीं आतीं……….
जवाब मिला ,
तुम तो पहेली हो।
मुझे तुम्हारी कुछ भी बातें
समझ नहीं आती।
फिर भी सुनना अच्छा लगता है………
Goodbyes are only
for those who love
with their eyes.
Because…
for those who love
with their heart
and soul there is
no such thing as separation……..
~Rumi
IndiSpire – Ideas for Edition 185
Do you have that one person who was once your best companion but now a complete stranger? What changed?
जिंदगी के सफर में जब भी रिश्तों की
कश्ती ङूबती है
कभी माँझी, कभी मौसम अौर
कभी नदी के भँवर ………. बदनाम होते हैं।
पर जब नाव का छुपा सुराख़ ही उसे
ङूबाने लगे ,
तब वफा – वेवफा, टूटना – छूटना,
अपना -पराया क्या मतलब रखतें हैं?
धोखा… अविश्वास का सुराख़…..
किसी को मार ङालने
के लिये अकेले हीं काफी है।
यह
रिश्तों को जीने नहीं देता………
पलट कर देखा, लगा काश…..
बीता समय लौट आये।
जिंदगी ने हँस कर कहा –
यह लिखना -मिटाना
फिर कुछ नया लिखना……..
यह तुम्हारी फितरत होगी,
हमारी नही।
हम तुम्हारी तरह लेखक या कवि नहीं हैं।
दूसरा मौका हम नहीं देते!!!!!
सन्तोषः परमो लाभः सत्सङ्गः परमा गतिः ।
विचारः परमं ज्ञानं शमो हि परमं सुखम् ॥
santoSaH paramo lAbhaH satsaGgaH paramA gatiH |
vicAraH paramaM jJAnaM zamo hi paramaM sukham ||
English Translation of Sanskrit Quote:
Contentment is the highest gain,
Good Company the highest course,
Enquiry the highest wisdom,
and
Peace the highest enjoyment.
The mind says
there is nothing
beyond the physical world;
The HEART says there is,
and I’ve been there many times ……
~ Rumi
(अभी अभी व्हाट्सएप्प स्टेटस में आरजे वशिष्ठ का एक वीडियो देखा जिसकी आखिरी पंक्तियों के बोल थे तो क्या हुआ…इतना अच्छा लगा की मेरे एहसास भी इसके साथ जुड़ गए…और कुछ पंक्तिया मेने भी लिख दी आशा है की आप सब पसंद करेंगे)
साथ रहने का वादा टुटा…..तो क्या हुआ..
कंधे पे जिसके रोते थे ….वो कन्धा छुटा तो क्या हुआ..
.
.
ऐसा तो नही था की तुम और हम बने ही थे एक दूजे के लिए…
साथी थे हमसफ़र तो नहीं…
राह चलते…राहे बदलते कोई साथी छूटा तो क्या हुआ…
.
.
जिस यारी के दम पर लोगो को जलाया करते थे…वो याराना ही टुट गया… तो क्या हुआ…
मुस्कुराते होठो से मुस्काने छूटी… तो क्या हुआ..
.
.
मीठे से मन की…मिठास ही मिट गई… तो क्या हुआ…
कामयाबी के शिखरो के आगे….जमींन पर कोई यार छुटा…. तो क्या हुआ
.
.
वो रोया गिड़गिड़ाया..टुटा ….जुड़ा… फिर…
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जिस राह पर हर बार मुझे
अपना कोई छलता रहा ।
फिर भी ना जाने क्यों मैं
उसी राह ही चलता रहा।
सोंचा इस बार….
रौशनी नहीं धुआँ दूँगा।
लेकिन चिराग था फितरत से,
जलता रहा..
जलता रहा……
Anonymius
जिंदगी के सफर में
सारे इम्तहान हमारे हीं हिस्से क्यों?
नतीज़े आये ना आये ,
अगला पर्चा शुरु हो जाता है
Yesterday I was clever,
so I wanted to change the world.
Today I am wise,
so I am changing myself.
~~ Rumi
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