मानवता – कविता #beingtrulyhuman-Poem


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साम्राज्य  छोङ बुद्ध   ने कहा-

मानवता हित अौर सेवा सबसे ऊपर

हम भूले, विश्व में फैला बुद्धत्व।

ईशु ने  दिया  विश्व शांति,  प्रेम और  सर्वधर्म   सम्मान संदेश।

कुरआन ने कहा  जहाँ मानवता वहाँ अल्लाह।

गीता का उपदेश- कर्मण्यवाधिकारस्ते मा……

– निस्वार्थ  कर्तव्य पालन करो।

कर्ण ने सर्वस्व अौर दधिची  ने किया अस्थि दान ,

कितना किसे याद है, मालूम नहीं।

मदाधं  मानवों की पशुवत पाशविकता जाती नहीं।

मानव होने के नाते, हमारे पास ज्ञान की कमी नहीं।

बस याद रखने की जरुरत है,

पर हम ङूबे हैं झगङे में – धर्म, सीमा, रंग , भाषा……..

हम ऊपरवाले की सर्वोत्तम कृति हैं !

कुछ जिम्मेदारी हमारी भी बनती है।

 

Topic of Indispire –

What would be your idea of an evolved human being? #beingtrulyhuman

 

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आशीर्वाद- कविता

 

किसी के जाने के बाद

यादें और आशीर्वाद
रह जाते है,
ना कोई छीन सकता है,
ना इसका बँटवारा होता है.

                                                          ( मेरे पिता के पुण्यतिथि पर , 21 Dec)

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Source: आशीर्वाद

शिवलिंग और नर्मदा ( कविता ) #SelfDiscovery – poetry

 


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एक पत्थर ने पूछा शिवलिंग से।

तुम चिकने हो, सलोने हो इसलिए

पूजे जाते हो?

हमें तो ना कोई पूछता है।

ना ही पूजता है।

शिवलिंग ने कहा- मैं भी तुम जैसा ही था।

नोकदार रुखड़ा, पत्थर का टुकड़ा।

पर मैंने अपने को छोड़ दिया

नदी के प्रवाह में, नियंता के सहारे।

दूसरों को चोट देने के बदले चोटें खाईं।

नर्मदा ने मुझे घिस – माँज कर ऐसा बनाया।

क्या तुम अपने को ऐसे को छोड़ सकोगे?

तब तुम भी शिव बन जाओगे, शिवलिंग कहलाओगे।

(ऐसी मान्यता है कि नर्मदा नदी का हर पाषाण शिवलिंग होता है या उनसे स्वाभाविक और उत्तम शिवलिंग बनते हैं। नर्मदा या रेवा नदी हमारे देश की 7 पवित्र नदियों में से एक है। नर्मदा नदी छत्तीसगढ़ में अमरकंटक मैं विंध्याचल गाड़ी श्रृंखला से निकलती है और आगे जाकर अरब सागर में विलीन हो जाती है। अमरकंटक में माता नर्मदा का मंदिर है । यह ऐसी एकमात्र नदी है जिस की परिक्रमा की जाती है यह उलटी दिशा में यानी पूरब से पश्चिम की ओर बहती है । इसे गंगा नदी से भी ज्यादा पवित्र माना जाता है । मान्यता है कि गंगा हर साल स्वयं गंगा दशहरा के दिन नर्मदा नदी के पास प्ले के लिए पहुंचती है ।यह एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। इस प्राचीन नदी की चर्चा रामायण, महाभारत , पुराणों और कालिदास के साहित्य में भी मिलता है।

हमारा जीवन भी ऐसा हीं है। जीवन के आघात, परेशनियाँ, दुःख-सुख हमें तराशतें हैं, हमें चमक  प्रदान करते हैं ।

Life is a journey of self discovery. Describe your journey till now or a part of your journey which brought to closer to a truth about life or closer to your soul and self-discovery. #SelfDiscovery

 

शब्दार्थ -word meaning

 

नियंता – ईश्वर, भगवान

प्रवाह – धार, बहाव

नर्मदा – नर्मदा नदी

 

 

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Source: शालिग्राम और नर्मदा ( कविता )

2 Year Anniversary with Word Press मेरी खुबसूरत ब्लॉग दुनिया -कविता

 

 

मेरी ब्लॉग की दुनिया

बडी खुबसूरत , सकरात्मक

और रंगो से भरी हैं.

देश – दुनिया , रंग, जात , धर्म

की सीमा से आजाद.

ना बंधन ना विवाद.

सिर्फ मित्रों की टोली

और ज्ञान -विज्ञान

मन की बातें ,

दिल की पीडा.

जो चाहे उडेल दो.

संगी -साथी बाँट लेंगे.

मेरे ब्लॉग की दुनिया बड़ी खूबसूरत हैं.

मृत कल अौर अजन्मा कल – कविता ” Dead yesterday n unborn tomorrow” -Poem #celebrateTodayThisMoment


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“Dead yesterday n unborn tomorrow , why fret about them , if today be sweet.”

कहते हैं, बीती ताहि बिसार दे , आगे की सुधि ले..

 जो बीत गई सो बात गई!!

पर बीता इतिहास तो सबक देता है।

गर उसे बोझ ना बना लें हम,

आनेवाला दिन , क्या होगा कैसा होगा?

भविष्य के गर्भ में क्या छुपा है? कौन जाने?

भविष्यनिर्माण योजना ना बनायें?

यह सपना भी तो जरुरी है।

पर यह ख्याल, यह फलसफा भी बुरा नहीं-

“कल हो ना हो……

इस क्षण  को जी लें आज ”

भविष्य के दिवा स्वप्न ,

भूत के बोझ

मृत कल अौर अजन्मे कल की चिंता क्यों?

गर आज  मधुर, खुशनुमा हो…….

शब्दार्थ-

दिवा स्वप्न – day dreaming

बिसार – forget

भविष्यनिर्माण योजना- future planning

भूत- Past

Indispire Topic-

Regretting the past and worrying about the future will further flatten the time in which you are living and celebrate today and try to employ the most of it.Write a post on the celebration of Today ..This moment is the only truth. #CelebrateTodayThisMomen

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भाषा बाधा नहीं, अभिव्यक्ति है – कविता #EnglishAttacks

Language is not a barrier but a medium of expression.


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भाषा बाधा नहीं, अभिव्यक्ति है।

वैश्विक होती दुनिया के सिमटने  से,

एक -दूसरे से बातचीत करने के लिये

एक  आम माध्यम तो चाहिये।

              कभी

एक समय था जब अँग्रजी राज में सूरज डूबता नहीं था।

तभी से उनकी भाषा ने भी  राज किया।

अँग्रेज  तो चले गये,

पर अगर आज भी हम उनकी भाषा की गुलामी

करते हैं , तब यह हमारी कमजोरी है।

  क्योंकि

भाषा कोई भी हो, चमक बोलनेवाले में होती है।

मातृभाषा से ज्यादा  मधुर कुछ भी नहीं ।

भाषा बाधा नहीं, अभिव्यक्ति है !!!!!

शब्दार्थ / word meaning

अभिव्यक्ति – medium of expression.

वैश्विक-global.

आम – common.

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IndiSpire Topic –

Does speaking well in English add a sparkle to the personality of a person? If ‘yes’, then do you feel it is right? Share your views. #EnglishAttacks

प्लास्टिक धन -कविता #Demonetization

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8 बजे तक के धन, 8:15 में बेकार कागज बन गये।

पर काले धन खत्म होने की बातों ने,

देशभक्ति की भावना भर दी।

      कुछ बचाये -छुपाये छुट्टे पैसे ले

बाजार गई।

बङी सस्ती सब्जियाँ अौर रोते किसान मिले।

मातम करती कामवालियों अौर

गोलगप्पे की जिद करती बिटिया से

नजरें बचाती, खाली एटीम अौर पर्स  देख

प्लास्टिक धन ले माॅल पहुचीँ।

उन्हीं सब्जियों को 5-10 गुणा मंहगा पाया।

क्यों नहीं देखते –

हमारा पैसा कहाँ है जाता?

कुछ समझ नहीं आता,

जो हो रहा है कितना सही या गलत है,

कोर्ट अौर नेताअों की सौ बातें सुन,

कुछ समझ नहीं आता।

 

 

शब्दार्थ –

प्लास्टिक धन- Plastic Money

 

Indispire -144

नरक द्वार- कविता Door to Hell -Poem

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In Turkmenistan (1971)  a natural gas field  of Methane  was found. To prevent the spread of methane gas, geologists set it on fire and it has been burning continuously since then. It is known as the Gate to Hell/ Door to Hell / the Crater of Fire/  Darvaza Crater

तुर्कमेनिस्तान में 1971 में शक्तिशाली ग्रीन हाउस  व महत्वपुर्ण उर्जा स्त्रोत  गैस ” मीथेन ” का  एक बहुत बङा भंङार मिला। संभाल ना पाने पाने पर इसमें आग लगा दिया गया। आज इसे विभिन्न ङरावने नामों से पुकारा जाता है – नरक द्वार / ज्वालामुखी का जलता मुख / नरक के दरवाजे  /पाताल का द्वार .

प्रकृति ,धरती अौर सागर,

ने दिया इतना कुछ।

धरा का सीना चीर करते रहे दोहन।

अौर जब संभ्भाल नहीं पाये हम.

तब बचने के लिये लगा दिया आग।

अौर ४० वर्ष से इस जलते धधकते आग के

गोलाकार , ज्वालामुखी के मुख को

हमने दे दिया नाम “नरक का द्वार”

आश्चर्य  है,  समय-समय यहाँ आने वाली हजारों  मकड़ियां,

क्या वे भी हमारी तरह  यहां घूमने चली आती हैं?

पर्यटक हैं?

या बनाती हैं हमारी नासमझी का उपहास अौर मातम?

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स्वंयसिद्ध -कविता

क्या भविष्य को संजोने की लालसा

हमारी व्याकुलता अोर चिंता को बढ़ाती है?

नहीं, भविष्य के सपने सजाना

तो मनुष्य होने की

पहचान है।

यह व्यग्रता, उद्वेग तो

स्वंयसिद्ध , सर्वशक्तिमान   बन

भविष्य को नियंत्रित करने की कोशिश का परिणाम है…….

शून्य -कविता #Zero -Poem


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 हम शून्य से उपजे हैं

शून्य में मिल जायेंगे.

सिफर को सिफर नहीँ

जिंदगी का सफर मानो

यही हैं जीवन का गणित

सब में मिल सकता हैं यह

 अलग हो, फ़िर भी  अनमोल होगा .

 गणित को शून्य  दिया ……

पूज्यम आर्यभट्ट ने,

 हम शून्य से उपजे हैं

शून्य में मिल जायेंगे

शब्दार्थ –

शून्य – सिफर , पूज्यम , जीरो ,अनन्त.