2 Year Anniversary with Word Press मेरी खुबसूरत ब्लॉग दुनिया -कविता

 

 

मेरी ब्लॉग की दुनिया

बडी खुबसूरत , सकरात्मक

और रंगो से भरी हैं.

देश – दुनिया , रंग, जात , धर्म

की सीमा से आजाद.

ना बंधन ना विवाद.

सिर्फ मित्रों की टोली

और ज्ञान -विज्ञान

मन की बातें ,

दिल की पीडा.

जो चाहे उडेल दो.

संगी -साथी बाँट लेंगे.

मेरे ब्लॉग की दुनिया बड़ी खूबसूरत हैं.

मृत कल अौर अजन्मा कल – कविता ” Dead yesterday n unborn tomorrow” -Poem #celebrateTodayThisMoment


Indian Bloggers

“Dead yesterday n unborn tomorrow , why fret about them , if today be sweet.”

कहते हैं, बीती ताहि बिसार दे , आगे की सुधि ले..

 जो बीत गई सो बात गई!!

पर बीता इतिहास तो सबक देता है।

गर उसे बोझ ना बना लें हम,

आनेवाला दिन , क्या होगा कैसा होगा?

भविष्य के गर्भ में क्या छुपा है? कौन जाने?

भविष्यनिर्माण योजना ना बनायें?

यह सपना भी तो जरुरी है।

पर यह ख्याल, यह फलसफा भी बुरा नहीं-

“कल हो ना हो……

इस क्षण  को जी लें आज ”

भविष्य के दिवा स्वप्न ,

भूत के बोझ

मृत कल अौर अजन्मे कल की चिंता क्यों?

गर आज  मधुर, खुशनुमा हो…….

शब्दार्थ-

दिवा स्वप्न – day dreaming

बिसार – forget

भविष्यनिर्माण योजना- future planning

भूत- Past

Indispire Topic-

Regretting the past and worrying about the future will further flatten the time in which you are living and celebrate today and try to employ the most of it.Write a post on the celebration of Today ..This moment is the only truth. #CelebrateTodayThisMomen

image from internet.

भाषा बाधा नहीं, अभिव्यक्ति है – कविता #EnglishAttacks

Language is not a barrier but a medium of expression.


Indian Bloggers

भाषा बाधा नहीं, अभिव्यक्ति है।

वैश्विक होती दुनिया के सिमटने  से,

एक -दूसरे से बातचीत करने के लिये

एक  आम माध्यम तो चाहिये।

              कभी

एक समय था जब अँग्रजी राज में सूरज डूबता नहीं था।

तभी से उनकी भाषा ने भी  राज किया।

अँग्रेज  तो चले गये,

पर अगर आज भी हम उनकी भाषा की गुलामी

करते हैं , तब यह हमारी कमजोरी है।

  क्योंकि

भाषा कोई भी हो, चमक बोलनेवाले में होती है।

मातृभाषा से ज्यादा  मधुर कुछ भी नहीं ।

भाषा बाधा नहीं, अभिव्यक्ति है !!!!!

शब्दार्थ / word meaning

अभिव्यक्ति – medium of expression.

वैश्विक-global.

आम – common.

l

IndiSpire Topic –

Does speaking well in English add a sparkle to the personality of a person? If ‘yes’, then do you feel it is right? Share your views. #EnglishAttacks

प्लास्टिक धन -कविता #Demonetization

Indian Bloggers

8 बजे तक के धन, 8:15 में बेकार कागज बन गये।

पर काले धन खत्म होने की बातों ने,

देशभक्ति की भावना भर दी।

      कुछ बचाये -छुपाये छुट्टे पैसे ले

बाजार गई।

बङी सस्ती सब्जियाँ अौर रोते किसान मिले।

मातम करती कामवालियों अौर

गोलगप्पे की जिद करती बिटिया से

नजरें बचाती, खाली एटीम अौर पर्स  देख

प्लास्टिक धन ले माॅल पहुचीँ।

उन्हीं सब्जियों को 5-10 गुणा मंहगा पाया।

क्यों नहीं देखते –

हमारा पैसा कहाँ है जाता?

कुछ समझ नहीं आता,

जो हो रहा है कितना सही या गलत है,

कोर्ट अौर नेताअों की सौ बातें सुन,

कुछ समझ नहीं आता।

 

 

शब्दार्थ –

प्लास्टिक धन- Plastic Money

 

Indispire -144

नरक द्वार- कविता Door to Hell -Poem

Indian Bloggers

In Turkmenistan (1971)  a natural gas field  of Methane  was found. To prevent the spread of methane gas, geologists set it on fire and it has been burning continuously since then. It is known as the Gate to Hell/ Door to Hell / the Crater of Fire/  Darvaza Crater

तुर्कमेनिस्तान में 1971 में शक्तिशाली ग्रीन हाउस  व महत्वपुर्ण उर्जा स्त्रोत  गैस ” मीथेन ” का  एक बहुत बङा भंङार मिला। संभाल ना पाने पाने पर इसमें आग लगा दिया गया। आज इसे विभिन्न ङरावने नामों से पुकारा जाता है – नरक द्वार / ज्वालामुखी का जलता मुख / नरक के दरवाजे  /पाताल का द्वार .

प्रकृति ,धरती अौर सागर,

ने दिया इतना कुछ।

धरा का सीना चीर करते रहे दोहन।

अौर जब संभ्भाल नहीं पाये हम.

तब बचने के लिये लगा दिया आग।

अौर ४० वर्ष से इस जलते धधकते आग के

गोलाकार , ज्वालामुखी के मुख को

हमने दे दिया नाम “नरक का द्वार”

आश्चर्य  है,  समय-समय यहाँ आने वाली हजारों  मकड़ियां,

क्या वे भी हमारी तरह  यहां घूमने चली आती हैं?

पर्यटक हैं?

या बनाती हैं हमारी नासमझी का उपहास अौर मातम?

Image from internet.

स्वंयसिद्ध -कविता

क्या भविष्य को संजोने की लालसा

हमारी व्याकुलता अोर चिंता को बढ़ाती है?

नहीं, भविष्य के सपने सजाना

तो मनुष्य होने की

पहचान है।

यह व्यग्रता, उद्वेग तो

स्वंयसिद्ध , सर्वशक्तिमान   बन

भविष्य को नियंत्रित करने की कोशिश का परिणाम है…….

शून्य -कविता #Zero -Poem


Indian Bloggers

 हम शून्य से उपजे हैं

शून्य में मिल जायेंगे.

सिफर को सिफर नहीँ

जिंदगी का सफर मानो

यही हैं जीवन का गणित

सब में मिल सकता हैं यह

 अलग हो, फ़िर भी  अनमोल होगा .

 गणित को शून्य  दिया ……

पूज्यम आर्यभट्ट ने,

 हम शून्य से उपजे हैं

शून्य में मिल जायेंगे

शब्दार्थ –

शून्य – सिफर , पूज्यम , जीरो ,अनन्त.

दरवेश रक्स / नृत्य- कविता (whirling Darvesh/ sufi dance- Poem)


Indian Bloggers

जीवन एक नृत्य हैं.

शायद दरवेश रक्स की तरह ,

गोल गोल अपने  ही घेरे में

घूमते और झूमते.

चलती रहती हैं जिंदगी.

या दिये की लौ की तरह हैं.
ऊपर उठती खुशी से लपलपाती.

कभी जीवन के झँझावात जैसे

हवा  के झोंकों को झेलती.

कांपती , ठिठकती.

कभी लौ  के खुबसूरत रंग .

.पीले लाल सुनहरे रंग जैसी जिंदगी .

दीपायमान लौ या  दरवेश रक्स

क्या हैं ये  जिंदगी?

जिंदगी के रंग – कविता 10

कभी हमनें बिना सोंचे कुछ कह दिया।
उलझन में , कभी बिना बोले रह गये।

ना जाने इस  गलतफहमी में

कब कहाँ किसी का दिल दुखा दिया,

कब अपने दिल में छाले बना लिया………..

 

 

 

 

 

दुनिया के धोखे

बातें करते हैं लोग बङी-बङी,

बनते है शिक्षित और बौद्धिक,

दूसरों को कहतें हैं फरेबी अौर धोखेबाज।

कुछ ने बेबसी – गरीबी से धोखा दिया।

पर उनका क्या  जो सबल – सामर्थवान-धनवान हैं?

कहतें हैं पाना मुश्किल था,

इस लिये धोख का सरल राह पकङ ली?

सभी चीजें मुश्किल  है,

पाने के बाद  हीं वे आसान होती हैं

क्या बस   धोखे की दुनिया है?