वर्षा – कविता 

मुम्बई  की रिमझिम वर्षा की फुहारें

 गंदलाये समुन्द्र की उठती पटकाती   लहरे,

आसमान से  नीचे झुक आये धुंध  बने बादल , 

सीकते भुट्टो की सोंधी  खुशबू 

 देख  फुहारों में भीगने का दिल हो आया. …..

बाद में  कहीँ  नज़र आया 

 टपकती  झोपड़ियों में भीगते ठिठुरते बच्चे ,

यह मेह किसी के लिये मजा और किसी की सजा है.

 बाहर का बरसात,  अंदर आँखो के रस्ते बरसने  लगा.

 

Image from internet.

जिंदगी के रंग- कविता 15

 जिंदगी ने बहुत से दर्द भरे सबक दिये, 

 उन्हें  पन्नों पर उतारते-उतारते ,

फिर से……………

इश्क हो गया  जिंदगी,  कलम  अौर कागज  से

आप   इन्हें जो चाहे कहें,

जिंदगी के रंग,  जिंदगी के फलसफे, तजुर्बे या कविता……….

 

जिंदगी के रंग -17

 

हसरतों -अरमानों को पूरी करने की उम्र में, जब जिंदगी सबक सिखाने लगे,

तब समझ लो जिंदगी रंग दिखाने लगी है,  तुम्हें दरिया  सा गहरा बनाने लगी है।

गीता , कुरआन , बाइबल – कविता 

एक दिन ऊपर वाले ने कहा –

हर दिन कुछ ना कुछ

नये की कामना हैं तुम्हें.

कभी नया भगवान भी तो

आजमा कर देखो.

बहुत कुछ नया मिल जायेगा.

गीता और रामायण के बाद

आजकल कुरआन और बाइबल

पढ़ने लगी हूँ……

Source: गीता , कुरआन , बाइबल -कविता 

काँच की किर्चियाँ

 

भरोसा दिल मे उतरने वाले पर करो, दिल से उतरने वालों पर नहीं।

टूटे काँच की किर्चियाँ  अौर  टूटा  भरोसा बङी चुभन देता है। ।

 

image from internet.

 

दूरी अौर फासले

कुछ दूरी अौर फासले रहने देना ही अच्छा है।

नजदीकीयों  से अक्सर रिश्ते बिगङते देखा है।। 

राधाकृष्ण Radha-Krishna – Poem

The divine, eternal, and spiritual  love –  Krishna went to  Radha to bid his farewell before leaving Vrindavan. They spent a few minutes without a word. They knew each other’s feelings.  Words had little meaning to convey their love.

 

कान्हा ने राधा से पूछा, कहाँ है तु खोई-खोई?

क्यों तु  लग रही है  रोई-रोई  ?

राधा ने कहा —

कुछ रिश्ते भावनाअों -एहसासों मे ङूबे होते हैं।

इसलिए निर्दोष होते हैं …
 सुंदर होते हैं…… 
मैंने जितना तुम्हें  खोजा,
जितना अधिक जाना,
उतना  अौर पाना चाहा, पर पाया  नहीं !

कान्हा ने कहा – इसलिये क्योकिं,

अपने दिल में तो तुने झाँका हीं नहीं……

हर मंदिर में तु ही तो  होती है  मेरे साथ। 

 

राधा-कृष्ण के आध्यात्मिक रिश्ता अौर अलौकिक प्रेम की अनेकों कहानियाँ है। वृंदावन छोङने से पहले कान्हा, राधा से मिले। पर दोनों  कुछ नहीं  बोल रहे थे, बस चुप थे। पर मौन की भी अपनी एक भाषा होती है।

 

 

 

 

 

 

बच्चे – मुक्तक

 

मंदिर के सामने  बच्चे खेल रहे थे,

मस्जिद के सामने लङने लगे।

चर्च के सामने झगङने लगे।

पर लोग हैरान थे, मुद्दा मंदिर, मस्जिद, चर्च नहीं 

एक नन्ही सी, हवा में लहराती पतंग क्यों है  ? ??

जिंदगी के रंग- 13

किसी ने  ग़ालिब से पूछा – …..”कैसे हो?”   ग़ालिब ने हँस कर कहा –

 

जिंदगी में ग़म है……

      ग़म में दर्द  है………….

   दर्द में मज़ा है ………

अौर मज़े में हम हैं।

ज़माने का दौर – कविता

News – Blast at Chinese kindergarten was a bomb attack

  Nursery blast kills seven in China’s Xuzhou

हमारे स्कूल पर बम गिरते हुए …..
क्या उनके जेहन में एक बार भी, 
अपने घरों, बच्चों का ख़याल आया था ?

लोग इतने क्रूर क्यों है ?
हमने उनका क्या बिगाडा था ?
हम इस कठोर दुनिया के लिये नहीँ बने ……

इसलिये दुनिया से विदा हो गये ।
पर , इतने बड़े  अपराध बोध के साथ ……
क्या ऐसे लोग चैन से जी सकेगें ??

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“ज़माने के जिस दौर से हम गुज़र रहे हैं, अगर आप उससे वाकिफ़ नहीं हैं तो मेरे अफसाने पढ़िये और अगर आप इन अफसानों को बरदाश्त नहीं कर सकते तो इसका मतलब है कि ज़माना नाक़ाबिले-बरदाश्त है। मेरी तहरीर(लेखन) में कोई नुक़्स नहीं । जिस नुक़्स को मेरे नाम से मनसूब किया जाता है, वह दरअसल मौजूदा निज़ाम का एक नुक़्स है। मैं हंगामा-पसन्द नहीं हूं और लोगों के ख्यालात में हैज़ान पैदा करना नहीं चाहता। मैं तहज़ीब, तमद्दुन, और सोसाइटी की चोली क्या उतारुंगा, जो है ही नंगी। मैं उसे कपड़े पहनाने की कोशिश भी नहीं करता, क्योंकि यह मेरा काम नहीं, दर्ज़ियों का काम है ।”
― Saadat Hasan Manto