मैं एक लड़की ( कविता 1 )

मेरी पाँच कविताएँ / My 5 Poems Published in She The Shakti, Anthology– POEM 4

 

इस दुनिया मॆं मैने
आँखें खोली.
यह दुनिया तो
बड़ी हसीन
और रंगीन है.

मेरे लबों पर
मुस्कान छा गई.
तभी मेरी माँ ने मुझे
पहली बार देखा.
वितृष्णा से मुँह मोड़ लिया

और बोली -लड़की ?
तभी एक और आवाज़ आई
लड़की ? वो भी सांवली ?

Source: मैं एक लड़की ( कविता 1 )

तरीके और हथियार ( कविता )

मेरी पाँच कविताएँ / My 5 Poems Published in She The Shakti, Anthology– POEM 3

 

उसके पति ने कहा ,
सजावट की तरह रहो ,
कौन तुम्हें मदद करेगा ?
यह पुरुषों की दुनियाँ हैं.
सब के सब , कभी न कभी
ऐसे रिश्ते बनाते हैं.
अगर तुमने मेरी जिंदगी मॆं
ज्यादा टाँग अडाई ,
तब सब से कह दूँगा –
यह औरत पागल हैं.

उसने नज़रें उठाई और कहा-
सब के सब तुम्हारे जैसे नहीँ हैं.
तुम्हारे ये तरीके और हथियार पुराने हो गये ,
मुझ पर काम नहीँ करते.
हाँ , जो तुम जैसे हैं ,
वहीं तुम्हारा साथ देते हैं.

मैं नारी हूँ, रानी हूँ, शक्ति हूँ।
इसलिये शर्मिंदा होने का समय तुम्हारा हैं.
मेरा नहीँ.

आज़ के आधुनिक समय में अभी भी कुछ ऐसे लोग मिल जाते हैं , जो नारी को समानता का दर्ज़ा देने में विश्वाश नही रखते.

Source: तरीके और हथियार ( कविता )

अभिमन्यु की तरह (कविता) poem of an unborn baby

मेरी पाँच कविताएँ / My 5 Poems Published in She The Shakti, Anthology– POEM 2

 

चक्रव्यु तोङने वाले ,

अभिमन्यु की तरह सुनती वहाँ,

बाहर की बातें –

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ,

मुझे नहीं पता, मैं कौन हूं? बेटा या बेटी ?

पर बङे शुकून से मैं थी वहाँ,

सबसे सुरक्षित, महफूज।

तभी, एक दिन किसी ने प्रश्न किया –

बेटा है या बेटी ?

आवाज आई – बेटी !!

धीमा सा उत्तर आया – नहीं चाहिये, गिरा दो ।

 

Source: अभिमन्यु की तरह (कविता) poem of an unborn baby

 

Image from internet.

चेहरा नहीं तो भाग्य तो सुन्दर होता (कविता)

मेरी पाँच कविताएँ / My 5 Poems Published in She The Shakti, Anthology– POEM 1

वह कभी आइने में अपना सुकुमार सलोना चेहरा देखती

कभी अपनी माँ को।

दिल में छाले, सजल नेत्र, कमसिन वयस, अल्पशिक्षित

कुछ माह की विवाहिता,

पति के चरित्रहिनता व बदमिजाजी से तंग,

वापस आई पिता ग़ृह, अपना घर मान कर।

माँ ने वितृषणा से कहा –

पति को तुम पसंद नहीं हो।

तुम्हारा चेहरा नहीं, कम से कम भाग्य तो सुन्दर होता।

वह हैरान थी, माँ तो विवाह के पहले से जानती थी

उसके ससुराल की कलकं-कथा,

अौर कहा था – घबराओ नहीं,

जल्दी हीं सुधर जायेगा।

“मेहंदी रंग लायेगी”

फिर आज़ यह उसके भाग्य अौर चेहरे की बात कहां से आई?

Source: चेहरा नहीं तो भाग्य तो सुन्दर होता (कविता)

मेरी पाँच कविताएँ / My 5 Poems Published in She The Shakti, Anthology

An ode to every women, An ode to  She the Shakti

                    A poetic celebration of femininity, A chorus of change.

                                       ।।300 Poems by 124 Poets।।

It is an anthology, edited by Meenakshi M Singh. The intent of this book is to empower women’s voice through the potent medium of poetry.   My five poems are published  in the Hindi section of the book.

                                                 

    स्त्री – एक शक्ति

यह मीनाक्षी सिंह द्वारा संकलित एक काव्य संग्रह है। यह   संकलन  महिलाअों के आवाजों की अभिव्यक्ति कविता के माध्यम कर रही है।  जिसमें 124 कवि अौर कवित्रियों ने 300 कवितायों में  अपने विचारों को अभिव्यक्त कियें है।  मेरी पाँच कवितायों को भी इसमें शामिल कर मुझे सम्मानित किया गया है।

मेरी कवितायें —

  1. अभिमन्यु की तरह   

    2.    तरीके और हथियार 

    3.  चेहरा नहीं तो भाग्य तो सुन्दर होता

   4. मैं एक लड़की  

  5.  कन्या पूजन  

आँसू और अफीम – कविता 

Opium addiction in Rajasthan, India :  A social Issue —- Poppy flowers are  very beautiful and delicate.  Opium is produced from it.  India  is the only country ,   produces opium gum legally  and one of very few countries that legally allows  growing poppy  to get opium for medicinal purpose.

But the negative aspect is – drug trafficking  and opium  addiction, As no. of  opium   users  are increasing day by day, specially in Rajasthan.

 

पेड़ की छाया में बैठे पुरुषों की 

अफीम की पिनक में डूबी मजलिस ने,

गुङगुङाते हुक्के का धुआँ उडाते हुए दूर ….. देखा………..

रंग बिरंगे ,  शीशे जड़े लहँगें-चोली  में मीलों से

 तपती  रेत पर, ठंडे  पानी के

घड़े  एक पर एक  रख 

गाती गुनगुनाती औरतों को.

अौर  कहा – 

 इन लुगाईयों के मजे तो  देखो ,

गीत गा रहीं है , ना दिखता है

 हम कब से भूखे बैठे है ……

पर क्या उन्हे दिखता है लुगाईयों के 

 गर्म रेत से पड़े पैरों के छालें 

और चूल्हे की लकड़ी से उठे धुयें से आये आँसू  ???

  फ़िर भी …..

वे पॉपी के फूलों सी नाजुक  अौरतें

 गाती गुनगुनाती रहती है …..

R w

 

राजस्थान, भारत में अफीम की लत: एक सामाजिक मुद्दा है —-पॉपी के फूल बङे नाजुक अौर सुंदर होते हैं। इसे अफिम तैयार किया जाता है।   भारत एकमात्र देश है जो कानूनी तौर पर अफीम गम का उत्पादन करता है । यह उन गिनती के  देशों में से एक है, जो कानूनी रूप से औषधीय उद्देश्य के लिए  अफीम प्राप्त करने के  लिये पॉपी की  खेती की अनुमति देता है।

लेकिन नकारात्मक पहलू है – अफीम की तस्करी और  दिन पर दिन   नशेङियोँ कि संख्या में वृद्धि।

 

 

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सपने -कविता Dream

Where there is pain, the cure will come.
~ Rumi

जब छोटी थी, बङे-बङे सपने देखा करती, 

अब पहले की छोटी-छोटी बातें याद आती हैं।

खुशियों अौ गम के  खेल में यह समझ आया,

ये सब आती -जाती रहती है

 अौर

 कोई ना कोई सबक दे कर जाती हैं। 

 

नाम -कविता 

खिला खिला गुलमोहर तपिश में मोहरें लूटाता रहा…..

पूरा चाँद,  रात भर  जल कर चाँदनी बाँटता  रहा.

ना पेड़ों ने कहीँ अपना नाम लिखा ना शुभ्र गगन में चाँद ने.

और हम है घरों – कब्रों पर अपना नाम लिखते रहते है.

 

half

 

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दिल से 

दिल से निकली बाते ही

अक्सर दिल को छू पाती है.

पुराने लोगों से मिलो ….बाते करो …

तो पुराने दिन याद आते है .

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बेलगाम   ख्वाहिशें-  कविता 

कुछ ख्वाहिशें बेलगाम उडती,

 बिखरती रहती है हवा के झोंकों सी.

 सभी अरमानों को पूरा करना मुशकिल है,

और  बंधनों में बाँधना भी मुश्किल है.